
MBBS admission based on disability: युवक ने काटा खुद का पैर, चौंकाने वाली साजिश का पर्दाफाश
Jaunpur: उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने न केवल पुलिस बल्कि पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। डॉक्टर बनने की चाह में एक युवक ने ऐसा खतरनाक कदम उठा लिया, जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। युवक ने खुद अपने पैर का हिस्सा काट लिया, ताकि वह विकलांगता कोटे के तहत MBBS में दाखिला ले सके। जांच में यह पूरा मामला खुद रची गई साजिश निकला।
● कौन है सूरज भास्कर
24 वर्षीय सूरज भास्कर जौनपुर जिले के खलीलपुर गांव का रहने वाला है। वह पिछले तीन वर्षों से MBBS में प्रवेश के लिए तैयारी कर रहा था। सामान्य श्रेणी से चयन की संभावनाएं कमजोर होने के बाद उसने विकलांगता कोटे के जरिए दाखिला पाने का रास्ता चुना। सूरज का सपना डॉक्टर बनने का था और वह किसी भी कीमत पर इस लक्ष्य को हासिल करना चाहता था।
● हमला बताकर गुमराह करने की कोशिश
सूरज ने पुलिस को सूचना दी कि अज्ञात हमलावरों ने उस पर हमला किया, उसे पीटा और उसका पैर काट दिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। शुरुआती बयान में सूरज ने खुद को पीड़ित बताया और घटना को आपराधिक हमला करार दिया।
● जांच में खुली परत दर परत सच्चाई
पुलिस को सूरज के बयान में कई विरोधाभास नजर आए। जब उसके मोबाइल फोन और कॉल रिकॉर्ड की जांच की गई, तो उसकी गर्लफ्रेंड का नाम सामने आया। पूछताछ में गर्लफ्रेंड ने पुलिस को बताया कि सूरज पहले भी अधिकारियों को रिश्वत देकर विकलांगता प्रमाण पत्र हासिल करने की कोशिश कर चुका था, लेकिन सफल नहीं हो पाया था।
● सबूतों ने उजागर की खुद की गई हरकत
जांच के दौरान पुलिस को ऐसे सबूत मिले, जिन्होंने पूरे मामले की दिशा बदल दी। मौके से एनेस्थीसिया से जुड़ी सिरिंज और सर्जिकल उपकरण बरामद किए गए, जिनका इस्तेमाल सूरज ने खुद अपने पैर को काटने में किया था। चिकित्सकीय जांच में भी यह स्पष्ट हुआ कि यह चोट किसी हमले की नहीं, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से की गई आत्म क्षति का परिणाम है।
● डायरी ने बताया असली मकसद
पुलिस को सूरज की एक डायरी भी मिली, जिसमें उसने साफ लिखा था कि वह साल 2026 में किसी भी हालत में MBBS में दाखिला लेगा। डायरी के पन्नों में उसकी मानसिक स्थिति, दबाव और लक्ष्य को लेकर जुनून साफ दिखाई देता है। यह डायरी जांच में अहम सबूत मानी जा रही है।
● विकलांगता कोटा के दुरुपयोग की कोशिश
पुलिस जांच में सामने आया कि सूरज विकलांगता प्रमाण पत्र के जरिए मेडिकल कॉलेज में सीट हासिल करना चाहता था। नियमों के तहत ऐसे प्रमाण पत्र के लिए पुलिस जांच रिपोर्ट आवश्यक होती है, इसी कारण उसने हमले की झूठी कहानी गढ़ी थी। यह प्रयास न केवल कानून के खिलाफ है, बल्कि वास्तविक दिव्यांग उम्मीदवारों के अधिकारों पर भी सवाल खड़ा करता है।
● इलाज जारी, कानूनी कार्रवाई की तैयारी
सूरज फिलहाल अस्पताल में भर्ती है और उसका इलाज चल रहा है। पुलिस का कहना है कि चिकित्सकीय रूप से फिट होने के बाद उससे विस्तृत पूछताछ की जाएगी और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। मामले में धोखाधड़ी, झूठी सूचना देने और स्वयं को नुकसान पहुंचाने जैसे पहलुओं पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।
● समाज और सिस्टम के लिए चेतावनी
यह मामला केवल एक युवक की गलती नहीं, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव, असफलता के डर और गलत मार्गदर्शन का खतरनाक उदाहरण है। डॉक्टर बनने का सपना सराहनीय है, लेकिन उसके लिए अपने शरीर को नुकसान पहुंचाना और कानून को गुमराह करना गंभीर चिंता का विषय है।
● और अंत में•••
सूरज भास्कर की कहानी यह बताती है कि जब लक्ष्य जुनून बन जाए और सही मार्गदर्शन न मिले, तो इंसान खुद के लिए ही सबसे बड़ा खतरा बन सकता है। यह घटना शिक्षा व्यवस्था, मानसिक स्वास्थ्य और युवाओं को सही दिशा देने की जरूरत पर बड़ा सवाल छोड़ जाती है।





