
राष्ट्रीय जनजातीय आयोग की जांच में ‘वायरल गर्ल’ नाबालिग साबित, मामले में अब आयेंगे कई ट्विस्ट,फरमान खान की बढ़ी मुश्किलें
खरगोन : मप्र के खरगोन जिले से जुड़े बहुचर्चित ‘ वायरल गर्ल ’ मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। राष्ट्रीय जनजातीय आयोग की जांच में उक्त किशोरी को आदिवासी और नाबालिग पाया गया है, जिससे पूरे मामले में नया मोड़ आ गया है। इसके साथ ही खरगोन जिले के महेश्वर थाने में फरमान खान के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज किया गया है।
गौतम बुद्ध नगर (उत्तर प्रदेश) के सामाजिक कार्यकर्ता व वकील प्रथम दुबे ने दस्तावेजों के साथ बताया कि उन्होंने 17 मार्च को राष्ट्रीय जनजातीय आयोग के अध्यक्ष को शिकायत कर वायरल गर्ल की आयु व अन्य मुद्दों की जांच की मांग की थी। इस पर जांच दल ने तीन दिन में अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत कर उक्त लड़की को आदिवासी समाज की श्रेणी से होना पाया। साथ ही खरगोन जिले के महेश्वर के शासकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से उन्हें जन्म प्रमाण पत्र प्रदान किया गया जिसमें उसे स्पष्ट रूप से नाबालिग पाया गया।
जांच दल के प्रतिवेदन और अनुशंसा के आधार पर आयोग ने 27 मार्च को मप्र और केरल के डीजीपी , खरगोन के कलेक्टर व एसपी तथा महेश्वर के सीएमओ व तहसीलदार को पत्र भेजकर तीन दिन में कार्रवाई के बारे में अवगत कराने को कहा है।
शिकायतकर्ता के मुताबिक मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने 22 अप्रैल 2026 को केरल और मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को दिल्ली मुख्यालय तलब किया है
इधर, लड़की के पिता ने फरमान खान के खिलाफ महेश्वर थाने में 25 मार्च को अपहरण का मामला दर्ज कराया है। शिकायत में बेटी को बहला-फुसलाकर ले जाने का आरोप लगाया गया है। प्रथम दुबे ने प्रेस विज्ञप्ति से मीडिया को पूरी जानकारी साझा की है।
खरगोन जिले के चर्चित ‘वायरल गर्ल’ मामले में अब एफआईआर के विवरण सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। पुलिस दस्तावेजों के अनुसार, पीड़िता के पिता ने आरोप लगाया है कि उनकी नाबालिग बेटी को फिल्म में काम दिलाने का झांसा देकर बहला-फुसलाकर केरल ले जाया गया और बाद में उससे शादी कर ली गई।
शिकायत में बताया गया है कि परिवार महेश्वर क्षेत्र में रहकर माला और मोती बेचने का काम करता है। इसी दौरान माला बेचते समय बेटी का वीडियो वायरल हुआ, जिसके बाद उसे फिल्मों और गानों में काम दिलाने का लालच दिया गया। आरोप है कि एक व्यक्ति ने लगातार बातचीत कर भरोसा जीता और 27 फरवरी को शूटिंग के बहाने संपर्क बढ़ाया।
एफआईआर के मुताबिक, आरोपी ने पीड़िता और उसके परिजनों को बड़े प्रोजेक्ट्स में काम दिलाने का आश्वासन दिया और बेहतर कमाई का लालच दिया। इसके बाद फ्लाइट टिकट की व्यवस्था कर पीड़िता को केरल ले जाया गया, जहां उसे अलग-अलग स्थानों पर घुमाया गया और परिवार से दूर रखा गया।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि जब परिजनों ने बेटी से संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्हें टालमटोल जवाब दिए गए। बाद में सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी मिली कि पीड़िता की शादी कर दी गई है, जिससे परिवार स्तब्ध रह गया।
पीड़िता के पिता ने आरोपी पर धोखाधड़ी, अपहरण और जबरन शादी कराने के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने पुलिस से बेटी को सुरक्षित वापस लाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और पूरे घटनाक्रम की विभिन्न पहलुओं से पड़ताल की जा रही है।
अब ऐसे में जबकि चर्चा में आई लड़की बालिग नहीं है, जबकि उसकी शादी की बात सामने आई थी। इससे मामला और गंभीर हो गया है। नाबालिग की शादी विभिन्न धाराओं के अंतर्गत अपराध की श्रेणी में आती है और आरोपी फरमान खान बुरी तरह उलझते नजर आ रहे हैं।
उधर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी खरगोन के पुलिस अधीक्षक को तथ्यों के आधार पर कार्रवाई कर उन्हें अवगत कराने को कहा है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रशासन और पुलिस पर मामले में सख्त कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। पुलिस अधिकारी इस बारे में बोलने से बच रहे हैं ।वहीं, नाबालिग की शादी सामने आने से बाल विवाह और मानवाधिकार उल्लंघन के पहलुओं पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।




