Thursday, December 12, 2019
किस्सा कलेक्टर ए भोपाल: मनीष सिंह क्यों नहीं बन पाए और पिथोड़े रेस में आगे कैसे हो गए ?

किस्सा कलेक्टर ए भोपाल: मनीष सिंह क्यों नहीं बन पाए और पिथोड़े रेस में आगे कैसे हो गए ?

मीडियावाला.इन।

भोपाल: प्रशासनिक गलियारों में अपने एक्जीक्यूटिव गट्स के लिए जाने जाने वाले मनीष सिंह कलेक्टर भोपाल की दौड़ में कैसे पीछे रह गए और इस दौड़ में तरुण पिथोड़े कैसे आगे निकल आए, किस्सा ए कलेक्टर भोपाल, बहुत रोचक है।
 दरअसल अगर हम भोपाल के कलेक्टर का इतिहास देखें तो यहां हमेशा डायरेक्ट आईएएस कलेक्टर रहा है । मनीष के पक्ष में दिग्विजय सिंह,पीसी शर्मा  से लेकर कांग्रेस के कई नेता थे लेकिन आरिफ अकील का विरोध मनीष को भारी पड़ गया और वे कलेक्टर भोपाल बनते बनते रह गए। आरिफ अकील का यह मानना था कि जो अधिकारी 15 साल तक भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का खुलकर काम करते रहे, उन्हें इस सरकार में भी मुख्यधारा की पोस्टिंग दे दी जाए तो यह मैसेज जाएगा कि कांग्रेस सरकार में भी ऐसे अधिकारियों को प्राइम पोस्टिंग मिल रही है तो बाकी अधिकारी कहां जाएंगे?  उनकी इस बात को उन्होंने सीएम कमलनाथ को भी कन्वींस कराया। मनीष सिंह के साथ कलेक्टर भोपाल की रेस में तरुण पिथोड़े और तेजस्वी नायक का नाम भी था। 

पिथोड़े और मनीष सिंह आईएएस के लिए इमेज परिणाम     à¤ªà¤¿à¤¥à¥‹à¤¡à¤¼à¥‡ और मनीष सिंह आईएएस के लिए इमेज परिणाम
सूत्रों की मानें तो  मुख्य सचिव मोहंती  शुरू से ही पिथोड़े के पक्ष में थे क्योंकि ऊर्जा विकास निगम में  वे पिथोड़े का काम रूबरू देख चुके थे। पिथोड़े के फेवर में एक बात थी उनका ट्रेक रिकॉर्ड। वे चार जिलों की सफलता के साथ कलेक्ट्री कर चुके थे। बताया गया है कि चर्चा में यह बात सामने आई कि मनीष केवल अर्बन और इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एक्सपर्ट माने जाते हैं , पिथोड़े के ओवरऑल परफॉर्मेंस को और कलेक्टर के रूप में ज्यादा अनुभव को देखते हुए उन्हें ज्यादा मार्क्स  मिल गए।  तेजस्वी नायक ने भी भरपूर प्रयास किए कलेक्टर  भोपाल बनने के लिए , यहां तक कि उन्होंने अपने गृह राज्य कर्नाटक के कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से कमलनाथ को फोन कर सिफारिश लगवाई। फल स्वरूप उन्हें भोपाल तो नहीं बेतूल की कलेक्ट्री जरूर मिल गई। वैसे भी तुलनात्मक रूप से जूनियर होने से उन्हें अभी भोपाल की कलेक्ट्री पद के लिए इंतजार करना होगा।  
भोपाल कलेक्टर के लिए जब मुख्य सचिव ने मुख्यमंत्री के सामने यह तीनों नाम रखें और और जब मोहंती ने संकेत में पिथोड़े का फेवर किया तब मुख्यमंत्री ने मोहंती की बात को तवज्जो देते हुए पिथोड़े को कलेक्टर बनाने पर सहमति दी। हालांकि भोपाल कलेक्टर पद के चयन की इस मशक्कत में 11 दिन लग गए और भाजपा और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज ने इसका तंज भी किया। लेकिन अंततः पिथोड़े के रूप में भोपाल को एक बेहतर, संवेदनशील, लेखक प्रशासनिक अधिकारी प्राप्त हुआ है इससे इंकार नहीं किया जा सकता।
मनीष अर्बन और औद्योगिक फील्ड के मास्टर अधिकारी माने जाते हैं और निश्चित रूप से सरकार उनकी इस काबिलियत का सकारात्मक उपयोग करेगी, यह माना जा रहा है।

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सुरेश तिवारी

मध्यप्रदेश शासन के पूर्व जनसम्पर्क संचालक एवं मध्यप्रदेश माध्यम के पूर्व एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर सुरेश तिवारी एक कुशल प्रशासनिक अधिकारी, प्रखर मीडिया पर्सन और नवोन्मेषी जनसंपर्क कर्मी है। आपका पत्रकारिता के साथ ही जनसम्पर्क और राज्य शासन के प्रचार उपक्रम मध्यप्रदेश माध्यम में प्रतिष्ठापूर्ण वरिष्ठ पदों पर कार्य करने का 35 वर्षों का सुदीर्घ अनुभव रहा है।

आप अनेक जिलों में जनसम्पर्क अधिकारी के रूप में कार्य करने के बाद प्रदेश की औद्योगिकी राजधानी और प्रमुख मीडिया सेन्टर, इंदौर में संयुक्त संचालक, देश की राजधानी नई दिल्ली में मध्यप्रदेश के सूचना केन्द्र के प्रभारी और सेवा निवृति से पूर्व 8 वर्षों तक प्रदेश की राजधानी भोपाल में अपर संचालक व संचालक जनसम्पर्क के रूप में और राज्य शासन के प्रचार उपक्रम मध्यप्रदेश माध्यम में एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में कुशल मीडिया अधिकारी रहे है।


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