दवाओं को हथियार बना कर चीन को चोट पहुंचाने की तैयारी में योगी सरकार, ललितपुर में जमीन चिह्नित, 24000 करोड़ रु. का होगा निवेश

दवाओं को हथियार बना कर चीन को चोट पहुंचाने की तैयारी में योगी सरकार, ललितपुर में जमीन चिह्नित, 24000 करोड़ रु. का होगा निवेश

मीडियावाला.इन।

*लखनऊ से रामेन्द्र सिन्हा की विशेष रिपोर्ट*
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने पीएम नरेन्द्र मोदी की रणनीति पर दवाओं को हथियार बना कर चीन को आर्थिक मोर्चे पर चोट पहुंचाने की तैयार कर ली है। प्रदेश में प्रस्तावित टॉय क्लस्टर के बाद बल्क ड्रग पार्क और मेडिकल डिवाइस पार्क की स्थापना के लिए ललितपुर में जमीन चिह्नित कर ली गई है। सरकार का अनुमान है कि चरणबद्ध तरीके से इस परियोजना में 24,000 करोड़ रुपए का निवेश होगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से 31,000 लोगों को रोजी-रोटी मिलेगी और राज्य की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में 32,050 करोड़ की बढ़ोतरी होगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लोकभवन में बल्क ड्रग पार्क और मेडिकल डिवाइस पार्क के प्रस्तुतिकरण के दौरान कहा कि बल्क ड्रग और मेडिकल डिवाइस पार्कों की स्थापना की असीम संभावनाएं हैं। इसके लिए राज्य में पर्याप्त मानव संसाधन व अवस्थापना सुविधाएं उपलब्ध हैं। प्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की इकाइयां बड़ी संख्या में स्थापित हैं। इनके अलावा, सीडीआरआइ, एनबीआरआइ, सीमैप, आइआइटीआर, आइआइटी कानपुर और आइआइटी बीएचयू, एम्स, केजीएमयू, आइएमएस-बीएचयू जैसे उत्कृष्ट संस्थान भी हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दवाओं तथा चिकित्सा उपकरणों के उत्पादन के लिए पार्कों की स्थापना से रोजगार उपलब्ध होंगे। साथ ही, प्रदेश व देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। इस अवसर पर अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त आलोक टंडन, अपर मुख्य सचिव वित्त संजीव मित्तल, अपर मुख्य सचिव औद्योगिक विकास आलोक कुमार, अपर मुख्य सचिव सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम नवनीत सहगल, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री एसपी गोयल व सचिव मुख्यमंत्री आलोक कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
पार्क की स्थापना के लिए करीब 2,060 एकड़ सरकारी भूमि की जरूरत है। वर्तमान में 1200 एकड़ जमीन उपलब्ध है, जबकि शेष के लिए ललितपुर डीएम से समन्वय कर कार्यवाही की जा रही है। प्रस्तावित बल्क ड्रग पार्क में 1100 एकड़ (53 प्रतिशत) क्षेत्र सिर्फ दवा उत्पादन करने वाली कंपनियों के लिए होगा। एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रेडियंट्स (एपीआई) इकाइयां स्थापित की जाएंगी। एपीआई दवा में इस्तेमाल किए जाने वाले ऐसे सक्रिय अवयव होते हैं, जिनका बीमारियों की रोकथाम और उनके उपचार पर सीधा प्रभाव पड़ता है। बल्क ड्रग पार्क में रिसर्च एंड टेस्टिंग सेंटर्स, लॉजिस्टिक्स एंड वेयर हाउस, ड्राई पोर्ट, रोड एंड ट्रास्पोर्ट के ​अलावा रेजिडेंस डेवलप किए जाएंगे।
इस पीरयोजना से एपीआई के लिए चीन पर निर्भरता कम होगी। वर्तमान समय में भारत में जो दवाएं बनती हैं उनमें इस्तेमाल होने वाले 75 फीसद एपीआई चीन से आयात किए जाते हैं। कुछ दवाओं का शत-प्रतिशत एपीआई चीन से ही आयात करना पड़ता है। बल्क ड्रग पार्क और मेडिकल डिवाइस पार्क की स्थापना के बाद भारत की दवाइयों और चिकित्सीय उपकरणों के मामले में चीन पर निर्भरता कम होगी।

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