तेलंगाना में TRS को हराने के लिए कांग्रेस ने रेड्डियों पर जताया भरोसा

तेलंगाना में TRS को हराने के लिए कांग्रेस ने रेड्डियों पर जताया भरोसा

मीडियावाला.इन। कांग्रेस को उम्मीद है कि हैदराबाद (ग्रेटर हैदराबाद क्षेत्र) के आसपास की 27 सीटें 'महाकुटमी' के पाले में आ सकती हैं. बता दें कि सत्तारूढ़ टीआरएस के खिलाफ कांग्रेस, टीडीपी और अन्य पार्टियों ने मिलकर महाकुटमी (गठबंधन) बनाया है.

UPA -2  के दौरान तेलंगाना के गठन से पहले तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) के मुखिया के चंद्रशेखर राव (KCR) ने एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता से मुलाकात की थी. राव ने उनसे कहा था कि अगर संसद तेलंगाना का बिल पास करा दे तो वह अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर देंगे और मुख्यमंत्री बन जाएंगे.

उस वक्त कांग्रेस नेता और रेड्डी समुदाय के प्रभावशाली कांग्रेस नेता ने केसीआर को बताया कि अगर वह यह उम्मीद कर रहे हैं कि कांग्रेस उन्हें सीएम बनाएगी तो वह बेवकूफ हैं. पार्टी केवल रेड्डी को ही सीएम बनाएगी.

टीआरएस के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, केसीआर को महसूस हुआ कि कांग्रेस विलय के खिलाफ है. कुछ महीने बाद टीआरएस को जीत मिली और केसीआर तेलंगाना के पहले सीएम बन गए. अब तेलंगाना में दूसरा विधानसभा चुनाव हो रहा है. यहां मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की आस रेड्डी समुदाय पर टिकी हुई है.

कांग्रेस के 75 में से 29 उम्मीदवार रेड्डी समुदाय से हैं. राज्य में रेड्डियों की आबादी 12 फीसदी से ज्यादा है. यूनाइटेड आंध्र प्रदेश के दौरान रेड्डी समुदाय कांग्रेस की रीढ़ की हड्डी रही है. अब कांग्रेस, तेलंगाना में वापसी के लिए रेड्डियों के भरोसे है.


तेलंगाना के चुनाव में जगनमोहन रेड्डी ने अपनी पार्टी वाईएसआरसीपी से एक भी प्रत्याशी खड़ा नहीं किया है जो अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस की मदद करेगा. कांग्रेस के रेड्डी नेताओं की सूची में तेलंगाना इकाई के अध्यक्ष एन उत्तम कुमार रेड्डी, पत्नी पद्मावती रेड्डी, कोमेडी राजगोपाल रेड्डी और नेता विपक्ष कोमेडी वेंकट रेड्डी शामिल हैं. फायरब्रांड रेवंत रेड्डी, वरिष्ठ विधायक अरुणा रेड्डी और सुनीथा लक्ष्मण रेड्डी भी शामिल हैं. पूर्व सीएम चन्ना रेड्डी के बेटे और पूर्व विधायक शशिधर रेड्डी भी पार्टी का टिकट पा सकते हैं.


कांग्रेस फिलहाल तेलंगाना की 18 और सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान करने वाली है. टीआरएस के खिलाफ बने महाकुटमी में लंबी बातचीत के बाद कांग्रेस को 93, टीडीपी को 14, तेलंगाना ज्वाइंट एक्शन कमिटी को 8, सीपीआई को 2 और आईएनटीआई पार्टी को 1 सीट दी गई है.

एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता के अनुसार रेड्डियों को इस बात की चिंता है कि सलाहकार एससी नेता के. राजू के प्रभाव में आकर राहुल गांधी एससी लोगों का समर्थन कर रहे हैं. हालांकि वह किसी तरह पार्टी चीफ को इस बात के लिए मना चुके हैं कि केवल रेड्डी ही पार्टी को सत्ता में वापस ला सकते हैं.

चुनाव में दो महत्वपूर्ण दलित नेता दामोदर राजा नरसिम्हा और भट्टी विक्रमाका भी चुनाव लड़ रहे हैं और यदि पार्टी जीतती है, तो उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी की उम्मीद है. पार्टी के मुस्लिम चेहरे और पूर्व मंत्री शबीर अली भी कांग्रेस सूची में शामिल हैं.


आंध्र प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री डॉ एम एम मसूरा रेड्डी  ने कहा, 'हैदराबाद जिले में 14 सीटें हैं और रंगा रेड्डी जिले में 13 सीटें हैं. रेड्डी और काम्मा आबादी यहां ज्यादा है. उनमें से कई आंध्र प्रदेश के प्रवासी हैं. इस क्षेत्र में कोई तेलंगाना भावनाएं नहीं हैं और टीआरएस भी कमजोर है. अगर कांग्रेस और टीडीपी अच्छी तरह से लड़ते हैं, तो वे हैदराबाद में 7 सीटों को छोड़कर अधिकतम सीटें जीत सकते हैं, जहां असदुद्दीन ओवैसी के एआईएमआईएम जीतने की संभावना है.'

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, टीडीपी के  नेता और आंध्र के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू अभी भी हैदराबाद क्षेत्र में लोकप्रिय हैं और लोग मानते हैं कि उन्होंने आईटी, जैव प्रौद्योगिकी और अन्य बड़े उद्योगों की स्थापना के दौरान विश्व मानचित्र पर हैदराबाद को बनाए रखा है.


'महाकुटमी' महबूबनगर, हैदराबाद, रंगा रेड्डी, नलगोंडा और खम्मम के दक्षिणी जिलों पर केंद्रित है जहां टीआरएस अपेक्षाकृत कमजोर है. इसके साथ ही चंद्रबाबू नायडू को आंध्र में रेड्डी लोगों का दुश्मन माना जाता है. ऐसे में अगर महाकुटमी जीती तो यह कारक सीएम तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा.


 

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