महाकुंभ वायरल गर्ल मामला: जन्म प्रमाण पत्र निरस्त, नाबालिग की तलाश में जुटी पुलिस,मामले में सांसद ने किया नया खुलासा

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महाकुंभ वायरल गर्ल मामला: जन्म प्रमाण पत्र निरस्त, नाबालिग की तलाश में जुटी पुलिस,मामले में सांसद ने किया नया खुलासा

खरगोन: चर्चित “महाकुंभ वायरल गर्ल” मामले में महेश्वर नगर परिषद ने बड़ा कदम उठाते हुए किशोरी का पूर्व में जारी जन्म प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया है। वहीं, अपहरण का मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने उसकी तलाश तेज कर दी है।

महेश्वर नगर परिषद के प्रभारी सीएमओ प्रियंक पंड्या ने बताया कि किशोरी की मां ने 30 मई 2025 को शपथ पत्र प्रस्तुत कर उसकी जन्म तिथि 1 जनवरी 2008 बताई थी। इस आधार पर तहसीलदार राकेश ससत्या के आदेश पर 5 जून 2025 को नगर परिषद द्वारा जन्म प्रमाण पत्र जारी किया गया था।

उन्होंने आगे बताया कि अब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, महेश्वर के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर की रिपोर्ट में सामने आया है कि किशोरी का वास्तविक जन्म 30 दिसंबर 2009 को अस्पताल में हुआ था। इस तथ्य के सामने आने के बाद पूर्व में जारी जन्म प्रमाण पत्र को असत्य मानते हुए निरस्त कर दिया गया है।

इस बीच, प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल देखी गई है। प्रभारी सीएमओ प्रियंक पंड्या का शुक्रवार देर रात धार जिले के धामनोद में तबादला कर दिया गया।

उधर, क्षेत्रीय सांसद गजेंद्र सिंह पटेल ने सोशल मीडिया के माध्यम से बयान जारी करते हुए आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश के फरमान खान ने षड्यंत्रपूर्वक फर्जी दस्तावेज तैयार कर किशोरी से विवाह किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि संबंधित लड़की आदिवासी समुदाय से है और नाबालिग है। सांसद के अनुसार, आयोग ने डीजीपी और खरगोन जिला प्रशासन को मामले में संबंधित धाराएं जोड़कर शीघ्र कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

सूत्रों के मुताबिक, फरमान खान और किशोरी ने केरल हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। इस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने अगली सुनवाई 20 मई तक गिरफ्तारी पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में पुलिस को नोटिस प्राप्त हुआ है और वह अपना जवाब तैयार कर रही है।

खरगोन के पुलिस अधीक्षक रवींद्र वर्मा ने बताया कि पीड़िता को बरामद करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया फिलहाल फरमान के विरुद्ध अपहरण का ही प्रकरण दर्ज किया गया है। विवेचना में यदि तथ्य पाये जाएंगे तो और भी धाराओं का इजाफा हो सकता है।

वहीं, जिला पुलिस राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी प्रेषित कर रही है।