राज्य सरकार का स्कूल खोलने का फैसला तीसरी लहर को निमंत्रण तो नहीं दे रहा है...? स्कूल संचालकों के दबाव में सरकार का 'यू-टर्न'!

राज्य सरकार का स्कूल खोलने का फैसला तीसरी लहर को निमंत्रण तो नहीं दे रहा है...?  स्कूल संचालकों के दबाव में सरकार का 'यू-टर्न'!

मीडियावाला.इन।

रजत परिहार की खास खबर

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के एक फैसले से प्रदेश के लाखों अभिभावकों के माथे पर चिंता की लकीर साफ दिखाई दे रही हैं। कोई अभिभावक कोरोना की तीसरी लहर को लेकर चिंतित है तो अभिभावक स्कूल फीस और ड्रेस को लेकर स्कूल के दबाव से परेशान हैं।
 पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संभावित कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए सभी स्कूल और कॉलेज को नहीं खोलने का निर्णय लिया था। जिसके बाद बच्चों के अभिभावकों में शिवराज सरकार की एक सकारात्मक सोच का संदेश गया था। जिसका कई अभिभावकों ने सोशल मीडिया पर इस निर्णय का स्वागत किया था। लेकिन अचानक स्कूल संचालकों के दबाव में राज्य सरकार के यू-टर्न के बाद 26 जुलाई से 11वीं-12वीं और 5 अगस्त से 9वीं-10वीं की कक्षाएं खोलने का निर्णय लेकर बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों को भी परेशान कर दिया हैं। जबकि दो दिन पहले ही केरल में कोरोना मरीजों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों में लगातार कोरोना के मरीज बढ़ रहे हैं। ऐसे में राज्य सरकार का स्कूल खोलने का आदेश तीसरी लहर को निमंत्रण तो नहीं दे रहा है...?

यह बात यहां इसलिए लिखी जा रही है कि इसके पूर्व में पहली और दूसरी लहर के बढऩे का कारण एक साथ एक जगह पर बिना सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क और सैनेटाइजर का उपयोग नहीं करना था। जिसके कई उदाहरण राज्य सरकार के पास है। राज्य सरकार को तो यह करना चाहिए था कि यूपी, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, पुडुचेरी और चंडीगढ़ में स्कूल खोलने के 30 दिनों बाद किस राज्य में कोरोना के मामले में क्या स्थिति निर्मित होती, उसे देखने के बाद मध्यप्रदेश में स्कूल खोलने के फैसला लेना था। क्योंकि अभी पूरे प्रदेश में फिलहाल कोरोना संक्रमण नियंत्रण में है, यही कारण है कि बाजार, मॉल, रेस्टोरेंट और सिनेमा घर कुछ पाबंदियों के साथ खोले गए हैं। लेकिन स्कूल को 50 प्रतिशत बच्चों के साथ खोलना और उसकी मॉनिटरिंग करने की जिम्मेदारी का निर्वहन पूरी ईमानदारी के साथ करना, यह बात बोलने और सुनने में जरूर अच्छी लगती है लेकिन इस अमल करना ठीक उतना ही असंभव सा हैं। जबकि कुछ दिनों पहले ही स्कूल शिक्षा विभाग के स्कूल खोलने के इस प्रस्ताव को खारिज किया था और चंद दिनों बाद ही 11वीं-12वीं कक्षाएं 26 जुलाई अर्थात 6 दिन बाद खोलने के निर्देश दे दिए है। राज्य सरकार का यह फैसला अभिभावकों के गले से नीचे नहीं उतर रहा है, क्योंकि अभिभावकों को यह बात अच्छे से पता है कि नियमित कक्षाएं शुरू होने के बाद उन्हें स्कूलों को पूरी फीस देना पड़ेगी। इतना ही नहीं ड्रेस, जूते-मोजे, बैग के लिए बच्चों पर स्कूल प्रबंधन द्वारा दबाव बनेगा, ऐसा इसलिए की प्रत्येक स्कूल विशेष की ड्रेस व अन्य सामग्री तय दुकान पर ही मिलती है। जिससे स्कूलों संचालकों की अपनी सांठ-गांठ होने के कारण कमीशन फिक्स रहता है, जबकि वर्तमान में सभी अभिभावकों की स्थिति खराब है। कुछ तो अपनी नौकरी गंवा बैठे और कुछ मजबूरी में आधे वेतन पर पूरा काम कर रहे है। ऐसे में शिवराज सरकार का स्कूल खोलने का निर्णय लाखों अभिभावकों पर वज्रपात से कम नहीं हैं।

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