बड़ी खबर: मध्यप्रदेश के बहुचर्चित व्यापम घोटाले में रंजना चौधरी सहित रिटायर्ड आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ी, 2011 से 2013 तक व्यापम की चेयरमैन थी रंजना

बड़ी खबर: मध्यप्रदेश के बहुचर्चित व्यापम घोटाले में रंजना चौधरी सहित रिटायर्ड आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ी, 2011 से 2013 तक व्यापम की चेयरमैन थी रंजना

मीडियावाला.इन।

भोपाल: मध्य प्रदेश के बहुचर्चित व्यापम घोटाले में 1974 बैच की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी, जो सेवानिवृत्त हो चुकी है, की मुश्किलें बढ़ सकती है. इसी प्रकार रिटायर्ड आईएएस अधिकारी केसी जैन और रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी आरके शिवहरे की भूमिका पर भी सीबीआई ने कई प्रश्न खड़े किए हैं। सीबीआई ने इन तीनों अधिकारियों के खिलाफ सबूत एकत्रित कर फाइल दिल्ली भेज दी है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार इन तीनों अधिकारियों से सीबीआई फिर से पूछताछ कर सकती है।  इसी प्रकार केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सोनाली मिश्रा के भाई भरत मिश्रा के खिलाफ भी सीबीआई को कई सबूत मिले हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सीबीआई को जांच के दौरान रंजना चौधरी, केसी जैन और आरके शिवहरे के खिलाफ सीबीआई को पुख्ता साक्ष्य मिले हैं।
सूत्रों पर भरोसा किया जाए तो केसी जैन ने अपने बेटे और आरके शिवहरे ने अपनी बेटी को प्री PG  परीक्षा में पास कराने के लिए लाखों लाखों रुपए का लेनदेन किया।
ज्ञात रहे कि कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने समय-समय पर व्यापम घोटाले के कई तथ्यों को उजागर करने के साथ ही आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की भूमिका पर कई सवाल खड़े किए थे।

रंजना चौधरी 2011 से 2013 के बीच व्यापम की चेयरमैन थीं। इसके बाद उन्हें हैदराबाद में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण में जज नियुक्त किया गया । 
सूत्रोंं के मुताबिक सीबीआई के आरोपपत्र के सारांश से पता चलता है कि 'इंजन-बोगी व्यवस्था' के जरिये नकल कराने के लिए व्यापम के अधिकारियों ने पीएमटी 2012 के दौरान कई 'कपटपूर्ण निर्णय' लिए। इनमें से एक था अन्य शहरों में होनेवाली परीक्षाओं का इंदौर और भोपाल में होनेवाली परीक्षाओं के साथ विलय कराना। इसके कारण परीक्षा केन्द्रों में भीड़ बढ़ गई जिससे रैकेटियर को पैसा देने वाले छात्रों को बड़े पैमाने पर नकल करने का मौका मिला। 

सूत्रों के मुताबिक व्यापम घोटाले की जांच सीबीआई की कमान में आने से पहले 2 मई 2015 को विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने व्यापम कार्यालय के अंदर चौधरी से पूछताछ की थी। एसटीएफ जांच की निगरानी कर रही एसआईटी ने चौधरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की थी और मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एसटीएफ को इसका पालन नहीं करने के लिए फटकार लगाई थी। 

चौधरी उस तीन सदस्यीय टीम की भी प्रमुख थीं जिन्होंने मेडिकल प्री-पीजी 2012 परीक्षा के प्रश्नपत्रों को अंतिम रूप दिया था। टीम के अन्य दो सदस्यों में आईपीएस अधिकारी एम. नटराजन और रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी आर. पी. शुक्ला शामिल थे। 

ज्ञात रहे सीबीआई ने व्यापम के चार पूर्व अधिकारियों समेत 592 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश किया था। एक अनुमान के मुताबिक व्यापम के पीएमटी-2012 घोटाले में 2000 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि का लेनदेन हुआ था और 5000 से ज्यादा छात्र-छात्राएं इससे प्रभावित हुए थे। 

 

जानिए क्या कहा कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने

व्यापमं महाघोटाले को उजागर करने से लेकर श्री शिवराजसिंह चौहान द्वारा मेरे विरुद्ध लगाए गए मानहानि प्रकरण में मुझे 2 साल की कराई गई प्रायोजित सजा के बाद भी मैं आज तक चिल्ला-चिल्ला कर कह रहा हूँ कि इसके किरदारों में कई सेवानिवृत्त IAS-IPS अधिकारियों की सीधी प्रामाणिक संलिप्तता है,मैंने CBI को दस्तावेज भी सोंपे हैं,पुख्ता साक्ष्यों के बाद भी केंद्र-CBI अकर्मण्य क्यों?

           K.K.MISHRA

 

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