सबरीमाला / मुख्य पुजारी ने कहा- महिलाएं मंदिर न आएं, श्रद्धालुओं की भावनाओं का ध्यान रखें

सबरीमाला / मुख्य पुजारी ने कहा- महिलाएं मंदिर न आएं, श्रद्धालुओं की भावनाओं का ध्यान रखें

मीडियावाला.इन।

 

  • मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ राज्यभर में हो रहे विरोध को देखते हुए पुजारी ने की अपील

  • सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पहली बार मासिक पूजा के लिए 17 अक्टूबर को मंदिर खोला गया

  • कोर्ट ने हर उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश देने को कहा था, इसी फैसले का राज्यभर में विरोध


तिरुवनंतपुरम. सबरीमाला मंदिर के मुख्य पुजारी ने अपील की है कि 10-50 साल की आयु की महिलाएं मंदिर में न आएं। मुख्य पुजारी कंडारू राजीवारू ने मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ राज्यभर में हो रहे विरोध को देखते हुए यह अपील की।

 

राजीवारू ने उन खबरों को नकार दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि पुजारी परिवार ने 10-50 साल की महिलाओं को प्रवेश दिए जाने पर मंदिर बंद करने की योजना बनाई है। उन्होंने कहा कि मासिक पूजा और दूसरे अनुष्ठानों को पूरा करना हमारी जिम्मेदारी है। हम इस परंपरा को नहीं तोड़ेंगे।

 

श्रद्धालुओं की सुरक्षा राज्य सरकार की जिम्मेदारी-  गृह मंत्रालय

गृह मंत्रालय ने महिलाओं के प्रवेश को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों पर चिंता जताई। मंत्रालय ने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हमने कानून-व्यवस्था को लेकर 15 अक्टूबर को ही राज्य सरकार को एडवायजरी जारी कर दी थी।


दूसरे दिन भी किसी महिला ने दर्शन नहीं किए

मंदिर के पट खुलने के दूसरे दिन भी कोई महिला श्रद्धालु भगवान अयप्पा के दर्शन नहीं कर पाई। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में गुरुवार को कई संगठनों ने बंद बुलाया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सुहासिनी राज पंबा नदी तक पहुंचने वालीं पहली महिला बन गईं, लेकिन वे मंदिर तक नहीं पहुंच पाईं। प्रदर्शनकारियों के भारी विरोध के चलते उन्हें यहीं से लौटना पड़ा। सुहासिनी न्यूयॉर्क टाइम्स की पत्रकार हैं और यहां मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर चल रहे विरोध-प्रदर्शन को कवर करने गई थीं। 


सुहासिनी राज की सुरक्षा में कमांडो भी शामिल थे। लेकिन, मंदिर के कुछ किलोमीटर पहले ही बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इसके बाद उन्हें पंबा बेस कैंप ले जाया गया।

800 साल से जारी प्रथा

सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश के फैसले के खिलाफ केरल के राजपरिवार और मंदिर के मुख्य पुजारियों समेत कई हिंदू संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी। अदालत ने सुनवाई से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश करने की इजाजत दी। यहां 10 साल की बच्चियों से लेकर 50 साल तक की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी थी। प्रथा 800 साल से चली आ रही थी।

 

हर साल 5 करोड़ लोग करते हैं दर्शन

सबरीमाला मंदिर पत्तनमतिट्टा जिले के पेरियार टाइगर रिजर्वक्षेत्र में है। 12वीं सदी के इस मंदिर में भगवान अय्यप्पा की पूजा होती है। मान्यता है कि अय्यपा, भगवान शिव और विष्णु के स्त्री रूप अवतार मोहिनी के पुत्र हैं। दर्शन के लिए हर साल यहां साढ़े चार से पांच करोड़ लोग आते हैं।

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