
युवा विधायकों की भूमिका, दायित्व और चुनौतियों पर मंथन की साक्षी बन रही मध्य प्रदेश विधानसभा…
कौशल किशोर चतुर्वेदी
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के नेतृत्व में मध्य प्रदेश विधानसभा
”लोकतंत्र और नागरिकों की भागीदारी को मजबूत करने हेतु युवा विधायकों की भूमिका” और ”विकसित भारत 2047 के निर्माण में युवा विधायकों के दायित्व एवं चुनौतियॉं” जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मंथन एवं निष्कर्षों की साक्षी बन रही है। महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के 45 वर्ष से कम आयु के विधायकों की सक्रिय भागीदारी ने युवा विधायक सम्मेलन को जीवंत और परिणामोन्मुखी बना दिया है। सभी दलों के युवा विधायक खुलकर अपनी बात रख रहे हैं। साथ ही उन्हें वरिष्ठों का मार्गदर्शन भी मिल रहा है। मध्यप्रदेश विधानसभा परिसर में आयोजित कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन इंडिया रीजन, ज़ोन-6 के अंतर्गत आयोजित ”युवा विधायक सम्मेलन” की खासियत यही है कि जिस सकारात्मकता, विनम्रता, अध्ययनशीलता और लोकतंत्र व विकसित भारत के सशक्तिकरण में युवाओं की सक्रिय भूमिका की अपेक्षा की जा रही है, उसके जीवंत उदाहरण उनके सामने मंचासीन भी हैं। जो अपने अनुभव भी साझा कर रहे हैं और क्षेत्रीय विकास के साथ-साथ परिवार के साथ समन्वय बनाने की सीख भी दे रहे हैं। और यह माना जा सकता है कि दलगत भावना से ऊपर उठकर युवा विधायकों का यह मेलजोल समृद्ध लोकतंत्र की दिशा में वैचारिक क्रांति की भूमिका का निर्वहन भी कर सकता है।
युवा विधायक इसमें अपनी सोच और वर्तमान में अपनी चुनौतियों के मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रख रहे हैं। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में जहां 35 साल से कम आयु जनसँख्या 65 फीसदी है और 25 साल से कम आयु की जनसंख्या 50 फीसदी है, वहाँ युवा विधायक सम्मेलन का महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है। ऐसे में जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव यह मुद्दा उठाते हैं कि सम्राट विक्रमादित्य सहित कई भारतीय शासकों के इतिहास से ज्ञात होता है कि उन्होंने कभी अपनी अगली पीढ़ी को राज सत्ता सौंपने का उपक्रम नहीं किया। यदि अगली पीढ़ी में नेतृत्व क्षमता और राज सत्ता के प्रबंधन की दक्षता होगी, तो वे स्वयं इस दिशा में सक्रिय होंगे। इन भारतीय मूल्यों और परम्पराओं का वर्तमान में भी पालन होना आवश्यक है। इस अपेक्षा के साथ ही वह युवा विधायकों से भी उम्मीद जताते हैं कि वे राजनीति में विनम्रता, मर्यादा और अनुशासन का पालन करें। वे जनसमस्याओं के प्रति संवेदनशील हों, अध्ययनशील हों, तनाव प्रबंधन में दक्ष हों और जनहित के लिए पूर्ण समर्पण से कार्य करें। निश्चित तौर से, यह युवा विधायकों के लिए बेहतर सीख साबित हो सकती है।
तो विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर का यह कहना कि एक विधायक के रूप में हमारा व्यवहार जनता के बीच जिस सक्रियता की मांग करता है, उतनी ही सजगता सदन के अंदर भी होनी चाहिए। किसी भी मुद्दे पर बोलते समय विधायकों के पास यदि संबंधित विषय की पर्याप्त जानकारी होगी तो सदन में उस विषय पर सार्थक विमर्श हो सकेगा। इसलिए आवश्यक है कि युवा विधायकों को संसदीय प्रक्रियाओं का विशद ज्ञान और गहन समझ होनी चाहिए। अपने संसदीय ज्ञान को बढ़ाने के लिए युवा विधायकों को सदन की कार्यवाही में नियमित रूप से पूरे समय भागीदारी करनी चाहिए तथा बिना किसी संकोच के वरिष्ठ सदस्यों से मार्गदर्शन लेना चाहिए और संसदीय नियमों का गहन अध्ययन भी करना चाहिए। इससे प्रश्नकाल, शून्यकाल, और ध्यानाकर्षण प्रस्ताव जैसे नियमों की समझ विकसित होगी तथा वरिष्ठ सदस्यों का मार्गदर्शन उन्हें व्यावहारिक ज्ञान और संसदीय शिष्टाचार सिखा सकेगा। युवा विधायको को सदन की बहसों में भाग लेना चाहिए और पूर्व की संसदीय बहस का अध्ययन तथा संबंधित विषय पर शोध कर अपने वक्तव्य को समृद्ध बनाना चाहिए। सदन के पोर्टल और ई-प्रशिक्षण संसाधनों का उपयोग युवा विधायकों के शिक्षण-प्रशिक्षण को आसान बना सकते हैं। इस अपेक्षा पर खरे उतरकर युवा विधायक 2047 का विकसित भारत बनाने में महत्वपूर्ण स्तंभ साबित हो सकते हैं।
राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने सीख दी कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता तभी बढ़ेगी जब जनप्रतिनिधि ईमानदारी और नैतिकता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे। युवा विधायकों के राष्ट्र निर्माण में योगदान के लिए यह संजीवनी साबित हो सकती है। तो अन्य सुझावों के साथ ही संसदीय कार्यमंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बड़ी सीख दी कि
सस्ती लोकप्रियता के लिए की गई गतिविधियां दीर्घकालिक दृष्टि से लाभकारी नहीं होती हैं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने साझा किया कि अपने क्षेत्र के लोगों से दिल से जुड़ना और उनके साथ भावनात्मक संबंध बनाना जरूरी है। उन्होंने युवा विधायकों को विधानसभा की बैठकों में अधिक से अधिक भाग लेने तथा विकास के नाम पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सोचने के लिए प्रेरित किया।
विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर की युवा विधायकों के प्रति अच्छी सोच उनके द्वारा किए गए नवाचारों में पहले से ही मिलती रही है। युवा विधायक सम्मेलन ने उनकी इसी सोच को आगे बढ़ाकर इसका विस्तार राज्य की सीमाओं से पार तक कर दिया है। यह उम्मीद की जा सकती है कि युवा नेतृत्व से आगे बढ़कर राजनैतिक क्षितिज की ऊँचाई तक पहुँचे मध्य प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर की यह प्रयास निश्चित तौर से लोकतंत्र में युवा विधायकों की भूमिका बेहतर बनाएंगे और विकसित भारत के निर्माण में उनके योगदान को पूर्णता प्रदान करेंगे।
लेखक के बारे में –
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।
वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।





