New Twist in Indore Honeytrap Case: हाई प्रोफाइल मामले में इति तिवारी ने इंदौर पुलिस के सामने किया आत्मसमर्पण

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New Twist in Indore Honeytrap Case: हाई प्रोफाइल मामले में इति तिवारी ने इंदौर पुलिस के सामने किया आत्मसमर्पण

इंदौर: इंदौर के चर्चित शराब कारोबारी और पब संचालक भूपेंद्र रघुवंशी की आत्महत्या के मामले में एक नया और महत्वपूर्ण मोड़ आया है। इस मामले में मुंबई की युवती इति तिवारी, जिसका नाम भूपेंद्र के सुसाइड नोट में ब्लैकमेलिंग और मानसिक प्रताड़ना के आरोपों के साथ सामने आया था, ने आज (29 अगस्त 2025) अपने वकील के साथ इंदौर के अन्नपूर्णा थाने में सरेंडर कर दिया है। यह घटनाक्रम इस हाई-प्रोफाइल केस में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है, और पुलिस अब इस मामले की गहन जांच में जुटी है।

*मामले की पृष्ठभूमि* 

भूपेंद्र रघुवंशी, जो इंदौर में शोशा, पिचर्स और स्कल जैसे मशहूर पबों के मालिक थे, ने 26 अगस्त 2025 को अपने घर में जहरीला इंजेक्शन लेकर आत्महत्या कर ली थी। उनकी मृत्यु से पहले लिखे गए पांच पन्नों के सुसाइड नोट में इति तिवारी पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। नोट के अनुसार, इति तिवारी ने भूपेंद्र को रेप केस में फंसाने की धमकी देकर उनसे 25 लाख रुपये ऐंठे थे और इसके अलावा आईफोन, फ्लैट और कार की मांग भी कर रही थी। भूपेंद्र ने यह भी लिखा था कि इति ने उन्हें मानसिक रूप से इस कदर प्रताड़ित किया कि उनके पास आत्महत्या के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा।

सुसाइड नोट में यह भी संकेत था कि इति अकेले नहीं थी और उसके पीछे कुछ अन्य लोग भी हो सकते हैं, जिनका नाम भूपेंद्र स्पष्ट नहीं कर सके। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस तनाव के कारण उन्होंने 15 दिन पहले भी आत्महत्या का प्रयास किया था, लेकिन तब वह बच गए थे।

 *इति तिवारी का सरेंडर और पुलिस की कार्रवाई* 

आज सुबह इति तिवारी ने अपने वकील के साथ अन्नपूर्णा थाने में सरेंडर कर दिया। पुलिस ने भूपेंद्र के सुसाइड नोट और उनके मोबाइल डेटा के आधार पर इति की तलाश तेज कर दी थी, जिसके बाद यह कदम उठाया गया। अन्नपूर्णा थाना प्रभारी अजय नायर और एसीपी शिवेंद्र जोशी के नेतृत्व में पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू की है। इति के सरेंडर के बाद अब पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है ताकि ब्लैकमेलिंग, उकसावे और अन्य आरोपों की सत्यता का पता लगाया जा सके।

पुलिस ने इति तिवारी और उनकी बहन शुभांगी (जिसे कुछ जगहों पर शिवांगी भी कहा गया) के सोशल मीडिया अकाउंट्स और बैंक खातों की जांच शुरू की है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि भूपेंद्र ने इति को कई बार मोटी रकम ट्रांसफर की थी, जिसके सबूत पुलिस ने जुटाए हैं। इसके अलावा, भूपेंद्र के ड्राइवर शुभम और गार्ड सौरभ से पूछताछ में यह बात सामने आई कि इति और भूपेंद्र का रिश्ता लगभग दो साल पुराना था, जो पहले दोस्ती के रूप में शुरू हुआ और बाद में ब्लैकमेलिंग में बदल गया।

*इति तिवारी का बैकग्राउंड* 

इति तिवारी शादीशुदा है और पहले इंदौर के महालक्ष्मी नगर में अपनी बहन शुभांगी के साथ रहती थी। बाद में वह नौकरी के सिलसिले में मुंबई चली गई थी, लेकिन इंदौर में उसका आना-जाना बना रहता था। भूपेंद्र से उसकी मुलाकात उनके शोशा पब में हुई थी, जहां वह अक्सर पार्टियों में शामिल होती थी। सूत्रों के अनुसार, इति शराब और गांजे की आदी थी और भूपेंद्र के पैसे पर वह हाई-प्रोफाइल पार्टियों, लग्जरी लाइफस्टाइल और विदेश यात्राओं का आनंद लेती थी। सुसाइड नोट में भूपेंद्र ने यह भी लिखा था कि इति ने उनकी उदारता का फायदा उठाया और धीरे-धीरे उन्हें ब्लैकमेल करने लगी।

 *पुलिस की जांच के अन्य पहलू* 

पुलिस इस मामले में कई दिशाओं में जांच कर रही है:

बैंक ट्रांजेक्शन: भूपेंद्र के बैंक खातों से इति और उसकी सहेली अरिशा को किए गए पैसे के लेन-देन की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इति ने कितनी रकम ऐंठी और क्या इसमें अन्य लोग भी शामिल थे।

*हनीट्रैप का एंगल:*

सुसाइड नोट में भूपेंद्र ने संकेत दिया था कि इति के पीछे एक बड़ा नेटवर्क हो सकता है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह एक सुनियोजित हनीट्रैप था, जिसमें इति के अलावा अन्य लोग भी शामिल थे।

*मुंबई कनेक्शन:* 

चूंकि इति मुंबई में रहती थी, पुलिस ने वहां की एक टीम को इति की गतिविधियों और संपर्कों की जांच के लिए भेजा है। इसके लिए मुंबई पुलिस से भी सहयोग लिया जा रहा है।

*अन्य गवाहों से पूछताछ:* 

भूपेंद्र के दोस्तों दीपेश और श्रीकांत, जिनका जिक्र सुसाइड नोट में था, से भी पुलिस ने पूछताछ की है। इनके बयानों से पुलिस को कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं।

*भूपेंद्र की पारिवारिक और आर्थिक स्थिति* 

भूपेंद्र रघुवंशी के परिवार में उनकी पत्नी, एक बेटा और एक बेटी हैं। उनकी बेटी, जो यूएस में रहती थी, अंतिम संस्कार के लिए इंदौर लौटी थी। परिवार ने बताया कि भूपेंद्र पिछले कुछ समय से भारी तनाव में थे। उनके तीन पब और एक रेस्तरां बंद हो चुके थे, और कारोबार में घाटे के कारण उन पर भारी कर्ज था। इति की ब्लैकमेलिंग ने उनकी मानसिक स्थिति को और बिगाड़ दिया, जिसके चलते उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया।

 

*सामाजिक और मनोवैज्ञानिक पहलू*

यह मामला न केवल ब्लैकमेलिंग और हनीट्रैप जैसे अपराधों की गंभीरता को उजागर करता है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति समाज की उदासीनता पर भी सवाल उठाता है। भूपेंद्र जैसे सफल कारोबारी का इस तरह का कदम उठाना यह दर्शाता है कि आर्थिक और सामाजिक दबाव व्यक्ति को कितना तोड़ सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर काउंसलिंग और परिवार-दोस्तों का सहयोग ऐसी घटनाओं को रोक सकता है।

 

*आगे की संभावनाएं*

इति तिवारी के सरेंडर के बाद पुलिस की पूछताछ से कई नए खुलासे होने की उम्मीद है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इति ने अकेले यह अपराध किया या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह था। साथ ही, भूपेंद्र के सुसाइड नोट में लगाए गए आरोपों की सत्यता की जांच के लिए फॉरेंसिक और डिजिटल सबूतों का विश्लेषण किया जा रहा है। पुलिस ने यह भी संकेत दिया है कि इस मामले में और लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।

भूपेंद्र रघुवंशी की आत्महत्या का यह मामला इंदौर ही नहीं, पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। इति तिवारी का सरेंडर इस केस में एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन अभी कई सवाल अनुत्तरित हैं। पुलिस की जांच से यह स्पष्ट होगा कि इस दुखद घटना के पीछे की पूरी सच्चाई क्या थी और क्या इति तिवारी अकेले जिम्मेदार थी या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था।