भविष्य में नक्सलियों को पैर जमाने का कोई मौका फिर से न मिले…

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भविष्य में नक्सलियों को पैर जमाने का कोई मौका फिर से न मिले…

कौशल किशोर चतुर्वेदी

मध्यप्रदेश सरकार ने 9 फरवरी 2026 को बालाघाट में उन वीर जवानों का अभिनंदन किया, जिनकी वीरता और अदम्य साहस से मध्य प्रदेश को नक्सलमुक्त करने में बड़ी सफलता मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ऐसे 60 जांबाज जवानों को क्रम से पूर्व पदोन्नति देकर कर्त्तव्य परायणता का परिचय दिया है। पर इस पूरे मामले में जन-जन के मन में जो सवाल पैदा हो रहा है, वह यही है कि अब मध्य प्रदेश में नक्सली दोबारा अपने पैर तो नहीं पसार पाएंगे। तो इससे भी अच्छी बात यह है कि सरकार खुद भी इस दिशा में तैयारी कर रही है। जैसा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भविष्य में नक्सलियों को अपने पैर जमाने का कोई मौका फिर से न मिले, इसके लिए राज्य सरकार हर तरह से समुचित प्रबंध कर रही है। बालाघाट जिले में नक्सल प्रभावित 250 स्कूलों का नवीनीकरण किया गया है। स्थानीय नागरिकों के लिए एकल सुविधा केंद्र, जनजातीय समुदायों को वन अधिकार पट्टे, जाति प्रमाण पत्र और रोजगार के लिए शिविरों की शुरुआत की गई है। यह वर्ष कृषि कल्याण के लिए है। अब महाकौशल के बालाघाट में कृषि कैबिनेट आयोजित की जाएगी। नक्सल समस्या के निपटारे के साथ हमने पूर्व मंत्री स्व. लिखीराम कावरे की हत्या का बदला लिया है। बालाघाट में ‘अमर जवान ज्योति’ नक्सल मुक्त अभियान का स्मारक बनेगा। निश्चित तौर से सरकार के ऐसे सतत प्रयास ही बालाघाट और मध्य प्रदेश को नक्सल मुक्त रहने में प्रभावशाली साबित होंगे।

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सबसे पहले हम उन 60 वीर जवानों की बात करते हैं, जिन्हें उनकी वीरता के लिए पदोन्नति प्रदान की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बालाघाट में आयोजित कार्यक्रम में नक्सल मुठभेड़ में अदम्य साहस और वीरता का परिचय देने वाले 60 जांबाज जवानों को क्रम से पूर्व पदोन्नति प्रदान की। पदोन्नति पाने वाले जवानों में उप निरीक्षक से निरीक्षक के पद पर विपिन चंद्र खलको, इंदर सिंह विदूरी, शुभम प्रताप सिंह तोमर, रत्नेश मीणा, नवदेश श्रीवास्तव को, सहायक उप निरीक्षक से उप निरीक्षक मुनेन्द्र सिंह को, प्रधान आरक्षक से सहायक उप निरीक्षक के पद पर रूद्रीचंद जखमोला,अनिल सिंह भदौरिया, मत्ते सिंह मरावी, उज्जवल घोरमारे, मनोज कुमार यादव,देवेन्द्रे धुर्वे, रवेन्द्र कुशवाह, हरेन्द्र सिंह, प्रदीप गोसाई, विनोद कुमार मर्सकोले, उमेश कुमार पटेल, विकास कुमार राजपूत, मुकेश सगर, विवेक परस्ते, राघवेन्द्र सिंह गुर्जर, आशीष रजक, शिवहरी मरावी, प्रवीण धुर्वे, टीकाराम ढकाल, प्रवीण कुमार, असित यादव, रामआशीष यादव, संदीप शर्मा, लोकपाल धाकड़, कृष्णा श्रेष्ठ, जितेन्द्र सिंह पटेल और वीर सिंह को पदोन्नत किया गया। शकरचंद सरयाम, सुनील परियार, चन्द्रकांत पांडेय, सत्यम द्ववेदी, सुनील यादव, देवराज कलमें, सुरेन्द्र सिंह मार्को, सुशील उईके, रामलाल भील, उमेश चन्द्र दुबे, संतोष कुमार मरावी, प्रदीप कुमार परते, राजा मालवीय, विशाल कुमार सिंह, दीपक पवार, कन्हैया मरकाम, सुनील सिंह कुशवाह, मुलायम सिंह, वरूण देव सिंह चाहर, मुनीष कुमार द्विवेदी, नीलेश, महेन्द्र सिंह, रवि कुमार यादव, छठु यादव, सलेश कुमार द्विवेदी, संजू शर्मा एवं जिला पुलिस बल के नरेन्द्र सोनवे को भी आरक्षक से प्रधान आरक्षक के पद पर पदोन्नत किया गया है। इन नामों का उल्लेख इसलिए आवश्यक है क्योंकि

इन्होंने वास्तव में खाकी को सम्मानित किया है। इन नामों का उल्लेख इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि नक्सलमुक्त जिलों में काम कर रहे खाकीधारी जवानों अफसरों को इनकी वीरता से सीख लेकर कम से कम जनसेवा का उत्कृष्ट उदाहरण तो पेश करना ही चाहिए। और नक्सल मुक्त मध्यप्रदेश को साकार करने में अपना बलिदान देने वाले वह 38 पुलिस अफसर और जवान आदर्श हैं, जिनसे सीख लेकर पूरे पुलिस बल को कम से कम ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने की शपथ भी लेनी चाहिए। कुछ महीने पहले हुए इंस्पेक्टर आशीष शर्मा के बलिदान को हम सभी अभी भी नहीं भूल पाए हैं। नक्सल क्षेत्र में तैनात पुलिस बल वास्तव में कितनी कठिन चुनौतियों से गुजरता है, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है। जैसा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह खेद का विषय है कि बालाघाट में पूर्व में तत्कालीन सरकार के मंत्री लिखीराम कावरे की सरेआम हत्या कर दी गई थी। हमारे लिए यह बड़ी चुनौती थी, क्योंकि मध्यप्रदेश की 836 किलोमीटर लंबी सीमा छत्तीसगढ़ से लगती है। मध्यप्रदेश ने 38 पुलिस जवान और 27 आम नागरिक को खोया है। बाबा महाकाल के आशीर्वाद से राज्य सरकार ने नक्सलवादियों को जड़ से खत्म करने में सफलता प्राप्त की है। सघन जंगल के चुनौतीपूर्ण वातावरण में भी हॉक फोर्स ने मेगाकासो रणनीति बनाकर नक्सलियों को खदेड़ा और 4 दुर्दांत नक्सलियों को मार गिराया। पिछले वर्ष की तुलना में 23 प्रतिशत अधिक 4104 नक्सल विरोधी अभियान, मानसून और जंगली जानवरों की चुनौतियों के बावजूद भी जारी रहे। हमारी फोर्स ने वर्ष 2025 में अब तक के 10 सर्वाधिक हार्ड कोर नक्सलियों को ढेर किया है। नक्सलियों से कहा गया था कि सरेंडर करो या मारे जाओगे, राज्य सरकार की इस चेतावनी को वीर जवानों ने सार्थक कर दिखाया।

 

एडीजी, नक्सल विरोधी अभियान वेंकटेश्वर राव ने कहा कि देश भक्ति और जनसेवा हमारा संकल्प है। राज्य सरकार ने हॉक फोर्स के लिए 882 पदों को स्वीकृत कराया है। पुलिस अधीक्षक बालाघाट आदित्य मिश्रा ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को आवश्वस्त किया कि जहां बंदूक की गोलियां गूंजती थीं वहां अब रोजगार-विश्वास और शिक्षा का शंखनाद होगा। नक्सल उन्मूलन की लड़ाई में शामिल युवकों को शासकीय नौकरी प्रदान की जा रही है।

तो पूरा मध्य प्रदेश वीर जवानों का सम्मान होने से गौरव से परिपूर्ण है। उम्मीद यही है कि जवानों की वीरता और बलिदान हमें हमेशा गौरवान्वित करते रहेंगे और मध्यप्रदेश नक्सलमुक्त बना रहेगा। वहीं सरकार वह सभी प्रयास करने में कोई चूक नहीं करेगी जिससे भविष्य में नक्सलियों को मध्यप्रदेश में पैर जमाने का कोई मौका फिर से मिल सके…।

 

 

लेखक के बारे में –

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।

वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।