तो क्या अब केंद्र सरकार घटा रही है एलपीजी रसोई गैस सिलेंडर सब्सिडी, जानिए पूरा मामला

तो क्या अब केंद्र सरकार घटा रही है एलपीजी रसोई गैस सिलेंडर सब्सिडी, जानिए पूरा मामला

मीडियावाला.इन।

LPG Gas Subsidy: अप्रैल 2020 में एक घरेलू गैस सिलेंडर 785.50 रुपए में मिला करता था और बैंक खाते में 199.10 रुपए सब्सिडी आती थी. लेकिन अब सब्सिडी 40.10 रुपए आ रही है.

कोरोना काल में आम आदमी को हर तरफ से दोहरी मार झेलनी पड़ रही है. एक तरफ सब्जियों और पेट्रोल के दाम हर दिन बढ़ते जा रहे हैं, दूसरी तरफ सरकार की तरफ से आम लोगों को जो सुविधाएं दी जा रही हैं, उसमें कटौती देखी जा रही है. मिसाल के तौर पर अप्रैल 2020 में एक घरेलू गैस सिलेंडर 785.50 रुपए में मिला करता था और इस पर बैंक खाते में 199.10 रुपए सब्सिडी आती थी. लेकिन अब यह 40 रुपए 10 पैसे आ रही है. इससे यह सवाल उठ रहा है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि धीरे-धीरे सरकार की तरफ से सब्सिडी उठाई जा रही है?

क्या गैस सब्सिडी कम कर रही है सरकार- कई मीडिया रिपोर्ट्स में घरेलू सिलेंडरों में सब्सिडी हटाने की एक वजह बढ़ती कालाबाजारी को माना जा रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक,  आमतौर पर एक साल में 4 लोगों के एक परिवार में सब्सिडी वाले 6-7 से ज्यादा सिलेंडरों की ज़रूरत नहीं पड़ती है. जबकि एलपीजी उपभोक्ताओं को सब्सिडी पर एक साल में 12 सिलेंडर उपलब्ध कराये जाते हैं. कुछ लोग बाकी सिलेंडरों को ब्लैक में बेच दिया करते हैं. इसे रोकने के लिए ही सब्सिडी वापस ले ली गई है.

‘सरकार की तरफ से सब्सिडी नहीं हटाई गई’ जब यह सवाल tv9 हिंदी की तरफ से हमने एनर्जी एक्सपर्ट और भाजपा के सीनियर लीडर नरेंद्र तनेजा से पूछा तो उन्होंने कहा, “सरकार ने नीतिगत रूप से ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया है. अगर कुछ लोगों के खाते में सब्सिडी की रकम कम आ रही है तो उसकी वजह गैस कंपनी और ग्राहकों के बीच के हिसाब में उतार-चढ़ाव हो सकता है.

जैसे- अगर पहले कभी किसी कंपनी ने अपने उपभोक्ता के खाते में ज्यादा रकम ट्रांसफर कर दिया हो तो वो अगली बार कंपनी की तरफ से उपभोक्ता के खाते में कम रकम डाल सकती है. इसमें सरकार का कोई लेना-देना नहीं है.

कालाबाजारी के सवाल पर उनका कहना है कि अगर अपवाद के रूप में कहीं थोड़ी-बहुत कालाबाजारी हो रही है तो उसके लिए सब्सिडी हटाने जैसा फैसला नहीं लिया जा सकता है. कालाबाजारी कोई ट्रेंड नहीं है. इक्का-दुक्का लोग ऐसा कर सकते हैं.

सब्सिडी नहीं हटी तो मांग क्यों घटी?

एक मार्केट रिपोर्ट से यह पता चला है कि पिछले कुछ महीनों में घरेलू सिलेंडर की मांग घट गई है जबकि मार्केटिंग रेट में मिलने वाले सिलेंडर की मांग में इजाफा हुआ है. इसकी वजह है सब्सिडी और गैर सब्सिडी वाले सिलेंडरों की कीमतों में अंतर खत्म हो जाना.

एक रिपोर्ट के अनुसार कई शहरों में घरेलू गैस सिलेंडरों की मांग 20 फीसदी कम दर्ज की गई है. इस मांग को काफी हद तक कमर्शियल सिलेंडर ने पूरा करने का काम किया है.

मार्केट रेट में मिलने वाला सिलेंडर ब्लैक में मिलने वाले घरेलू सिलेंडरों के मुकाबले कई बार सस्ता पड़ रहा है. इसलिए यह भी देखा जा रहा है कि ग्राहक ज्यादा भाव देकर ब्लैक में सिलेंडर खरीदने की बजाए कमर्शियल खरीदना ठीक समझ रहे हैं.

क्या सरकार सब्सिडी खत्म कर रही है?

पहला सवाल यह कि क्या सरकार सब्सिडी खत्म कर रही है? लेकिन जवाब है, ऐसा कोई नीतिगत निर्णय नहीं. फिर सवाल यह कि लोगों के खाते में सब्सिडी के पैसे क्यों कम होते जा रहे हैं? तो जवाब यह कि कंपनी और कंज्यूमर्स के बीच का प्रश्न है.

फिर सवाल यह है कि कालाबाजारी रोकने के लिए तो सब्सिडी कम नहीं की गई? इस पर जवाब यह कि कालाबाजारी कोई बड़े पैमान पर नहीं हो रही. इसलिए इस आधार पर कोई फैसला नहीं लिया गया है.

फिर सवाल यह कि क्या वजह है कि लोगों ने घरेलू गैस सिलेंडर लेना कम कर दिया है? क्या उन्हें ओपन मार्केट में उतने ही दाम में कमर्शियल सिलेंडर मिल रहे हैं? इसका जवाब नहीं है. वजह चाहे जो हो, पर इतना तय है कि ऐसे लोगों की तादाद काफी है जिनके खाते में सब्सिडी के पैसे कम आ रहे हैं.

TV9hindi

RB

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