
महाकाल महोत्सव 2026: शिव तत्त्व और महाकाल पर अंतरराष्ट्रीय विमर्श
UJJAIN: श्रीमहाकाल महोत्सव 2026 के अंतर्गत शिव तत्त्व, श्रीमहाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग और शिवोपासना पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 15 जनवरी 2026, गुरुवार को प्रातः 11 बजे से सन्ध्या 4:30 बजे तक त्रिवेणी कला एवं पुरातत्व संग्रहालय, जयसिंहपुरा, महाकाल लोक के समीप, रुद्र सागर तट पर किया जाएगा। यह संगोष्ठी शिव को आस्था के साथ साथ पुरातिहास, साहित्य और संस्कृति के व्यापक संदर्भ में समझने का वैश्विक मंच बनेगी।

● श्रीमहाकाल महोत्सव के अंतर्गत आयोजन
वीर भारत न्यास एवं श्रीमहाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा 14 से 18 जनवरी 2026 तक महाकाल महालोक में श्रीमहाकाल महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। इस महोत्सव के अंतर्गत 15 जनवरी को यह अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित होगी, जो बौद्धिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महोत्सव का प्रमुख आकर्षण रहेगी।

● विषय: शिव तत्त्व और श्रीमहाकाल
संगोष्ठी का विषय “शिव तत्त्व और श्रीमहाकाल: पुरातिहास, साहित्य और संस्कृति के परिप्रेक्ष्य में” निर्धारित किया गया है। इसमें शिवोपासना परंपरा को पुरातत्व, इतिहास, शैव दर्शन, शिवपरक साहित्य, वास्तु, मुद्राशास्त्र, शिल्प, चित्रकला, लोक एवं जनजातीय संस्कृति के संदर्भ में समग्र रूप से प्रस्तुत किया जाएगा।

● वैश्विक सहभागिता का मंच
इस संगोष्ठी में दस से अधिक देशों और भारत के बारह से अधिक राज्यों के विद्वान भाग लेंगे। आयरलैंड, मॉरीशस, यूएसए, यूके, नॉर्वे, नीदरलैंड, फिजी, स्वीडन, थाईलैंड, श्रीलंका, नेपाल सहित अनेक देशों के शोधकर्ता शिव तत्त्व और महाकाल परंपरा के विविध पक्षों पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।
● प्रतिष्ठित विद्वानों की सहभागिता
संगोष्ठी में भाग लेने वाले प्रमुख विद्वानों में आयरलैंड में भारत के महामहिम राजदूत श्री अखिलेश मिश्रा, डॉ रामा तक्षक, डॉ सोमदत्त काशीनाथ, डॉ आशुतोष द्विवेदी, डॉ बीर बहादुर महतो, डॉ मीरा सिंह, डॉ सदाशिवकुमार द्विवेदी, पुरातिहासकार डॉ शांतिस्वरूप सिन्हा, डॉ आर सी ठाकुर, डॉ अजय कुमार झा, डॉ हरिसिंह पाल, पद्मश्री डॉ भगवतीलाल राजपुरोहित, पूर्व कुलपति प्रो बालकृष्ण शर्मा, प्रो शिवशंकर मिश्र, प्रो केदारनाथ शुक्ल, कुलपति प्रो नवीन चंद्र लोहनी, पूर्व कुलगुरु प्रो सी जी विजय कुमार मेनन सहित देश-विदेश के अनेक वरिष्ठ विद्वान शामिल हैं।

● तकनीकी सत्र और शोध प्रस्तुति
संगोष्ठी के विभिन्न तकनीकी सत्रों में संस्कृत, इतिहास, पुरातत्व और संस्कृति के विद्वान शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे। इन सत्रों में डॉ सदानंद त्रिपाठी, डॉ विश्वजीतसिंह परमार, डॉ पूजा उपाध्याय, डॉ शुभम शर्मा, डॉ प्रीति पांडेय, डॉ अंजना सिंह गौड़, डॉ महेंद्र पंड्या, डॉ गोपाल कृष्ण शुक्ल, डॉ सर्वेश्वर शर्मा, डॉ संकल्प मिश्रा, डॉ अखिलेश द्विवेदी, डॉ उपेंद्र भार्गव सहित अनेक शोधकर्ता सहभागिता करेंगे।
● कार्यक्रम का समय निर्धारण
संगोष्ठी का शुभारंभ प्रातः 11 बजे होगा। इसके अंतर्गत व्याख्यान एवं शोध सत्र प्रथम दोपहर 12:30 बजे, मध्याह्न भोज 2 बजे तथा व्याख्यान एवं शोध सत्र द्वितीय दोपहर 2:30 बजे से आयोजित किया जाएगा।
● प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा का वक्तव्य
संगोष्ठी के मुख्य समन्वयक, विभागाध्यक्ष एवं कुलानुशासक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि यह आयोजन शिव को केवल धार्मिक आराध्य नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता की बौद्धिक, सांस्कृतिक और दार्शनिक चेतना के केंद्र में स्थापित करता है। उन्होंने प्राध्यापकों, शोधार्थियों और सुधीजन से सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया है।
● आस्था, संस्कृति और ज्ञान का संगम
महाकाल महोत्सव के अंतर्गत आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी उज्जैन को एक बार फिर वैश्विक सांस्कृतिक और बौद्धिक संवाद के केंद्र में स्थापित करेगी। शिव तत्त्व और श्रीमहाकाल पर केंद्रित यह विमर्श भारतीय संस्कृति की गहराई, निरंतरता और वैश्विक प्रभाव को सशक्त रूप से प्रस्तुत करेगा।





