MP ByPoll 2020: जीत कोई नहीं रहा है, सरकार बची, लाखों पाए

MP ByPoll 2020: जीत कोई नहीं रहा है, सरकार बची, लाखों पाए

मीडियावाला.इन।

मध्यप्रदेश के 28 विधानसभा उपचुनावों की तासीर समझने के लिए न तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तैयार हैं और न ही भाजपा की सरकार बनाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया। और तो और, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ अच्छी तरह जानते हैं कि वे सपने में भी सरकार नहीं बना सकते, लेकिन 28 में से 28 विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव जीतने का दावा कमलनाथ ही कर सकते हैं। ये तीनों नेताओं में समान एक बात है, वह यह है कि हर हाल में सरकार चाहिए। ये तीनों नेताओं में एक बात और समान है, वह यह है कि कमलनाथ की मीडिया से दुश्मनी है और शिवराज-महाराज की मीडिया से कोई बड़ी दोस्ती नहीं है। यूं कहा जाए कि इन तीनों नेताओं का इस चुनाव में मुद्दा बिकाऊ, टिका और खटाऊ के अलावा कुछ नहीं है, और इनको मीडिया की जरूरत भी नहीं है।
जहां तक ​​उम्मीदवारों का सवाल है, भाजपा के उम्मीदवार अपने कार्यकर्ताओं पर भी पैसे खर्च नहीं कर रहे हैं। शायद वह मानकर चल रहे हैं कि अगर चुनाव में ज्यादा पैसा लुटा दिया जाए तो प्रमाणित हो जाएगा कि कमलनाथ और दिग्विजय सिंह का आरोप सही है। दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी का उम्मीदवार यह कहकर खर्चा नहीं कर रहा है कि वह सत्ता में नहीं है। वह जनता से कह रहा है कि बिकाऊ से पैसे ले लो, हमको वोट दे दो। जनता कह रही है अच्छा है ... सौ चूहे खाकर बिल्ली चली हज को । फिर वह कांग्रेस नेताओं से कहती है कि 'चुनाव तुम कहां लड़ रहे हो भाई, चुनाव तो हम ही लड़ रहे हैं। और इसके आगे करेला और नीम चढ़ा। जनता कहती है बाबू हमें वोट डालना मत सिखाओ, ये पब्लिक है सब जानती है।

 इस कड़वी खबर में हमने 28 में से 26 विधानसभा क्षेत्रों का दौरा कर लिया है। आज की तारीख में चुनावी और गणना और संभावनाएं सुनने और लिखने वाले दोनों में कड़वी नीम की तरह है, मतलब ग्वालियर-चंबल संभाग में महाराजा-शिवराज के दम पर केवल 7 सीटें जीतने की स्थिति में है, अगर ग्वालियर चंबल में महाराजा के चेहरे पर लड़ा गया चुनाव, जहां जनता 7 सीटों पर उन्हें कांग्रेस हराने की स्थिति है तो इससे बड़ी फजीहत नहीं हो सकती है। जबकि दो सीटों पर कुछ नहीं कहा जा सकता है। ग्वालियर-चंबल में कांग्रेस पार्टी को भी 7 से ज्यादा सीटे मिलती नहीं  दिखाई पड़ रही है। जहां तक ​​सवाल है, ग्वालियर-चंबल से बाहर मालवा-निमाड़, बुंदेलखंड और महाकौशल की 12 सीटों का तो यहां पर 5-5 सीटें कांग्रेस-भाजपा ने बांट ली हैं, ऐसा प्रतीत होता है। 2 विधानसभा क्षेत्र अभी ढुलमुल की स्थिति में हैं।

इस कड़वी खबर का जो मजबूत पक्ष है, वह यह है कि शिवराज-महाराज की जोड़ी 22 सीटों पर चुनाव जीतना चाहती है, लेकिन यह एक कड़वा सच है कि भाजपा का अंतरंग एक दर्जन से ज्यादा सीटों पर चुनाव जीतना चाहता ही नहीं है और यही है स्थिति कांग्रेस में भी है, वहाँ सबको पता है, कितना भी धक्का मारेंगे कमलनाथ तो एक दर्जन से ज्यादा जीत नहीं सकते।
 इस कड़वी खबर का एक दूसरा पक्ष यह है कि भाजपा में नेतृत्व का दूसरा धड़ा तैयार हो गया है और दूसरे धड़े में भी सौ प्रतिशत हिस्से के ग्वालियर-चंबल संभाग के नेताओं की ही है, मतलब केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर, गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा और प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा तीनों मुख्यमंत्री पद के दावेदार हो गए हैं। इससे आगे चलिए और पता लगाइए महाराजा ज्योतिरादित्य सिंधिया की क्या स्थिति है भाजपा में। हमें जितना पता है, उसके आधार पर यह लिखने में संकोच नहीं है कि संघ ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को पार्टी का चेहरा स्वीकार कर लिया है, लेकिन सिंधिया सोचते है कि वे अगर मुख्यमंत्री नहीं बने तो भी इस बात से खुश हो जाएंगे कि ग्वालियर-चंबल संभाग से शिवराज के बाद कोई पहली बार मप्र का मुख्यमंत्री बनेगा।
 इस कड़वी खबर का लब्बोलुआब यह है कि 28 विधानसभा के उपचुनावों में दोनों दलों में नए नेतृत्व के उभरने का मौका दे दिया है। अंतर केवल इतना है कि भाजपा में कोई गॉड फादर का बेटा नेता नहीं बन रहा है, जबकि कांग्रेस में नकुलनाथ और जयवर्धन के अलावा कोई किसी का नाम नहीं लेता है। कुल मिलाकर इन उपचुनावों से मप्र में भाजपा की सरकार फिर बनी रहने की संभावनाओं के अलावा कुछ भी सच नहीं है।

RB

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विजय कुमार दास

  वरिष्ठ पत्रकार श्री विजय दास राष्ट्रीय हिंदी मेल  समाचार प त्र के  प्रधान सम्पादक है .साथ ही पत्रकारिता के सुदीर्घ अनुभवी श्री दास सेन्ट्रल पत्रकार क्लब के संस्थापक है .