माघ गुप्त नवरात्रि:मौन में महाशक्ति, साधना में सिद्धि

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माघ गुप्त नवरात्रि:मौन में महाशक्ति, साधना में सिद्धि

🔸डॉ बिट्टो जोशी

भारतीय सनातन परंपरा में नवरात्रि केवल पर्व नहीं, बल्कि साधना, संयम और आत्मशुद्धि का काल मानी जाती है। वर्ष में चार नवरात्रियां आती हैं। चैत्र और शारदीय नवरात्रि जहां सार्वजनिक रूप से उत्सवधर्मिता और व्यापक आयोजनों के साथ मनाई जाती हैं, वहीं माघ और आषाढ़ मास की नवरात्रियां गुप्त नवरात्रि कहलाती हैं। इनका स्वरूप बाहरी आडंबर से दूर, अंतर्मुखी साधना पर केंद्रित होता है।
माघ मास की गुप्त नवरात्रि वर्ष 2026 में 19 जनवरी से प्रारंभ होकर 27 जनवरी तक चलेगी। इस अवधि में देवी उपासना, मंत्र जप, ध्यान और संयम को विशेष महत्व दिया जाता है। यह नवरात्रि विशेष रूप से साधकों, तांत्रिक उपासकों और आत्मिक उन्नति की आकांक्षा रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

🔸अंतर्मुखी साधना का काल
माघ गुप्त नवरात्रि का मूल भाव भीतर की यात्रा है। यह वह समय है जब बाहरी प्रदर्शन के स्थान पर आत्मचिंतन और आत्मनियंत्रण पर बल दिया जाता है। देवी की उपासना यहां शक्ति प्रदर्शन का माध्यम नहीं, बल्कि शक्ति साधना का साधन बनती है। साधक मौन, उपवास, नियम और निरंतर अभ्यास के माध्यम से अपने मन और इंद्रियों को स्थिर करने का प्रयास करता है।

आज के तीव्र गति वाले, भौतिकतावादी जीवन में इस नवरात्रि का संदेश और अधिक प्रासंगिक हो जाता है। निरंतर प्रतिस्पर्धा, दिखावे और उपलब्धियों की दौड़ ने व्यक्ति को भीतर से अशांत बना दिया है। गुप्त नवरात्रि यह स्मरण कराती है कि वास्तविक शक्ति शोर में नहीं, बल्कि मौन में है। स्थायित्व प्रदर्शन में नहीं, बल्कि अनुशासन में है।

🔸दस महाविद्याएं और साधना का मार्ग
माघ गुप्त नवरात्रि में देवी दुर्गा की दस महाविद्याओं की उपासना का विशेष महत्व बताया गया है। ये महाविद्याएं जीवन के गूढ़ रहस्यों, भय, अज्ञान और आसक्ति से मुक्ति का प्रतीक मानी जाती हैं। मां काली भय और अज्ञान के नाश का मार्ग दिखाती हैं। तारा देवी मार्गदर्शन और रक्षा की शक्ति देती हैं। त्रिपुर सुंदरी संतुलन और सौंदर्य का बोध कराती हैं। भुवनेश्वरी विस्तार और सृष्टि चेतना की प्रतीक हैं। छिन्नमस्ता त्याग और आत्मबल का संदेश देती हैं। धूमावती वैराग्य और आत्ममंथन का मार्ग दिखाती हैं। बगलामुखी अवरोध निवारण और स्थिरता की देवी मानी जाती हैं। मातंगी ज्ञान और वाणी की शुद्धता से जुड़ी हैं। कमला देवी संतुलित वैभव और समृद्धि का प्रतीक हैं।

इन महाविद्याओं की साधना को केवल तांत्रिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक और आत्मिक परिष्कार का माध्यम माना गया है।

🔸गुप्त साधना, गहरा प्रभाव
इस नवरात्रि की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि साधना का मूल्यांकन किसी सामाजिक स्वीकृति से नहीं होता। साधक की प्रगति उसके भीतर घटित परिवर्तन से मापी जाती है। यही कारण है कि इसे गुप्त कहा गया है। यह साधना दिखाई नहीं देती, लेकिन इसका प्रभाव गहरा और स्थायी होता है। मन की स्थिरता, विचारों की स्पष्टता और आत्मविश्वास इसी साधना के फल माने जाते हैं।

🔸समाज के लिए संकेत
माघ गुप्त नवरात्रि केवल व्यक्तिगत साधना तक सीमित नहीं है। यह समाज को भी यह संदेश देती है कि सशक्तता केवल बाहरी विकास से नहीं आती। नैतिकता, संयम और आत्मचिंतन के बिना कोई भी समाज संतुलित नहीं रह सकता। यदि व्यक्ति अपने भीतर की नकारात्मक प्रवृत्तियों जैसे क्रोध, लोभ, अहंकार और भय पर नियंत्रण पा ले, तो सामाजिक समस्याओं का समाधान स्वतः संभव हो जाता है।

🔸आत्मबोध का अवसर
माघ गुप्त नवरात्रि को केवल धार्मिक अनुष्ठान के रूप में नहीं, बल्कि आत्मिक पुनर्जागरण के अवसर के रूप में देखना चाहिए। यह पर्व अपने भीतर छिपी शक्ति को पहचानने, उसे सकारात्मक दिशा देने और संतुलित जीवन की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है। मौन, साधना और आत्मबोध ही माघ गुप्त नवरात्रि का वास्तविक सार है।

🔸गुप्त नवरात्रि में क्या करें
इस अवधि में नियमित समय पर जप, ध्यान और मानसिक शुद्धता पर ध्यान देना चाहिए। यथासंभव मौन या सीमित वाणी का पालन करना लाभकारी माना जाता है। सात्विक आहार, संयमित दिनचर्या और अनुशासित जीवन शैली साधना को गहरा करती है। श्रद्धा और धैर्य के साथ देवी उपासना करनी चाहिए। आत्मचिंतन और आत्मसंयम पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

🔸क्या न करें
गुप्त नवरात्रि में दिखावे, प्रचार और साधना के प्रदर्शन से बचना चाहिए। अनावश्यक विवाद, क्रोध, कटु वाणी और नकारात्मक विचारों से दूरी रखना आवश्यक माना जाता है। भोग-विलास, अत्यधिक मनोरंजन और असंयमित आचरण से साधना प्रभावित होती है। बिना गुरु मार्गदर्शन के जटिल तांत्रिक प्रयोग करने से भी परहेज किया जाना चाहिए।