संस्मरण: डीजीपी सम्मेलन का सौभाग्य

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संस्मरण: डीजीपी सम्मेलन का सौभाग्य

— एन. के. त्रिपाठी

वार्षिक डीजीपी सम्मेलन भारतीय पुलिस का शिखर सम्मेलन होता है। प्रत्येक वर्ष सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशक (DGP) तथा सभी केंद्रीय पुलिस और खुफिया संगठनों के महानिदेशक विचार-विमर्श के लिए एकत्रित होते हैं। इस सम्मेलन को प्रधानमंत्री भी संबोधित करते हैं।

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पुलिस मुख्यालय (PHQ) में एक कनिष्ठ पुलिस अधिकारी के रूप में, कभी-कभी मुझे अपने डीजीपी के लिए सम्मेलन में भाग लेने हेतु नोट्स तैयार करने पड़ते थे। विचार-विमर्श के अतिरिक्त, राष्ट्रपति की लंच, प्रधानमंत्री के साथ हाई-टी तथा गृह मंत्री के साथ अनौपचारिक चाय सम्मेलन के मुख्य आकर्षण होते थे।

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मैं स्वयं एक प्रतिभागी के रूप में इस सम्मेलन में भाग लेने की इच्छा रखता था। सन् 2010 में जम्मू-कश्मीर में स्पेशल DG CRPF के पद पर कार्यरत रहने के पश्चात मेरा स्थानान्तर DG, नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो, भारत सरकार, नई दिल्ली के पद पर हुआ। वर्ष 2011 के प्रारंभ में मुझे सूचना मिली कि डीजीपी सम्मेलन सितंबर माह में आयोजित होगा। यह मेरे लिए एक बड़ा धक्का था क्योंकि मुझे 31 अगस्त को, सम्मेलन से ठीक पूर्व , सेवानिवृत्त होना था। मैं निराश था। किन्तु अगस्त के अंतिम सप्ताह में मुझे गृह मंत्रालय से एक अत्यंत आवश्यक और आश्चर्यजनक पत्र प्राप्त हुआ। गृह मंत्री ने मुझे छह महीने का सेवा-विस्तार प्रदान किया था। यह विस्तार मेरे विभाग की एक प्रतिष्ठित और प्रगति पर चल रही परियोजना को पूरा करने के लिए दिया गया था, जिसमें सरकार का मानना था कि मैं अच्छा कार्य कर रहा हूँ। मैं इस सेवा-विस्तार से अत्यंत प्रसन्न था, विशेषकर इसलिए कि इससे मुझे उस बहुप्रतीक्षित सम्मेलन में भाग लेने का अवसर मिल गया।

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सम्मेलन के पहले दिन गृह मंत्री श्री पी. चिदंबरम ने सभा को संबोधित किया और हमने उनके साथ अनौपचारिक चाय ली। इसके बाद विचार-विमर्श के सत्र प्रारंभ हुए। अगले दिन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह संबोधन हेतु आए। वरिष्ठता के प्रोटोकॉल के अनुसार हम सभी एक पंक्ति में खड़े होकर उनसे परिचित कराए गए। उसी शाम प्रधानमंत्री ने हमें अपने आधिकारिक निवास, 7 रेस कोर्स रोड, पर हाई-टी के लिए आमंत्रित किया। वे समूह के साथ बातचीत में काफी सहज और आत्मीय थे।

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तीसरे दिन हम राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति लंच के लिए गए। सबसे पहले फोटो सत्र हुआ। राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल के साथ समूह का फोटो राष्ट्रपति भवन के प्रसिद्ध औपचारिक दरबार हॉल में लिया गया। प्रत्येक व्यक्ति के लिए स्थान निर्धारित था। वरिष्ठता के अनुसार मुझे प्रथम पंक्ति में बैठने का स्थान मिला। इसके बाद अत्यंत औपचारिक ढंग से दोपहर को लंच हुआ। बैठने की व्यवस्था अत्यंत सावधानीपूर्वक की गई थी। वेटर अत्यंत अनुशासित ढंग से सेवा कर रहे थे। टेबल पर रखी छोटी पुष्प-सज्जा के रंग से यह संकेत मिलता था कि अतिथि शाकाहारी है या मांसाहारी।

सन् 2014 में जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने, तब से यह सम्मेलन विभिन्न राज्यों में क्रमशः आयोजित होने लगा। इसका प्रारूप अधिक संक्षिप्त हो गया, जिसमें विचार विमर्श के सत्र लंबे हो गए और दिल्ली के औपचारिक कार्यक्रम कम हो गए। सम्मेलन अब अधिक कार्य-केंद्रित हो गए हैं, यद्यपि उनमें पहले जैसा आकर्षण और औपचारिक भव्यता कम हो गई है।