
Mobile Addiction: मोबाइल की लत और झुकी हुई गर्दन वाली नई पीढ़ी की चिंता!
वरिष्ठ पत्रकार कीर्ति राणा की मोबाइल लत पर गहरी चिंता
INDORE: वरिष्ठ पत्रकार कीर्ति राणा ने एक AI जनरेटेड वीडियो संदेश साझा कर समाज के सामने एक गहरी और सामयिक चिंता रखी है- “मोबाइल की लत और झुकी हुई गर्दन वाली नई पीढ़ी की चिंता।” वीडियो में उन्होंने उस भविष्य की तस्वीर दिखाई है, जहां इंसान तकनीक का गुलाम बनकर शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर होता जा रहा है।

*भविष्य उज्जवल, लेकिन दिशा चिंताजनक*
अपने संदेश में कीर्ति राणा कहते हैं कि “भारत का भविष्य तो उज्जवल है ही… 2050 तक बहुत कुछ अच्छा होगा, लेकिन तब तक हममें से कई शायद उस वक्त को देख न पाएं। फिर भी हम यह कामना जरूर कर सकते हैं कि देश में ऐसे दृश्य देखने की नौबत न आए।”
उनका यह कथन न केवल तकनीकी विकास पर आशा व्यक्त करता है, बल्कि आधुनिक जीवनशैली की अंधी दौड़ में छिपे खतरों की ओर चेतावनी भी देता है।

*मोबाइल की लत और ‘झुकी गर्दन’ की पीढ़ी*
वीडियो में दिखाया गया दृश्य बताता है कि कैसे आज के बच्चे और युवा स्मार्टफोन की लत में इतने डूब गए हैं कि उनका शरीर, चाल-ढाल और सोचने का तरीका तक बदलता जा रहा है।
लोग लगातार स्क्रीन पर झुके रहते हैं, गर्दन स्थायी रूप से झुकी हुई अवस्था में रहती है, जिससे शरीर का नैसर्गिक संतुलन बिगड़ता है। डॉक्टर पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि यह आदत ‘टेक्स्ट नेक सिंड्रोम’ का रूप ले रही है, जो आने वाले वर्षों में नई पीढ़ी के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट बन सकता है।

*तकनीक उपयोग की समझदारी ही समाधान*
कीर्ति राणा का यह संदेश केवल आलोचना नहीं, बल्कि आत्ममंथन का आह्वान है। वे बताते हैं कि तकनीक का प्रयोग जीवन को सरल बनाए, नियंत्रित नहीं करे- यही भाव हमें अपने बच्चों और समाज में विकसित करना होगा। उन्होंने कहा कि यदि अभी से हम सचेत नहीं हुए, तो 2050 का भारत भले ही आर्थिक रूप से शक्तिशाली हो, लेकिन भावनात्मक और शारीरिक रूप से झुकी गर्दन वाला भारत बन जाएगा।
*संवेदना के साथ संदेश*
अपने संदेश के अंत में उन्होंने कहा- ❤️“हर दिन बरसे आनंद।”🩷
यह पंक्ति आशावाद और सकारात्मकता की वह पुकार है जो हमें स्मरण कराती है कि भविष्य का निर्माण आज की चेतना से ही संभव है।





