MP पुलिस प्रशिक्षण में बड़ा बदलाव, 70 साल बाद अपनी अलग पुलिस ट्रैनिंग पॉलिसी लाने की तैयारी,लाठी चलाना और मल्लखंब होंगे नियमित अभ्यास

48

MP पुलिस प्रशिक्षण में बड़ा बदलाव, 70 साल बाद अपनी अलग पुलिस ट्रैनिंग पॉलिसी लाने की तैयारी,लाठी चलाना और मल्लखंब होंगे नियमित अभ्यास

भोपाल: मध्यप्रदेश पुलिस के प्रशिक्षण में अब बड़ा बदलाव होने जा रहा है। आजादी के करीब 70 साल बाद राज्य अपनी अलग पुलिस ट्रैनिंग पॉलिसी लाने की तैयारी में है। अभी तक पुलिसकर्मियों को ब्रिटिश दौर के पुराने ढांचे पर प्रशिक्षण दिया जाता रहा है, लेकिन नई नीति में समय और जरूरत के अनुसार बदलाव किया जा रहा है, ताकि पुलिस बल साइबर अपराध, आतंकवाद और संगठित अपराध जैसी चुनौतियों से बेहतर तरीके से निपट सके।

फिलहाल प्रदेश में आरक्षकों और अन्य रैंकों का प्रशिक्षण बहुत पुराने पैटर्न पर आधारित है। समय-समय पर कुछ सुधार जरूर किए गए, लेकिन राज्य की अपनी कोई ठोस प्रशिक्षण नीति नहीं थी। कई मामलों में दूसरे राज्यों, अर्धसैनिक बलों और राष्ट्रीय एजेंसियों के मॉडल अपनाए गए, जो बदलते अपराधों के सामने नाकाफी साबित हो रहे थे।

नई ट्रेनिंग पॉलिसी में पुलिस के व्यवहार, कार्यशैली और जनता से संबंधों पर खास ध्यान दिया गया है। प्रशिक्षण का मकसद सिर्फ कानून सिखाना नहीं, बल्कि पुलिस को जिम्मेदार, संवेदनशील और जनता के भरोसे के लायक बनाना है। इसके साथ ही साइबर अपराध, डिजिटल जांच और तकनीक के इस्तेमाल को भी प्रशिक्षण का अहम हिस्सा बनाया जाएगा।

इसमें अब शारीरिक प्रशिक्षण में सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। अब लाठी चलाना और मल्लखंब जैसे पारंपरिक अभ्यासों को फिर से मजबूत किया जाएगा। इन्हें नियमित फिजिकल ट्रैनिंग में शामिल किया जाएगा, ताकि पुलिसकर्मियों की फुर्ती, संतुलन और आत्मरक्षा की क्षमता बढ़ सके। भीड़ नियंत्रण और तनावपूर्ण हालात में खुद को सुरक्षित रखने में इन अभ्यासों से मदद मिलेगी। इसके अलावा पुलिसकर्मियों को मानसिक तनाव से निपटने और फिट रहने के तरीकों की भी ट्रैनिंग दी जाएगी। काम के दबाव और लंबे ड्यूटी समय को देखते हुए यह हिस्सा खास माना जा रहा है।