
Misbehaviour with Shankaracharya : जगद्गुरु शंकराचार्य श्री अविमुक्तेश्वरानंद जी के साथ हुए दुर्व्यवहार से सनातन धर्मावलमिबयों में गहन आक्रोश!
Ratlam : प्रयागराज में मौनी अमावस्या पर परम पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य श्री अविमुक्तेश्वरानंदजी महाराज के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार से सनातन धर्मावलंबियों में गहन आक्रोश की वजह से सनातन धर्म सभा के पदाधिकारियों ने बुधवार को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन दिया। सनातन धर्म सभा अध्यक्ष अनिल झालानी ने ज्ञापन का वाचन करते हुए बताया कि गत दिनों प्रयागराज में मौनीअमावस्या पर परंपरागत रूप से संपन्न होने वाले कुंभ स्नान के अवसर पर हिंदू एवं सनातन धर्म के सर्वोच्च धर्मगुरु, परम पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य श्री अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज को कथित रूप से स्नान करने से रोका गया तथा उनकी पालकी को हटाकर उनके शिष्यों के साथ दुर्व्यवहार किया गया।
उक्त घटना के दृश्य जब राष्ट्रीय मीडिया के माध्यम से देशभर में प्रसारित हुए तब संपूर्ण सनातन समाज अत्यंत पीड़ा, आक्रोश एवं क्षोभ व्याप्त हो गया। जगद्गुरु शंकराचार्यजी केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि सनातन धर्म की सर्वोच्च पीठ, परंपरा, गरिमा एवं आध्यात्मिक चेतना के प्रतीक हैं। सदियों से चली आ रही स्नान परंपरा के निर्वहन से उन्हें रोका जाना तथा उनके साथ किया गया व्यवहार न केवल निंदनीय हैं बल्कि करोड़ों सनातनी श्रद्धालुओं की आस्था पर गहरा आघात है। इस घटना से संपूर्ण सनातन समाज स्वयं को अपमानित, आहत एवं आत्मग्लानि से ग्रसित अनुभव कर रहा है।
ऐसी परिस्थितियों में यह अत्यंत आवश्यक हैं कि शासन-प्रशासन द्वारा इस विषय की गंभीरता को समझते हुए सम्मानजनक एवं विश्वास बहाल करने वाला समाधान शीघ्र सुनिश्चित किया जाए ताकि धर्मगुरुओं की गरिमा, मर्यादा, प्रतिष्ठा एवं सम्मान अक्षुण्ण रह सके। साथ ही इस प्रकरण के दौरान कुछ राष्ट्रीय स्तर के मीडिया चेनलों द्वारा हिंदू आस्था के सर्वोच्च प्रतीकों के संदर्भ में जिस प्रकार की भाषा, शब्दावली एवं संबोधन का प्रयोग किया गया। वह अत्यंत आपत्तिजनक, असहनीय एवं समाज की सहनशीलता को तोड़ने वाला रहा हैं जो निंदनीय है।
अत: हम आपसे विनम्र अनुरोध करते हैं कि- इस संपूर्ण घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाए। धर्मगुरुओं के सम्मान को यदि इरादतन ठेस पहुंचाने का कृत्य हो, तो उन पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। सनातन समाज को विश्वास में लेकर उसकी आस्था, परंपरा एवं गरिमा की पुनर्स्थापना की जाए। मीडिया द्वारा की गई आपत्तिजनक भाषा एवं आचरण पर भी आवश्यक संज्ञान लिया जाए। हमें पूर्ण विश्वास है कि राष्ट्र के संवैधानिक पदों पर आसीन आपके द्वारा इस विषय पर संवेदनशील, न्यायोचित एवं सम्मानजनक निर्णय लिया जाएगा। अनिल झाालानी, डॉ. राजेन्द्र शर्मा, नवनीत सोनी, बंशीलाल शर्मा, गोपाल झावेरी, नरेन्द्र जोशी, सत्यनारायण पालीवाल, अविनाश व्यास, रजनी व्यास, हंसा व्यास, बसंत पंड्या, जनक नागल, सुरेश दवे, मुकेश शर्मा, जुगल पंडया, नरेन्द्र श्रेष्ठ, कैलाश झालानी, शिवपाल छपरी, जितेन्द्र मिर्ची, संजय सोनी, चेतन शर्मा, जीतु राठौड़ सहित अनेक सनातन धर्मावलंबी मौजूद थे!





