हमीदिया में नवजात शिशुओं को मिलेगा मां का दूध….इस माह से शुरु होगा मिल्क बैंक

जानिए क्या है मदर मिल्क बैंक और क्यों है इसकी जरूरत?

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हमीदिया में नवजात शिशुओं को मिलेगा मां का दूध….इस माह से शुरु होगा मिल्क बैंक

भोपाल। अब उन शिशुओं को मां का दूध भी मिलेगा, जिनकी नवजात शिशुओं की मां को किसी कारणवश दूध नहीं आ रहा है, क्योंकि राजधानी भोपाल स्थित हमीदिया अस्पताल में इसके लिए मिल्क बैंक की शुरूआत की जा रही है।

यहां महिलाएं मां का दूध दान भी कर सकती है, जिसे विभिन्न मशीनों के माध्यम से करीब 6 माह तक ताजा भी रखा जा सकेगा। हालाकि यह सुविधा काटजू अस्पताल में मौजूद है।

0 मिल्क बैंक में अपना दूध दान कर सकेंगी महिलाएं

हमीदिया में मिल्क बैंक की शुरूआत की जाएगी। यह ऐसा बैंक है जहां मां के दूध को स्टोर किया जाता है। बैंक नवजात शिशुओं के लिए मां का दूध मुहैया कराती है। पाश्चराइजेशन यूनिट, रेफ्रिजरेटर, डीप फ्रीज और आरो प्लांट जैसी तकनीक का उपयोग करके दूध को स्टोर करके 6 महीने तक स्टोर करके रखा जाता है। हालांकि, अधिक मांग के कारण इन बैंकों में मां का दूध 10 से 15 दिन तक ही रह पाता है। यहां महिलाएं दूध दान कर सकती है। यही नहीं वे महिलाएं भी दूध दान करती है जो अपने बच्चों को स्तनपान नहीं करवा सकती हैं। इसका उद्देश्य शिशु व मातृ मृत्यु दर में कमी लाना है।

0 क्या है मदर मिल्क बैंक

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार मानव दूध बैंक उन शिशुओं के लिए महत्वपूर्ण है। मानव दूध शिशु मां के दूध के बाद सबसे बेहतर आहार है। मां के दूध में शिशुओं के लिए जरूरी पोषक तत्व और एंटीबॉडी होते हैं। शिशुओं को कम से कम छह महीने तक स्तनपान कराया जाना चाहिए।

0 क्यों है जरूरत

भारत में एक साल में पैदा हुए 2.7 करोड़ बच्चों में से 75 लाख का जन्म के समय कम वजन होता है। 35 लाख बच्चे समय से पहले पैदा होते हैं। नीकू वार्ड में लगभग 30-50 प्रतिशत शिशुओं और विशेष नवजात देखभाल यूनिट में 10-15 प्रतिशत शिशुओं को दान में मिलने वाले मानव दूध की आवश्यकता होती है। समय से पहले जन्मे बच्चे को प्रतिदिन 30 मिलीलीटर दूध की आवश्यकता होती है जबकि एक स्वस्थ बच्चे को 150 मिलीलीटर तक दूध की आवश्यकता होती है।