MP: आदिवासी गोपी का कमाल, बना मिसाल,अकेले लगा दिए 2200 से ज्यादा पेड़,जिंदा पेड़ अब बड़े होकर दे रहे लोगों को जीवनदान

MP: आदिवासी गोपी का कमाल, बना मिसाल,अकेले लगा दिए 2200 से ज्यादा पेड़,जिंदा पेड़ अब बड़े होकर दे रहे लोगों को जीवनदान

मीडियावाला.इन।

*छतरपुर से राजेश चौरसिया की रिपोर्ट*

●जहां शहरों में पेड़ लगा फोटो खिंचा भूल जाते हैं लोग..

●गोपी ने लिया सहेजने का जिम्मा और जिंदा रखे अपने लगाये पेड़..

●जिंदा पेड़ अब बड़े होकर दे रहे लोगों को जीवनदान..

छतरपुर (बक्स्वाहा) गर्मियों के समय में जब सूखा नजर आता है तो राहगीर एक छाँव की तलाश में होते है, तब उनको सड़क पर पेड़ की जो हरियाली छांव दिखती है वह छांव गोपी आदिवासी के प्रयास और कई साल की अथक मेहनत का परिणाम है।

एक ओर जहां गोपी आदिवासी ने अकेले 2200 से ज्यादा पेड़ लगा दिये और उन्हें सहेजे रखा।  शहरों में पेड़ लगा फोटो खिंचाकर लोग भूल जाते हैं तो वहीं गोपी ने सहेजने का जिम्मा लिया और और जिंदा रखे अपने लगाये पेड़ों को जो आज बड़े होकर लोगों को जीवनदान दे रहे हैं।

बता दें कि गोपी आदिवासी मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के बकस्वाहा अंतर्गत मझगुवा-वदन गाँव एक आदिवासी है जो PWD में महज श्रमिक मजदूर थे। उनके परिवार में पत्नी श्यामरानी, 4 लड़की एवं 2 लड़के हैं।

जानकारी के मुताबिक हर साल लाखों पेड़ लगाए जाते हैं, लेकिन इनमें से कितने पौधे पेड़ बनकर तैयार हो पाते हैं, इसकी जानकारी असल में उन्हें ही नहीं होती जो इन्हें लगाते हैं। आमतौर पर पेड़ लगाकर उसे भूल जाते हैं। या मिल ही नहीं पाती है, और लोग ऐसे लोगों के लिए बक्सवाहा के गोपी आदिवासी एक उदाहरण हैं, जो अपने लगाये पेड़ों को सहेजने का भी जिम्मा रखते हैं। जिन्होंने साल 40 साल पहले बक्सवाहा-बम्होरी मार्ग पर पेड़ लगाने की शुरूआत की और रोड के दोनों तरफ 5 किलोमीटर की छाँव बना दी।

बाईट- गोपी आदिवासी


बाईट- दीप्ति पांडे (समाजसेवी और नेत्री)*

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