मोदी को क्लीन चिट देने के खिलाफ दायर याचिका सुप्रीम कोर्ट ने मंजूर की, 19 को सुनवाई

मोदी को क्लीन चिट देने के खिलाफ दायर याचिका सुप्रीम कोर्ट ने मंजूर की, 19 को सुनवाई

मीडियावाला.इन।

  • 2002 में गुलबर्ग सोसायटी में भड़के दंगों में कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी समेत 69 लोगों की हत्या हुई थी

  • एसआईटी ने फरवरी 2012 को क्लोजर रिपोर्ट दायर कर मोदी को क्लीन चिट दी थी

  • दिवंगत सांसद की पत्नी जकिया जाफरी ने अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की

  • गुजरात हाईकोर्ट ने पिछले साल जकिया की याचिका खारिज कर दी थी

 

नई दिल्ली. 2002 के गुजरात दंगों के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) से क्लीन चिट मिलने के खिलाफ दायर याचिका सुप्रीम कोर्ट ने मंजूर कर ली है। इस पर 19 नवंबर को सुनवाई होगी। गोधराकांड के बाद अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसायटी में भी हिंसा हुई थी। इसमें कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी की मौत हो गई थी। उनकी पत्नी जकिया जाफरी ने अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।

साबरमती ट्रेन के कोच में आगजनी के बाद भड़के थे दंगे

27 फरवरी 2002 को गोधरा में साबरमती ट्रेन के कोच में आग लगा दी गई थी। इसमें 59 लोगों की मौत हो गई थी। मारे गए ज्यादातर लोग अयोध्या से लौट रहे कारसेवक थे। इस घटना के बाद गुजरात में दंगे भड़क गए थे। इनमें करीब 1000 लोगों की जान चली गई थी।

गोधराकांड के अगले दिन 28 फरवरी 2002 को अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसायटी में दंगाइयों ने कांग्रेस सांसद जाफरी समेत 69 लोगों की हत्या कर दी थी। घटना के बाद सोसायटी से 39 लोगों के शव मिले थे। बाकी 30 लोगों के शव नहीं मिलने पर 7 साल बाद उन्हें मृत मान लिया गया था।

गुलबर्ग सोसायटी में 28 बंगले और 10 अपार्टमेंट हैं। गुजरात दंगों से जो इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हुए थे, गुलबर्ग सोसायटी उनमें से एक थी। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी ने गुलबर्ग सोसायटी केस की दोबारा जांच की थी। एसआइटी ने इस मामले में 66 लोगों को गिरफ्तार किया था। 

जकिया जाफरी का आरोप है कि दंगा भड़कने के दौरान उनके पति वरिष्ठ नेताओं और पुलिस अफसरों को फोन करते रहे, लेकिन गुलबर्ग साेसायटी तक मदद नहीं पहुंची और दंगाइयों को रोका नहीं जा सका।

दंगों के वक्त मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। एसआईटी ने 8 फरवरी 2012 को क्लोजर रिपोर्ट दायर की। इसमें नरेंद्र मोदी और अन्य अफसरों को क्लीन चिट दी गई। इसके खिलाफ जकिया जाफरी की याचिका को दिसंबर 2013 में मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की कोर्ट और 2017 में गुजरात हाईकोर्ट ने ठुकरा दिया था।

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