अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए बैठक में खुद शामिल हुए PM मोदी, दिया बड़े कदम उठाने का आदेश

अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए बैठक में खुद शामिल हुए PM मोदी, दिया बड़े कदम उठाने का आदेश

मीडियावाला.इन।

प्रधानमंत्री ने वित्त मंत्री से शेयर बाजार में आई गिरावट, आर्थिक धीमेपन और ऑटो सेक्टर्स में फिर से जान फूंकने के लिए इनकी समीक्षा कर ठोस कदम उठाने को कहा है.

देश की अर्थव्यवस्था (Indian Economy) को पटरी पर लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने इसको लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) के साथ हाई लेवल मीटिंग की है. CNBC TV18 को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, गुरुवार को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण और वित्त मंत्रालय के बड़े अधिकारियों के साथ अर्थव्यवस्था की हालत और उसे सुधारने के लिए बड़े कदम उठाने को कहा है. प्रधानमंत्री ने वित्त मंत्री से शेयर बाजार में आई गिरावट, आर्थिक धीमेपन और ऑटो सेक्टर्स में फिर से जान फूंकने के लिए इनकी समीक्षा कर ठोस कदम उठाने को कहा है.

बड़े कदम उठाने की तैयारी- देश के विभिन्न सेक्टर्स में आर्थिक धीमापन है इससे देश की आर्थिक विकास दर घट गई है. देश की अर्थव्यवस्था को फिर से गति देने के लिए सरकार की तरफ से ठोस कदम जल्द उठाए जा सकते हैं, इसको लेकर पहले भी कई संकेत मिल चुके हैं.

इस बैठक में वित्त मंत्री ने प्रधानमंत्री को सभी सेक्टर्स से जुड़ी परेशानियों के बारे में बताया है. वित्त मंत्री ने बताय कि ऑटो और रियल्टी सेकटर्स में सेल्स गिरने और इनवेंट्री बढ़ने से दिक्कते बढ़ी है.

वहीं, उन्होंने शेयर बाजार की गिरावट पर एफपीआई (विदेशी निवेशक) की चिंताओं के बारे में बताया. विदेशी निवेशक सरचार्ज की वजह से भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली कर रहे हैं. >> सूत्रों की मानें तो वित्त मंत्रालय, देश की इंडस्ट्रीज के लिए एक प्रोत्साहन पैकेज पर काम कर रहा है, जिसमें कर कटौती, सब्सिडी और अन्य प्रोत्साहन समेत कई वित्तीय कदम उठाए जाएंगे.

>> सूत्रों ने बताया कि इस पैकेज का लक्ष्य ना सिर्फ उद्योगों की लागत घटाना है, बल्कि ऐसे उपाय भी करने है, जिससे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा मिले.

ऑटो सेक्टर्स के हालात बेहद खराब-ऑटो इंडस्ट्री में लगातार 9वें महीने गिरावट दर्ज की गई है. ब्रिकी के लिहाज़ से जुलाई का महीना बीते 18 साल में सबसे ख़राब रहा. इस दौरान बिक्री में 31% की गिरावट दर्ज की गई. सोसाइटी ऑफ़ इंडियन ऑटोमोबिल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के मुताबिक़ जुलाई में बीते 9 महीनों के दौरान सबसे कम 2,00,790 वाहनों की बिक्री ही हुई. इसके मुताबिक़ स्पोर्ट्स यूटिलिटी वीकल की बिक्री में 15% तो सवारी कार में 36% की गिरावट दर्ज की गई है.

सियाम के महानिदेशक विष्णु माथुर कहते हैं कि इस इंडस्ट्री को तुरंत एक राहत पैकेज की ज़रूरत है. उनका कहना है कि जीएसटी की दरों में अस्थायी कटौती से भी इंडस्ट्री को कुछ राहत मिल सकती है. माथुर कहते हैं, ऑटो इंडस्ट्री की स्थिति और बिगड़ने से रोकने के लिए उद्योग प्रतिनिधियों की सरकार के साथ हाल ही में बातचीत हुई है. हमने राहत पैकेज की मांग की.

गाड़ियों पर जीएसटी की दर घटाने, स्क्रैपेज पॉलिसी लाने और वित्तीय क्षेत्र- ख़ासकर ग़ैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों- को मज़बूत करने की मांग की है.दूसरी ओर फेडरेशन ऑफ़ ऑटोमोबिल डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) के मुताबिक़, इस मंदी की वजह से बीते तीन महीने में दो लाख लोगों का रोज़गार छिन गया है.

बीते एक वर्ष के दौरान एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत में गाड़ियों की ख़रीद में भारी कमी आई है, इसकी वजह ग़ैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में क्रेडिट की कमी का होना बताया गया है.

Dailyhunt

0 comments      

Add Comment