Corona: 21 दिनों के लिए देश में रहेगा लॉकडाउन, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा घर से निकलना भूल जाइए

Corona: 21 दिनों के लिए देश में रहेगा लॉकडाउन, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा घर से निकलना भूल जाइए

मीडियावाला.इन।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इससे पहले बीते शुक्रवार को देश को संबोधित किया था, जिसमें उन्होंने 22 मार्च को पूरे देश में जनता कर्फ्यू की अपील की थी. कोरोनावायरस से जूझ रहे भारत में उनका एक हफ़्ते के भीतर ये दूसरा संबोधन है. मोदी क्या कह रहे हैं, पढ़िए पूरा भाषण.

नमस्कार. मेरे प्यारे देशवासियों

मैं एक बार फिर कोरोना वैश्विक महामारी पर बात करने के लिए आपके बीच आया हूं. 22 मार्च को जनता कर्फ्यू का जो संकल्प हमने लिया था. एक राष्ट्र के नाते उसकी सिद्धि के लिए हर भारतवासी ने पूरी संवेदनशीलता के साथ, पूरी ज़िम्मेदारी के साथ, अपना योगदान दिया.

बच्चे, बुज़ुर्ग, छोटे-बड़े, ग़रीब-मध्यम हर वर्ग के लोग, हर कोई परीक्षा की इस घड़ी में साथ आया. जनता कर्फ्यू को हर भारतवासी ने सफल बनाया. एक दिन के जनता कर्फ्यू से भारत ने दिखा दिया कि जब देश पर संकट आता है, जब मानवता पर संकट आता है तो किस प्रकार से हम सभी भारतीय मिलकर के, एकजुट होकर उसका मुक़ाबला करते हैं. आप सभी जनता कर्फ्यू के लिए, उसकी सफलता के लिए प्रशंसा के पात्र हैं.

साथियों,

कोरोना वैश्विक महामारी, उस पर पूरी दुनिया की स्थिति को समाचारों के माध्यम से सुन भी रहे हैं और देख भी रहे हैं. आप ये भी देख रहे हैं कि दुनिया के समर्थ से समर्थ देशों को भी कैसे इस महामारी ने बिल्कुल बेबस कर दिया है. ऐसा नहीं है कि ये देश प्रयास नहीं कर रहे हैं या उनके पास संसाधनों की कमी हैं. लेकिन, कोरोनावायरस इतनी तेज़ी से फैल रहा है कि तमाम तैयारियां और प्रयासों के बावजूद इन देशों में चुनौती बढ़ती ही जा रही है.

इन सभी देशों के दो महीनों के अध्ययन से जो निष्कर्ष निकल रहा है और एक्सपर्ट्स भी यही कह रहे हैं कि इस वैश्विक महामारी कोरोना से प्रभावी मुक़ाबले के लिए एक मात्र विकल्प है सोशल डिस्टेंशिंग. सोशल डिस्टेंशिंग यानी एक-दूसरे से दूर रहना. अपने घरों में ही बंद रहना. कोरोना से बचने का इसके अलावा कोई तरीक़ा नहीं है. कोई रास्ता नहीं है.

कोरोना को फैलने से रोकना है तो उसके संक्रमण की जो साइकिल है, उस साइकिल को तोड़ना ही होगा. कुछ लोग इस ग़लतफ़हमी में हैं कि सोशल डिस्टेंशिंग केवल मरीज़ के लिए, बीमार लोगों के लिए आवश्यक है, ये सोचना सही नहीं. सोशल डिस्टेंशिंग हर नागरिक, हर परिवार के लिए है, परिवार के हर सदस्य के लिए है. प्रधानमंत्री के लिए भी है.

कुछ लोगों की लापरवाही, कुछ लोगों की ग़लत सोच आपको, आपके बच्चों को, आपके माता-पिता को, आपके परिवार को, आपके दोस्तों को और आगे करके पूरे देश को बहुत बड़ी मुश्किल में झोंक देंगी. अगर ऐसी लापरवाही जारी रही तो भारत को इसकी बहुत बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ सकती है और ये क़ीमत कितनी चुकानी पड़ेगी, इसका अंदाज़ा लगा पाना भी मुश्किल है.

साथियों,

पिछले दो दिनों से देश के अनेक भागों में लॉकडाउन कर दिया गया है. राज्य सरकार के इन प्रयासों को बहुत गंभीरता से लेना चाहिए. हेल्थ सेक्टर के एक्सपर्ट्स और अन्य देशों के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए देश आज एक महत्वपूर्ण निर्णय करने जा रहा है. आज रात, आज रात 12 बजे से पूरे देश में, ध्यान से सुनिए, पूरे देश में आज रात 12 बजे से संपूर्ण देश में, संपूर्ण लॉकडाउन होने जा रहा है.

हिंदुस्तान को बचाने के लिए, हिंदुस्तान के हर नागरिक को बचाने के लिए, आपको बचाने के लिए, आपके परिवार को बचाने के लिए, आज रात 12 बजे से घरों से बाहर निकलने पर पूरी तरह पाबंदी लगाई जा रही है. देश के हर राज्य को, हर केंद्रशासित प्रदेश को, हर ज़िले, हर क़स्बे, हर गांव, हर गली-मोहल्ले को अब लॉकडाउन किया जा रहा है. एक तरह से कर्फ्यू ही है.

जनता कर्फ्यू से भी कुछ कदम आगे की बात. जनता कर्फ्यू से ज़रा ज़्यादा सख़्त. कोरोना महामारी के ख़िलाफ़ निर्णायक लड़ाई के लिए अब ये कदम अब बहुत आवश्यक है.

निश्चित तौर पर इन लॉकडाउन की एक आर्थिक क़ीमत देश को उठानी पड़ेगी. लेकिन, एक-एक भारतीय के जीवन को बचाना, आपके जीवन को बचाना, आपके परिवार को बचाना, इस समय मेरी, भारत सरकार की, देश के हर राज्य सरकार की, हर स्थानीय निकाय की सबसे बड़ी प्राथमिकता है. इसलिए, मेरी आपसे प्रार्थना है और मैं हाथ जोड़कर प्रार्थना कर रहा हूं कि आप इस समय देश में जहां भी हैं, वहीं रहें. अभी के हालात को देखते हुए देश में ये लॉकडाउन 21 दिन का होगा, 3 सप्ताह का होगा.

जब पिछली बार मैंने आपसे बात की थी तो मैंने आपसे कहा था कि मैं आपसे कुछ सप्ताह मांगने के लिए आया हूं. आने वाले 21 दिन हर नागरिक के लिए, हर परिवार के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो कोरोनावायरस की संक्रमण साइकिल तोड़ने के लिए कम से कम 21 दिन का समय बहुत अहम है.

अगर ये 21 दिन नहीं संभले तो देश और आपका परिवार 21 साल पीछे चला जाएगा. अगर ये 21 दिन नहीं संभले तो कई परिवार हमेशा-हमेशा के लिए तबाह हो जाएंगे और मैं ये बात एक प्रधानमंत्री के तौर पर नहीं, आपके परिवार के सदस्य के नाते कह रहा हूं.

इसलिए, बाहर निकलना क्या होता है, ये इन 21 दिनों के लिए भूल जाइए. घर में रहें, घर में रहें और एक ही काम करें कि अपने घर में ही रहें.

साथियों,

आज के फैसले ने देशव्यापी लॉकडाउन ने आपके घर के दरवाज़े पर एक लक्ष्मण रेखा खींच दी है. आपको ये याद रखना है कि घर से बाहर पड़ने वाला आपका सिर्फ़ एक कदम, आपका सिर्फ़ एक कदम कोरोना जैसी गंभीर महामारी को आपके घर में ले आ सकता है. आपको ये याद रखना है कि कई बार कोरोना से संक्रमित व्यक्ति शुरुआत में बिल्कुल स्वस्थ लगता है. वो संक्रमित है इसका पता ही नहीं चलता और इसलिए एहतियात बरतिए. अपने घरों में रहिए.

वैसे, जो लोग घर में हैं वो सोशल मीडिया पर नए-नए तरीक़ों से बहुत इनोवेटिव तरीक़े से इस बात को बता रहे हैं. एक बैनर, जो मुझे भी पसंद आया, मैं आपको भी, ये बहुत कम शब्दों में संदेश दिखाना चाहता हूं. (बैनर पर लिखा है को= कोई, रो= रोड पर, ना= ना निकलें)

कोरोना यानी कोई रोड पर ना निकलें.

साथियों,

एक्सपर्ट्स का ये भी कहना है कि आज अगर किसी व्यक्ति में कोरोनावायरस पहुंचता है तो उसके शरीर में इसके लक्षण दिखने में कई-कई दिन लग जाते हैं. इस दौरान वो जाने-्अनजाने हर उस व्यक्ति को संक्रमित कर देता है, जो उसके संपर्क में आता है.

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइज़ेशन (WHO) की रिपोर्ट बताती है कि इस महामारी से संक्रमित एक व्यक्ति, सुनिए, सिर्फ़ हफ़्ते- दस दिन में सैकड़ों लोगों तक इस बीमारी को पहुंचा सकता है. यानी ये आग की तरह तेज़ी से फैलता है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइज़ेशन का ही एक और आंकड़ा बहुत महत्वपूर्ण है.

साथियों, दुनिया में कोरोनावायरस से संक्रमित व्यक्ति की संख्या को पहले एक लाख तक पहुंचने में 67 दिन लग गए थे. यानी 1 लाख तक पहुंचने में 67 दिन. उसके बाद सिर्फ़ 11 दिन में ही 1 लाख नए लोग संक्रमित हो गए. यानी 2 लाख हो गए.

सोचिए, एक लाख लोग संक्रमित होने में 67 दिन लगे, फिर इसे 2 लाख तक पहुंचने में 11 दिन लगे. ये और भी भयावह है कि 2 लाख से 3 लाख लोगों तक ये बीमारी पहुंचने में सिर्फ़ 4 दिन लगे. आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि कोरोनावायरस कितनी तेज़ी से फैलता है.

और जब ये फैलना शुरू करता है तो इसे रोकना बहुत मुश्किल होता है.

साथियों,

यही वजह है कि चीन, अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, इटली, ईरान जैसे अनेक देशों में जब कोरोनावायरस ने फैलना शुरू किया तो हालात बेक़ाबू हो गए. और ये भी याद रखिए इटली हो या अमेरिका, इन देशों की स्वास्थ्य सेवा, उनके हॉस्पिटल, उनके यहां आधुनिक संसाधन, पूरी दुनिया में बेहतरीन है. उनकी व्यवस्था बेहतरीन मानी जाती है, बावजूद इसके ये देश कोरोना का प्रभाव कम नहीं कर पाए.

सवाल ये कि स्थिति में उम्मीद की किरण कहां है? उपाय क्या है? विकल्प क्या है?

साथियों, कोरोना से निपटने से उम्मीद की किरण उन देशों से मिले अनुभव हैं जो कोरोना को कुछ हद तक नियंत्रित कर पाए. हफ़्तों तक इन देशों के नागरिक घरों से बाहर नहीं निकले. इन देशों के नागरिकों ने 100 प्रतिशत सरकारी निर्देशों का पालन किया और इसलिए ये कुछ देश अब इस महामारी से बाहर आने की ओर बढ़ रहे हैं. हमें भी ये मानकर चलना चाहिए कि हमारे सामने सिर्फ़ और सिर्फ़ यही एक मार्ग है.

हमें घर से बाहर नहीं निकलना है. चाहे जो हो जाए. घर में ही रहना है. सोशल डिस्टेंशिंग प्रधानमंत्री से लेकर गांव के छोटे से नागरिक तक सबके लिए.

कोरोना से तभी बचा जा सकता है जब घर की लक्ष्मण रेखा न लांघी जाए. हमें इस महामारी के वायरस का संक्रमण रोकना है. इसके फैलने के चेन को तोड़ना है.

साथियों, भारत आज उस स्टेज पर है जहां हमारे आज के एक्शन तय करेंगे कि इस बड़ी आपदा के प्रभाव को हम कितना कम कर सकते हैं. ये समय हमारे संकल्प को बार-बार मज़बूत करने का है. ये समय कदम-कदम पर संयम बरतने का है. आपको याद रखना है जान है तो जहान है.

साथियों,

ये धैर्य और अनुशासन की घड़ी है. जब तक देश में लॉकडाउन की स्थिति है, हमें अपना संकल्प निभाना है. अपना वचन निभाना है. मेरी आपसे हाथ जोड़कर के प्रार्थना है कि घरों में रहते हुए आप उन लोगों के बारे में सोचिए, उनके लिए मंगलकामना कीजिए, जो अपना कर्तव्य निभाने के लिए ख़ुद को ख़तरे में डालकर काम कर रहे हैं.

उन डॉक्टर्स, उन नर्सेस, पैरामेडिकल स्टाफ़, पैथोलॉजिस्ट उनके बारे में सोचिए जो इस महामारी से एक-एक जीवन को बचाने के लिए दिन-रात अस्पताल में काम कर रहे हैं. अस्पताल प्रशासन के लोग, एंबुलेंस चलाने वाले ड्राइवर, वॉर्ड बॉयज और उन सफाई कर्मचारियों के बारे में सोचिए जो इन कठिन समय में दूसरों की सेवा कर रहे हैं.

आप उन लोगों के लिए प्रार्थना कीजिए, जो आपकी सोसाइटी, आपके पार्कों, आपके मोहल्लों, सार्वजनिक स्थानों को सैनीटाइज़ करने के काम में जुटे हैं, जिसमें और जिसके कारण इस वायरस का नामों-निशान न रहें.

आपको सही जानकारी देने के लिए 24 घंटे काम कर रहे मीडिया के लोगों के बारे में भी सोचिए, जो संक्रमण का ख़तरा उठाकर सड़कों पर, अस्पतालों में हैं. आप अपने आस-पास के पुलिसकर्मियों के बारे में सोचिए जो अपने घर और परिवार की चिंता किए बिना आपको बचाने के लिए, आपके परिवार को बचाने के लिए दिन-रात ड्यूटी कर रहे हैं और कई बार कुछ लोगों के ग़ुस्ताख़ी के भी शिकार हो जा रहे हैं, ग़ुस्सा भी झेल रहे हैं.

साथियों,

कोरोना वैश्विक महामारी से बनी स्थिति के बीच केंद्र और देश भर की राज्य सरकारें तेज़ी से काम कर रही हैं. रोज़मर्रा की ज़िंदगी में लोगों को असुविधा न हो, इसके लिए निरंतर कोशिश कर रही है. सभी आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई बनी रहे, इसके लिए सभी उपाय किए गए हैं और आगे भी किए जाएंगे. निश्चित तौर पर संकट की ये घड़ी, ग़रीबों के लिए भी बहुत मुश्किल वक़्त लेकर आई है.

केंद्र सरकार राज्य सरकारों के साथ समाज के अन्य संगठन, सिविल सोसाइटी के लोग, ग़रीबों को मुसीबत कम हो इसके लिए निरंतर जुटे हुए हैं. ग़रीबों की मदद के लिए अनकों लोग साथ आ रहे हैं .

Asia Ville via Dailyhunt

RB

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