
गिद्ध संरक्षण में बड़ी सफलताः अंतरराष्ट्रीय समन्वय से गिद्ध को मिली नई उड़ान
संरक्षण के एक उत्कृष्ट केंद्र के रूप में उभरा वन विहार
भोपाल। मध्य प्रदेश वन विभाग ने एक बार फिर वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में अपनी अग्रणी भूमिका सिद्ध की है, जहाँ वन विहार राष्ट्रीय उद्यान एवं जू वैज्ञानिक गिद्ध संरक्षण के एक उत्कृष्ट केंद्र के रूप में उभरकर सामने आया है। वन विहार स्थित वल्चर कंजर्वेशन ब्रीडिंग सेंटर (VCBC) में गिद्धों के सफल रेस्क्यू, पुनर्वास, टैगिंग, पुनःस्थापन एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी निगरानी, विज्ञान, तकनीक एवं वैश्चिक सहयोग के एक आदर्श मॉडल को दशति हैं।
30 मार्च 2026 को वन विहार राष्ट्रीय उद्यान एवं जू द्वारा लगभग 2 वर्ष आयु की एक मादा सिनेरियस गिद्ध (Aegypius monachus) को रायसेन जिले के हलाली डेम क्षेत्र में उसके प्राकृतिक आवास में सफलतापूर्वक छोड़ा गया।

यह पहल मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में संचालित गिद्ध संरक्षण कार्यक्रम का हिस्सा है। इस गिद्ध को 22 जनवरी 2026 को ग्राम परसूलिया, सुसनेर रव, जिला शाजापुर से पायल अवस्था में रेसक्यू किया गया था। रेस्क्यू के पश्चात इसे वन विहार लाया गया, जहां इसे क्वारंटाइन केंद्र में रखकर विशेषज्ञों द्वारा प्राथमिक उपचार किया गया। इसके पश्चात 9 फरवरी 26 को इसे वन विहार स्थित वल्चर कंवर्चशन ब्रीडिंग सेंटर (VCBC), जो वन विहार एवं BNIS द्वारा संयुक्त रूप से संचालित है, में स्थानांतरित किया गया।
वन्यजीव संरक्षण एवं पुनर्वास का एक अग्रणी संस्थान है वन विहार
VCBC में इस गिद्ध पर व्यापक एवं वैज्ञानिक प्रोटोकॉल के अंतर्गत कार्य किया गया, जिसमें मेटल रिंग एवं माइक्रोचिप के माध्यम से पहचान, विस्तृत क्लीनिकल, व्यवहारिक एवं मॉफॉमेट्रिक परीक्षण, उन्नत हेमेटोलॉजिकल एवं बायोकेमिकल जांच, तथा निरंतर पश-चिकित्सकीय निगरानी एवं देखभाल शामिल रही। पैर की चोट से ग्रसित गिद्ध का उचित उपचार किया गया तथा वैज्ञानिक परीक्षणों के आधार पर पूर्णतः स्वस्थ पाए जाने पर इसे “फिट फॉर रिलीज” घोषित किया गया। इससे वह सिद्ध होता है कि वन विहार केवल एक प्राणी उद्यान नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण एवं पुनर्वास का एक अग्रणी वैज्ञानिक संस्थान है।
GPS-GSM टेलीमेट्री डिवाइस से हुई रियल-टाइम निगरानी
25 मार्च 2026 को VCBC वन विहार में इस गिद्ध पर GPS-GSM टेलीमेट्री डिवाइस लगाया गया, जिससे इसके मूवमेंट की रियल-टाइम निगरानी संभव हुई। यह कार्य डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया एवं BNHS के सहयोग से विशेषज्ञों की देखरेख में किया गया, जिसके पक्षात VCBC द्वारा सतत निगरानी की गई। 30 मार्च 26 को हलाली डेम, जो एक वैज्ञानिक रूप से चयनित स्थल है, पर गिद्ध को छोड़ा गया।

राजस्थान होते हुए गिद्ध पहुंचा पाकिस्तान
रिलीज के पश्चात निगरानी में पाया गया कि यह गिद्ध राजस्थान होते हुए अंतरराष्ट्रीय सीमाएँ पार कर 6 अप्रैल 26 तक पाकिस्तान पहुंच गया। 7 अप्रैल 2026 को जब इसके मूवर्गेट का सिग्नल प्राप्त नहीं हुआ, तब डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया को तत्काल सूचित किया गया। तत्पश्चात WWF-India ने अपने समकक्ष संगठन डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-पाकिस्तान से संपर्क स्थापित किया।
पाकिस्तान वन विभाग एवं WWF-Pakistan द्वारा खानेवाल जिले में इस गिद्ध को सफलतापूर्वक स्थानीय निवासियों से बरामद किया गया। WWF-Pakistan से प्राप्त जानकारी के अनुसार 7 अप्रैल 26 को खानेवाल एवं गुल्तान विलों में आए भीषण ओलावृष्टि तूफान के कारण एक सिनेरियस गिद्ध एवं एक यूरेशियन शिफॉन गिद्ध प्रभावित हुए, जो अस्थायी रूप से उड़ान भरने में असमर्थ होकर जमीन पर पाए गए।
स्थानीय लोगों द्वारा सूचना दिए जाने पर वन्यजीव अधिकारियों ने दोनों गिद्धों को रेस्क्यू कर प्राथमिक उपचार दिया तथा चंगा गंगा वल्चर कैप्टिव ब्रीडिंग सेंटर में स्थानांतरित किया। सिनेरियस गिद्ध को हल्की चोटें आई थीं और वह अब स्वस्थ हो रहा है। दोनों गिद्ध सामान्य रूप से भोजन कर रहे हैं। हालांकि, इस गिद्ध का ट्रेकिंग देग प्राप्त नहीं हो सका।
गिद्ध संरक्षण में एक मील का पत्थर सिद्ध
यह गिद्ध 4300 किमी से अधिक की दूरी तय कर कजाकिस्तान स्थित अपने प्रजनन क्षेत्र तक पहुंचा, जो पाकिस्तान, अफगानिस्तान एवं ताजिकिस्तान होते हुए गया और अक्टूबर में पुनः भारत लौट आया। इस अध्ययन से प्रवासी मार्ग, अंतरराष्ट्रीय संरक्षण चुनौतियों एवं आवास उपयोग संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई, जो गिद्ध संरक्षण में एक मील का पत्थर सिद्ध हुई।
इसी क्रम में 23 फरवरी 26 को माननीय मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में चार लंबी चीच वाले गिद्ध एवं एक सिनेरियस गिद्ध सहित कुल पांच गिर्दा का सफलतापूर्वक पुनर्वास, टैगिंग एवं वन में पुनःस्थापन किया गया। यह संपूर्ण पहल वन विहार को गिद्ध संरक्षण का राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करती है, जहां विज्ञान, पशु-चिकित्सकीय विशेषज्ञता एवं आधुनिक तकनीक का समन्वित उपयोग किया जा रहा है।





