
अपर्णा खरे की प्रेम कविता
Love Day:पिय से मिलने को चली नदी बावरी
पिय से मिलने को चली
नदी बावरी सजी सांवरी
मांग में अपने भरा है
सिंदूर रवि रश्मियों का
स्वंय किरणों ने बुनी है
चूनर सितारों वाली
नदी बावरी सजी सांवरी

किनारों के पेड़ बन गए
गल हार, वरमाल
और बह आई शैवाल
चूड़ियों सी सजी है
नदी बावरी सजी सांवरी
शंख सीपीयों की पहने
मुन्दरी सगाई वाली
लहरों की पायल
छनकाती मदमाती
नदी बावरी सजी सांवरी
पिय से मिलने को चली
नदी बावरी सजी साँवरी
अपर्णा खरे





