एशिया की सबसे बड़ी कपड़े की होलसेल मार्केट से गायब हैं मजदूर और कारीगर

एशिया की सबसे बड़ी कपड़े की होलसेल मार्केट से गायब हैं मजदूर और कारीगर

मीडियावाला.इन।

नई दिल्लीः राजधानी दिल्ली में फैक्ट्रियों से मजदूर और काम करने वाले कारीगर गायब हो चुके हैं. दिल्ली में एशिया की सबसे बड़ी कपड़े की मार्केट गांधी नगर की फैक्ट्रियों में अब कोई मजदूर और कारीगर नही हैं. गांधी नगर में छोटी बड़ी सभी फैक्ट्रियां मिलाकर हज़ारों फैक्ट्रियों हैं लेकिन सभी की सभी खाली पड़ी हैं. दिल्ली सरकार ने फैक्ट्री खोलने की इजाजत तो दे दी है लेकिन बिना मजदूरों और कारीगरों के काम कैसे होगा और मजदूर कब वापस लौटेंगे ये सवाल हर किसी के जहन में है.

दिल्ली  में गांधी नगर मार्केट  में  है. ये एशिया की सबसे बड़ी होलसेल कपड़े की मार्केट है. एबीपी न्यूज़ की टीम गांधी नगर की एक फैक्ट्री में पहुँची. गांधी नगर में कपड़ों की फैक्ट्री चलाने वाले संजय कुमार की फैक्ट्री में बच्चों के कपड़े तैयार किए जाते है. संजय के मुताबिक इनकी फैक्टरी में 9 कारीगर काम करते थे अभी सिर्फ एक काम कर रहा है. करीब 58 दिन बाद इन्होंने फैक्ट्री खोली है और लाखों का नुकसान हो चुका है.

संजय ने बताया कि गांधी नगर में हज़ारों फैक्टरियां है जिनमें सिर्फ कपड़ों का काम होता है. और बिना कारीगर और मजदूरों के फैक्ट्री नहीं चलाई जा सकती. क्योंकि फैक्ट्री से जुड़ा हर काम या तो लेबर को करना होता है या कारीगरों को, जैसे इनका रॉ मेटीरियल देश के अलग अलग राज्यों से आता है वो गांधी नगर में बाहर की तरफ उतरता है. ये इलाका इतना भीड़ भाड़ वाला है और यहाँ की गालियां इतनी संकरी है कि माल की गाड़ी अंदर नही आ सकती. लिहाज़ा माल को फैक्ट्री तक लाने के लिए मजदूर की जरूरत होती है. इसके बाद माल जब फैक्ट्री में आता है तब उसकी कटिंग की जाती है. उसके बाद सिलाई होती है. लेकिन ना तो कपड़े की कटिंग करने वाले कारीगर है और ना ही सिलाई करने वाले.

इसके बाद हमारी टीम ने एक दूसरी फैक्ट्री की पड़ताल की. इस फैक्ट्री के मालिक ने बताया की जो भी लेबर काम कर रहे थे वो अब नहीं है. कपड़े के थान अगल अलग कमरों में रखे हुए हैं लेकिन तैयार करने वाला नही है. सिर्फ कुछ ही कारीगर है जो काम कर रहे हैं.

फैक्ट्री के मालिक सतेंद्र जैन की मानें तो ये पूरा सीजन गर्मियों के कपड़ों का था. जो भी आर्डर मिले थे उनमें सब गर्मियों के कपड़े तैयार किए जाने थे लेकिन पहले लॉक डाउन और अब लेबर ना होने के कारण माल तैयार नहीं हो पाएगा. आर्डर कैंसिल हो गए हैं

गांधी नगर की हर फैक्ट्री का अमूमन ये ही हाल है. मजदूर और कारीगर ना होने के चलते करोड़ों का नुकसान हो गया है. इसकी भरपाई होने में अभी काफी समय लगेगा. सबके मन में एक ही सवाल है कि सरकार मजदूरों के जाने का इंतज़ाम तो कर रही है लेकिन वो आएंगे कब और काम कब शुरू होगा. ये कोई नहीं बता रहा. गांधी नगर मार्केट के अध्यक्ष केके बल्ली की माने तो ये वक़्त अभी बुरा है सभी के लिए. इनके मुताबिक करीब 70 प्रतिशत लेबर चली गई वो जबतक वापस नहीं आती है तब तक काम इसी तरह ठप रहेगा.

हर कोई सरकार पर सवाल खड़े कर रहा है क्योंकि सरकार कामगारों का ख्याल ठीक से रख नहीं पाई. ये ही वजह है कि मजदूरों और कामगारों को पलायन करना पड़ा. अब इनकी वापसी कब होगी ये सबसे बड़ा सवाल है.

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