
सफल हो सशुल्क ओल्ड एज होम की अभिनव पहल…
कौशल किशोर चतुर्वेदी
राजधानी में वरिष्ठजनों को परिवार जैसा वातावरण देने के लिए सेवा भारती के माध्यम से सर्व-सुविधायुक्त सशुल्क वरिष्ठजन निवास की शुरुआत की गई है। लगभग 24 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया गया सर्वसुविधायुक्त सशुल्क वरिष्ठजन निवास ”संध्या छाया” समर्थ और एकाकीपन से जूझ रहे बुजुर्गों के संध्या काल का सहारा बनकर उनके जीवन में उजाला लाने का काम करेगा। और सरकार के इस प्रयास से यह आकलन भी हो जाएगा कि राजधानी भोपाल में
लग्जरियस सशुल्क वृद्धाश्रमों की मांग कितनी है? सरकार के इस प्रयास को सफलता मिलती है, तब वह दिन भी दूर नहीं जब इस तरह के सशुल्क वृद्धाश्रम निजी तौर पर भी बड़ी संख्या में निर्मित किए जाएँगे। फिलहाल सरकार द्वारा बनाए गए इस सशुल्क वृद्धाश्रम में 34 कमरे हैं, जिसमें 56 वृद्धजनों के रहने की व्यवस्था है। इसमें उच्च गुणवत्ता का भोजन, पार्क जैसी सभी सुविधाएं मिलेंगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 24 जनवरी 2026 को नव निर्मित सशुल्क वृद्धाश्रम “संध्या छाया” के लोकार्पण अवसर पर सरकार की मंशा बताई कि देश-प्रदेश में विकास का अर्थ केवल अधोसंरचना निर्माण नहीं है, विकसित राष्ट्र के लिए, समाज के सभी वर्गों को बेहतर और सुरक्षित जीवन जीने के अवसर उपलब्ध कराना भी विकास है और यह राज्य सरकार का सर्वोच्च दायित्व भी है। राज्य सरकार दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और वृद्धजनों की सेवा के लिए संकल्पित है।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पीपीपी मोड पर बने “संध्या छाया” ओल्ड एज होम का शुभारंभ कर अवलोकन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ॰ मोहन यादव ने सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा पत्रकार कॉलोनी लिंक रोड नं. 3 पर निर्मित सर्व सुविधायुक्त वृद्धाश्रम में यहां रह रहे एक दम्पत्ति का अभिवादन कर स्वागत भी किया। ओल्ड एज होम “संध्या छाया” 5 एकड़ से अधिक भूमि पर बना है, इसमें 12 सिंगल बेड, 22 डबल बेड, कुल 34 कमरें है। इसमें 56 वरिष्ठजनों के रहने की उत्तम व्यवस्था है। भवन में वातानुकूलित कमरे, टीवी, फ्रिज, गर्म एवं ठंडा पानी, निजी बालकनी की व्यवस्था प्रत्येक रूम में है। स्वास्थ्य सेवाएं- डॉक्टर परामर्श की भी सुविधा है। भवन में फिजियोथेरिपी सेंटर, आपातकालीन चिकित्सा सहायता सुविधा भी दी गई है। वरिष्ठजनों के मनोरंजन एवं लाइब्रेरी, ओपन मेस, डाइनिंग हॉल ओर वरिष्ठजनों के लिये विशेष रूप से डिजाइन किया गया पाथ-वे, प्रत्येक कमरे में अटैच बाथरूम, इन सभी में काल बेल, इंटरकाम, टेलीफोन की व्यवस्था दी गई है। आश्रम में सुरक्षा के भी व्यापक इंतजाम किए गये हैं।
“संध्या छाया” के संचालन में सामाजिक भागीदारी दर्ज कराते हुए सेवा भारती मध्य भारत को इसके संचालन का जिम्मा दो वर्षों के लिए दिया गया है। वृद्धाश्रम में रहने वाले वरिष्ठजन को प्रतिमाह कमरे के आकार के अनुसार अलग अलग राशि देनी होगी। एक डबल बेड 60 स्कायर मीटर- 39490 रूपए, डबल बेड रूप 90 स्का. मीटर 43490 रूपये, डबल बेड 56.5 स्का. मीटर 38490 रूपये, सिंगल बेड 49.2 स्का. मीटर 49990, सिंगल बेड 35 स्का. मीटर 47990 रूपये तथा सिंगल बेड 33.5 स्का. मीटर 45990 रूपये प्रतिमाह चार्ज देना होगा।
निश्चित तौर पर यह सारी जानकारी यह समझने के लिए पर्याप्त है कि सर्वसुविधायुक्त यह ओल्ड एज होम उन सभी उच्च मध्यम वर्गीय और उच्च वर्ग के वृद्धों के लिए है, जिनके पास पैसा है लेकिन सुरक्षित और खुशहाल जीवन जीने के लिए अपनों का सहारा नहीं है। शहरों में कई बार यह बुजुर्ग एकाकीपन में अंतिम सांस लेते हैं और उनकी सुध लेने वाला भी कोई नहीं रहता। कई बार मृत्यु के बाद भी उनका मृत शरीर भी कई दिनों तक पड़ा रहता है और दुर्गंध आने पर ही अड़ोस-पड़ोस के द्वारा पुलिस को सूचना दी जाती है। शहरों की बढ़ती भीड़ में कई बार बुजुर्गों के साथ अनहोनी भी हो जाती है और वह कुछ नहीं कर पाते। ऐसे में सशुल्क, सर्वसुविधायुक्त, सुरक्षित और स्वास्थ्य सुविधाओं से परिपूर्ण ओल्ड एज होम बुजुर्गों की जीवन संध्या में खुशहाली का उजाला ला सकता है। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में उच्च आय वर्ग की संपन्न श्रेणी के बुजुर्गों की संख्या दिनों-दिन बढ़ रही है। और इनमें भी अकेलेपन और असुरक्षा की स्थितियाँ देखी जा सकती हैं। ऐसे में यह उम्मीद की जा सकती है कि मध्य प्रदेश सरकार की यह अभिनव पहल सफल हो और संपन्न बुजुर्गों के जीवन में खुशहाली लाने का माध्यम बने…पर देखने वाली बात यह है कि ओल्ड एज होम के संचालन की बागडोर संभालने वाले हाथ बुजुर्गों का कितना साथ निभा पाते हैं। मतलब साफ है कि इस ओल्ड एज होम में सेवा भारती का सेवा भाव कसौटी पर परखा जाएगा और वास्तव में सेवा ने मन जीत लिया तो सरकार की यह अभिनव पहल न केवल सफल मानी जाएगी बल्कि हर शहर में जल्द ही इसका विस्तार देखने को मिलेगा…।
लेखक के बारे में –
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।
वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।





