कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा को बड़ी राहत, विधायक बने रहेंगे, हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक

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कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा को बड़ी राहत विधायक बने रहेंगे, हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक

मध्यप्रदेश के कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उनके मामले में अगली सुनवाई तक अंतरिम स्टे दे दिया है। अब इस प्रकरण की अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी, तब तक उनके खिलाफ निचली अदालत के फैसले पर रोक प्रभावी रहेगी। इस मामले में विधायक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने पैरवी की। उन्होंने अदालत के सामने दलीलें रखते हुए हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की मांग की, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। दरअसल, ग्वालियर हाईकोर्ट ने हाल ही में मुकेश मल्होत्रा के निर्वाचन को निरस्त घोषित कर दिया था। अदालत ने चुनावी हलफनामे में आपराधिक प्रकरणों की जानकारी छिपाने को गंभीर मानते हुए यह फैसला सुनाया था। साथ ही, उन्हें 15 दिनों के भीतर सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की अनुमति भी दी गई थी।

हाईकोर्ट के इसी आदेश को चुनौती देते हुए मुकेश मल्होत्रा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। गुरुवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन शामिल थे, ने अंतरिम राहत प्रदान करते हुए मामले की विस्तृत सुनवाई के लिए 23 जुलाई की तारीख तय की। हालांकि, इस अंतरिम राहत के बावजूद कुछ पाबंदियां लागू रहेंगी। विधायक मुकेश मल्होत्रा आगामी राज्यसभा चुनाव में मतदान नहीं कर सकेंगे। इसके अलावा उन्हें इस अवधि में मानदेय का लाभ भी नहीं मिलेगा। हालांकि, वे विधानसभा की कार्यवाही में भाग ले सकेंगे।

कांग्रेस ने इस फैसले के खिलाफ आंशिक आपत्ति जताई है। पार्टी के मीडिया प्रभारी मुकेश नायक और पूर्व प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी ने कहा है कि मल्होत्रा को राज्यसभा चुनाव में वोटिंग का अधिकार दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दायर की जाएगी। उनका कहना है कि एक निर्वाचित विधायक को वोटिंग से रोकना लोकतांत्रिक अधिकारों पर असर डालता है। कांग्रेस नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत भी किया, लेकिन इसे अधूरा न्याय बताया। मुकेश नायक ने कहा कि यह पहली बार हुआ जब एक जीते हुए विधायक की जगह हारे हुए उम्मीदवार को विधायक घोषित कर दिया गया था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने सुधारा है।