आओ 26 अक्टूबर को भारत की पूर्ण एकता और अखंडता की बात करें…

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आओ 26 अक्टूबर को भारत की पूर्ण एकता और अखंडता की बात करें…

कौशल किशोर चतुर्वेदी

26 अक्टूबर की तारीख भारत के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। कश्मीर के राजा हरि सिंह ने 26 अक्टूबर, 1947 को अपने राज्य को भारत में मिलाने का फैसला किया था। इससे भारत के ऐतिहासिक और भौगोलिक स्वरूप को पूर्णता मिली थी। पर इसके साथ ही जम्मू कश्मीर को लेकर हर भारतीय के मन में अपूर्णता का एक अहसास भी घर कर गया था। क्योंकि इस आशय के समझौते पर हस्ताक्षर होते ही भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर पहुंचकर हमलावर पड़ोसी पाकिस्तान की सेना के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। पर इस लड़ाई में कश्मीर का कुछ हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में चला गया। पाकिस्तान और चीन के कब्जे का वही हिस्सा आज तक दोनों देशों के रिश्तों में तल्खी की वजह बना हुआ है। इसे पाक ऑक्युपाइड कश्मीर यानि पीओके के नाम से जाना जाता है। दरअसल जम्मू और कश्मीर भारत द्वारा केंद्रशासित प्रदेश के रूप में प्रशासित एक क्षेत्र है और इसमें बड़े कश्मीर क्षेत्र का दक्षिणी भाग शामिल है, जो 1947 से भारत और पाकिस्तान के बीच और 1959 से भारत और चीन के बीच विवाद का विषय रहा है। 1947-1948 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद , जम्मू और कश्मीर रियासत के तीन अलग-अलग क्षेत्र भारतीय नियंत्रण में थे: मुस्लिम बहुल कश्मीर घाटी , हिंदू बहुल जम्मू क्षेत्र और बौद्ध बहुल लद्दाख जिला। इन क्षेत्रों को जम्मू और कश्मीर राज्य के रूप में गठित किया गया था और 1950 में अपनाए गए भारत के संविधान के अनुच्छेद 370 द्वारा विशेष दर्जा दिया गया था। भारत की संसद ने अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के प्रस्ताव पारित किए, और अनुच्छेद 35 ए को 1954 के राष्ट्रपति आदेश के निलंबन के माध्यम से समाप्त कर दिया गया। उसी समय, राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठित करने के लिए एक पुनर्गठन अधिनियम भी पारित किया गया। पुनर्गठन 31 अक्टूबर 2019 से प्रभावी हुआ। 11 दिसंबर 2023 को, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सर्वसम्मति से अनुच्छेद 370 और 35 ए को निरस्त करने को बरकरार रखा, साथ ही केंद्र सरकार को जम्मू और कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने और सितंबर 2024 से पहले विधान सभा चुनाव कराने का निर्देश दिया। विधानसभा चुनाव सितंबर से अक्टूबर 2024 तक हुए। जम्मू और कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के गठबंधन ने केंद्र शासित प्रदेश की पहली सरकार बनाई,जिसमें उमर अब्दुल्ला मुख्यमंत्री बने। तो 26 अक्टूबर 1947 से भारत में विलय हो पाए अधूरे कश्मीर में अब पूर्णता का रंग भरने के लिए केंद्र की एनडीए सरकार दृढ़ निश्चय से भरी हुई है। हो सकता है कि 26 अक्टूबर 2026 तक पाकिस्तान और चीन के कब्जे वाला कश्मीर भी भारत का हिस्सा होगा और तब भारत की एकता और अखंडता की पूर्णता का दावा किया जा सकेगा। और तब ही सही मायने में जम्मू-कश्मीर के शासक राजा हरि सिंह की आत्मा को शांति मिलेगी।

अब हम बात इसके आगे की करें। तो हाल ही में सीआईए के पूर्व अधिकारी जॉन किरियाको ने पाकिस्तान को भारत के खिलाफ युद्ध से बचने की चेतावनी दी है। उन्होंने परमाणु हथियारों पर पेंटागन के नियंत्रण का दावा किया है। भारत में आतंकवाद और अस्थिरता फैलाने की लगातार कोशिश में जुटे पाकिस्तान को एक अमेरिकी अधिकारी ने कड़ी चेतावनी दी है। दरअसल, अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के पूर्व अधिकारी जॉन किरियाको ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान को भारत के खिलाफ फड़फड़ाना बंद कर देना चाहिए। उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान , भारत के सामने कहीं नहीं ठहरता है। वह कितनी भी तैयारी कर ले लेकिन किसी भी पारंपरिक युद्ध में भारत से बुरी तरह हार जाएगा। किरियाको ने 2001 के भारतीय संसद हमले के बाद की स्थिति का जिक्र किया, जब सीआईए को लगता था कि दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देश युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि 2002 में ऑपरेशन पराक्रम के चरम पर भारत-पाकिस्तान तनाव इतना बढ़ गया था कि अमेरिका ने इस्लामाबाद से अपने नागरिकों को निकालना शुरू कर दिया था। किरियाको ने एक चौंकाने वाला दावा भी किया कि उस समय उन्हें अनौपचारिक रूप से बताया गया था कि पाकिस्तान के परमाणु हथियारों का नियंत्रण पेंटागन के पास था। मुशर्रफ ने नियंत्रण अमेरिका को सौंप दिया था। तो अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के दयापात्र मुनीर, अब फड़फड़ाना बंद करो वरना पाकिस्तान का नामोनिशान मिट जाएगा। 15 साल तक अमेरिकी केंद्रीय खुफिया एजेंसी (सीआईए) में सेवा देने वाले किरियाको ने न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में पाकिस्तान में आतंकवाद-रोधी अभियानों के अपने अनुभव साझा किए हैं।

 

और अब हम बात करें नोटाम की। दरअसल पाकिस्तान और पाकिस्तानी सेना पर 12 दिन बहुत भारी गुजरने वाले हैं। भारत की तीनों सेनाएं अगले 30 अक्टूबर से 10 नवबंर तक पश्चिमी सीमा पर संयुक्त युद्धाभ्यास करेंगी। ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह सबसे विशाल युद्धाभ्यास है और जिस तरह से हाल ही में सर क्रीक इलाके में पाकिस्तान की आसिम मुनीर की सेना की नापाक गतिविधियां सामने आई हैं, उसको देखते हुए इस युद्धाभ्यास के मायने और बड़े हो जाते हैं। भारतीय सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायुसेना के इस ज्वाइंट मिलिट्री ऑपरेशन को ‘त्रिशूल’ युद्धाभ्यास का नाम दिया गया है। भारत ने ‘त्रिशूल’ युद्धाभ्यास के लिए नोटिस टू एयरमेन (नोटाम) वाली चेतावनी भी जारी कर दी है, जिसमें बताया गया है कि तीनों सेनाएं एक विशाल युद्धाभ्यास को अंजाम देने जा रही हैं। नोटाम में बताया गया है कि पश्चिमी सीमा पर तीनों सेनाएं 30 अक्टूबर से लेकर 10 नवंबर तक ‘त्रिशूल’ युद्धाभ्यास में भाग लेंगी। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इस ‘त्रिशूल’ युद्धाभ्यास के जरिए तीनों सेनाएं भारत की बढ़ती संयुक्तता के साथ आत्मनिर्भरता और इनोवेशन का प्रदर्शन करेंगी, जो प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी की सशस्त्र सेना के लिए ‘जय’ विजन के आधारस्तंभ हैं। ‘त्रिशूल’ युद्धाभ्यास में दक्षिणी कमान के जवान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। वे अलग-अलग जगहों पर संयुक्त ऑपरेशन को अंजाम देंगे। इसमें चुनौतियों से भरा कच्छ का सरक्रीक इलाका और पश्चिमी सीमा का रेगिस्तानी इलाका भी शामिल है। यही नहीं, भारतीय जवान सौराष्ट्र तट के समुद्र में भी ऑपरेशन करेंगे। इस युद्धाभ्यास में खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी करने और टोही गतिविधियों को भी अंजाम दिया जाएगा। इसी तरह इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और साइबर लड़ाई की चुनौतियों से जुड़े अभ्यास भी किए जाएंगे।

वहीं हाल ही में पाकिस्तानी आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने एक बार फिर से भारत को गीदड़भभकी दी थी। मुनीर ने एक सप्ताह पहले भारत को चेतावनी दी थी कि वह मामूली उकसावे पर भी ‘दृढ़ जवाब’ देगा, और कहा कि न्यूक्लियराइज्ड माहौल में जंग की कोई जगह नहीं है। काकुल में पाकिस्तान मिलिट्री एकेडमी में तालिबान को चेतावनी देने के साथ-साथ भारत का भी मुनीर ने जिक्र किया था। उन्होंने कहा था, ‘’न्यूक्लियर माहौल में युद्ध के लिए जगह नहीं है, लेकिन मामूली उकसावे पर भी पाकिस्तान की तरफ से ज्यादा निर्णायक जवाब दिया जाएगा।” मुनीर ने तब बिहार चुनाव का भी जिक्र किया था। तो अब इस त्रिशूल युद्धाभ्यास को राजनैतिक विश्लेषक बिहार चुनाव से जोड़कर भी देख सकते हैं। जब पाकिस्तानी सीमा पर भारतीय सेना का संयुक्त युद्धाभ्यास तोपों की गर्जना, विमानों का कोलाहल और नौसेना बल का प्रदर्शन करेगा, तब इसी बीच 6 नवंबर 2025 को बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में मतदान होगा और 10 नवंबर 2025 को जब त्रिशूल युद्धाभ्यास की परिणति होगी उसके एक दिन बाद 11 नवंबर 2025 को बिहार विधानसभा चुनाव में दूसरे चरण का मतदान होगा।

तो 26 अक्टूबर 1947 से 26 अक्टूबर 2025 तक जम्मू कश्मीर को लेकर बहुत कुछ बदल चुका है। और अब 26 अक्टूबर 2025 से लेकर 26 अक्टूबर 2026 तक एक साल का समय ऐतिहासिक और निर्णायक बदलाव लाने की तरफ अग्रसर है। पाकिस्तानी सेना के 11वें सेनाध्यक्ष आसिम मुनीर के लिए यह एक साल बहुत बुरा सपना साबित हो सकता है, तो भारत की एकता और अखंडता के लिए यह एक साल वरदान साबित होने को तत्पर है…।

 

आओ 26 अक्टूबर को भारत की पूर्ण एकता और अखंडता की बात करें…

कौशल किशोर चतुर्वेदी

26 अक्टूबर की तारीख भारत के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। कश्मीर के राजा हरि सिंह ने 26 अक्टूबर, 1947 को अपने राज्य को भारत में मिलाने का फैसला किया था। इससे भारत के ऐतिहासिक और भौगोलिक स्वरूप को पूर्णता मिली थी। पर इसके साथ ही जम्मू कश्मीर को लेकर हर भारतीय के मन में अपूर्णता का एक अहसास भी घर कर गया था। क्योंकि इस आशय के समझौते पर हस्ताक्षर होते ही भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर पहुंचकर हमलावर पड़ोसी पाकिस्तान की सेना के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। पर इस लड़ाई में कश्मीर का कुछ हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में चला गया। पाकिस्तान और चीन के कब्जे का वही हिस्सा आज तक दोनों देशों के रिश्तों में तल्खी की वजह बना हुआ है। इसे पाक ऑक्युपाइड कश्मीर यानि पीओके के नाम से जाना जाता है। दरअसल जम्मू और कश्मीर भारत द्वारा केंद्रशासित प्रदेश के रूप में प्रशासित एक क्षेत्र है और इसमें बड़े कश्मीर क्षेत्र का दक्षिणी भाग शामिल है, जो 1947 से भारत और पाकिस्तान के बीच और 1959 से भारत और चीन के बीच विवाद का विषय रहा है। 1947-1948 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद , जम्मू और कश्मीर रियासत के तीन अलग-अलग क्षेत्र भारतीय नियंत्रण में थे: मुस्लिम बहुल कश्मीर घाटी , हिंदू बहुल जम्मू क्षेत्र और बौद्ध बहुल लद्दाख जिला। इन क्षेत्रों को जम्मू और कश्मीर राज्य के रूप में गठित किया गया था और 1950 में अपनाए गए भारत के संविधान के अनुच्छेद 370 द्वारा विशेष दर्जा दिया गया था। भारत की संसद ने अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के प्रस्ताव पारित किए, और अनुच्छेद 35 ए को 1954 के राष्ट्रपति आदेश के निलंबन के माध्यम से समाप्त कर दिया गया। उसी समय, राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठित करने के लिए एक पुनर्गठन अधिनियम भी पारित किया गया। पुनर्गठन 31 अक्टूबर 2019 से प्रभावी हुआ। 11 दिसंबर 2023 को, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सर्वसम्मति से अनुच्छेद 370 और 35 ए को निरस्त करने को बरकरार रखा, साथ ही केंद्र सरकार को जम्मू और कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने और सितंबर 2024 से पहले विधान सभा चुनाव कराने का निर्देश दिया। विधानसभा चुनाव सितंबर से अक्टूबर 2024 तक हुए। जम्मू और कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के गठबंधन ने केंद्र शासित प्रदेश की पहली सरकार बनाई,जिसमें उमर अब्दुल्ला मुख्यमंत्री बने। तो 26 अक्टूबर 1947 से भारत में विलय हो पाए अधूरे कश्मीर में अब पूर्णता का रंग भरने के लिए केंद्र की एनडीए सरकार दृढ़ निश्चय से भरी हुई है। हो सकता है कि 26 अक्टूबर 2026 तक पाकिस्तान और चीन के कब्जे वाला कश्मीर भी भारत का हिस्सा होगा और तब भारत की एकता और अखंडता की पूर्णता का दावा किया जा सकेगा। और तब ही सही मायने में जम्मू-कश्मीर के शासक राजा हरि सिंह की आत्मा को शांति मिलेगी।

अब हम बात इसके आगे की करें। तो हाल ही में सीआईए के पूर्व अधिकारी जॉन किरियाको ने पाकिस्तान को भारत के खिलाफ युद्ध से बचने की चेतावनी दी है। उन्होंने परमाणु हथियारों पर पेंटागन के नियंत्रण का दावा किया है। भारत में आतंकवाद और अस्थिरता फैलाने की लगातार कोशिश में जुटे पाकिस्तान को एक अमेरिकी अधिकारी ने कड़ी चेतावनी दी है। दरअसल, अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के पूर्व अधिकारी जॉन किरियाको ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान को भारत के खिलाफ फड़फड़ाना बंद कर देना चाहिए। उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान , भारत के सामने कहीं नहीं ठहरता है। वह कितनी भी तैयारी कर ले लेकिन किसी भी पारंपरिक युद्ध में भारत से बुरी तरह हार जाएगा। किरियाको ने 2001 के भारतीय संसद हमले के बाद की स्थिति का जिक्र किया, जब सीआईए को लगता था कि दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देश युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि 2002 में ऑपरेशन पराक्रम के चरम पर भारत-पाकिस्तान तनाव इतना बढ़ गया था कि अमेरिका ने इस्लामाबाद से अपने नागरिकों को निकालना शुरू कर दिया था। किरियाको ने एक चौंकाने वाला दावा भी किया कि उस समय उन्हें अनौपचारिक रूप से बताया गया था कि पाकिस्तान के परमाणु हथियारों का नियंत्रण पेंटागन के पास था। मुशर्रफ ने नियंत्रण अमेरिका को सौंप दिया था। तो अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के दयापात्र मुनीर, अब फड़फड़ाना बंद करो वरना पाकिस्तान का नामोनिशान मिट जाएगा। 15 साल तक अमेरिकी केंद्रीय खुफिया एजेंसी (सीआईए) में सेवा देने वाले किरियाको ने न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में पाकिस्तान में आतंकवाद-रोधी अभियानों के अपने अनुभव साझा किए हैं।

 

और अब हम बात करें नोटाम की। दरअसल पाकिस्तान और पाकिस्तानी सेना पर 12 दिन बहुत भारी गुजरने वाले हैं। भारत की तीनों सेनाएं अगले 30 अक्टूबर से 10 नवबंर तक पश्चिमी सीमा पर संयुक्त युद्धाभ्यास करेंगी। ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह सबसे विशाल युद्धाभ्यास है और जिस तरह से हाल ही में सर क्रीक इलाके में पाकिस्तान की आसिम मुनीर की सेना की नापाक गतिविधियां सामने आई हैं, उसको देखते हुए इस युद्धाभ्यास के मायने और बड़े हो जाते हैं। भारतीय सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायुसेना के इस ज्वाइंट मिलिट्री ऑपरेशन को ‘त्रिशूल’ युद्धाभ्यास का नाम दिया गया है। भारत ने ‘त्रिशूल’ युद्धाभ्यास के लिए नोटिस टू एयरमेन (नोटाम) वाली चेतावनी भी जारी कर दी है, जिसमें बताया गया है कि तीनों सेनाएं एक विशाल युद्धाभ्यास को अंजाम देने जा रही हैं। नोटाम में बताया गया है कि पश्चिमी सीमा पर तीनों सेनाएं 30 अक्टूबर से लेकर 10 नवंबर तक ‘त्रिशूल’ युद्धाभ्यास में भाग लेंगी। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इस ‘त्रिशूल’ युद्धाभ्यास के जरिए तीनों सेनाएं भारत की बढ़ती संयुक्तता के साथ आत्मनिर्भरता और इनोवेशन का प्रदर्शन करेंगी, जो प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी की सशस्त्र सेना के लिए ‘जय’ विजन के आधारस्तंभ हैं। ‘त्रिशूल’ युद्धाभ्यास में दक्षिणी कमान के जवान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। वे अलग-अलग जगहों पर संयुक्त ऑपरेशन को अंजाम देंगे। इसमें चुनौतियों से भरा कच्छ का सरक्रीक इलाका और पश्चिमी सीमा का रेगिस्तानी इलाका भी शामिल है। यही नहीं, भारतीय जवान सौराष्ट्र तट के समुद्र में भी ऑपरेशन करेंगे। इस युद्धाभ्यास में खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी करने और टोही गतिविधियों को भी अंजाम दिया जाएगा। इसी तरह इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और साइबर लड़ाई की चुनौतियों से जुड़े अभ्यास भी किए जाएंगे।

वहीं हाल ही में पाकिस्तानी आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने एक बार फिर से भारत को गीदड़भभकी दी थी। मुनीर ने एक सप्ताह पहले भारत को चेतावनी दी थी कि वह मामूली उकसावे पर भी ‘दृढ़ जवाब’ देगा, और कहा कि न्यूक्लियराइज्ड माहौल में जंग की कोई जगह नहीं है। काकुल में पाकिस्तान मिलिट्री एकेडमी में तालिबान को चेतावनी देने के साथ-साथ भारत का भी मुनीर ने जिक्र किया था। उन्होंने कहा था, ‘’न्यूक्लियर माहौल में युद्ध के लिए जगह नहीं है, लेकिन मामूली उकसावे पर भी पाकिस्तान की तरफ से ज्यादा निर्णायक जवाब दिया जाएगा।” मुनीर ने तब बिहार चुनाव का भी जिक्र किया था। तो अब इस त्रिशूल युद्धाभ्यास को राजनैतिक विश्लेषक बिहार चुनाव से जोड़कर भी देख सकते हैं। जब पाकिस्तानी सीमा पर भारतीय सेना का संयुक्त युद्धाभ्यास तोपों की गर्जना, विमानों का कोलाहल और नौसेना बल का प्रदर्शन करेगा, तब इसी बीच 6 नवंबर 2025 को बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में मतदान होगा और 10 नवंबर 2025 को जब त्रिशूल युद्धाभ्यास की परिणति होगी उसके एक दिन बाद 11 नवंबर 2025 को बिहार विधानसभा चुनाव में दूसरे चरण का मतदान होगा।

तो 26 अक्टूबर 1947 से 26 अक्टूबर 2025 तक जम्मू कश्मीर को लेकर बहुत कुछ बदल चुका है। और अब 26 अक्टूबर 2025 से लेकर 26 अक्टूबर 2026 तक एक साल का समय ऐतिहासिक और निर्णायक बदलाव लाने की तरफ अग्रसर है। पाकिस्तानी सेना के 11वें सेनाध्यक्ष आसिम मुनीर के लिए यह एक साल बहुत बुरा सपना साबित हो सकता है, तो भारत की एकता और अखंडता के लिए यह एक साल वरदान साबित होने को तत्पर है…।