दिल्ली हिंसाः ...जब 'रहमान' ने 'राम' को अकेला छोड़कर घर लौटने से कर दिया मना

दिल्ली हिंसाः ...जब 'रहमान' ने 'राम' को अकेला छोड़कर घर लौटने से कर दिया मना

मीडियावाला.इन।

जब रोम जल रहा था, तो नीरो बांसुरी बजा रहा था. यह कहावत दिल्ली हिंसा के दरम्यान लगभग चरितार्थ होती दिखी. देश की राजधानी दिल्ली जब जल रही थी, तो उस समय हमारे देश के गृह मंत्री जिनके पास दिल्ली के कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी है, वो अहमदाबाद में मेहमाननवाजी कर रहे थे. क्या उनके पास इस बात की सूचना नहीं थी कि दिल्ली के दुश्मनों ने दिल्ली के अमन-चैन में आग लगा दी है. गृह मंत्री के इस रवैये पर कई राजनीतिक दलों ने सवाल खड़ा किया है और कहा है कि दूसरे दल की सरकार अगर रही होती तो अब बीजेपी के लोगों ने पूरी दिल्ली को अपने सिर पर उठा लिया होता.

लोगों की दुकानें जला दी गई, जिससे उनका रोजगार चौपट हो गया. लोगों के घर जला दिए गए, अब उनके पास सिर छिपाने के लिए जगह नहीं है. किसी का बाप हिंसा की भेंट चढ़ गया, तो किसी का बेटा. तबाही का यह मंजर लोगों के समझ में अब आ रहा है. स्कूलों में आग लगा दी गई. एक स्कूल को लॉन्चिंग पैड के तौर पर इस्तेमाल किया गया. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूल की छत पर बकायदा गुलेल चलाने के लिए सिस्टम सेट किया गया था, जहां से पत्थरबाजी की जा रही थी. स्कूल की छत पर रखे ईंट और पत्थर के टुकड़े बोरियों में भरकर लाए गए थे. स्कूल के केयरटेकर को 48 घंटों तक के लिए कैद करके रखा गया था. उसका दर्द अलग है. वह बेचारा अपने दो बच्चों और बीबी के साथ किस तरह से वक्त बिताया. रिपोर्टर्स ने जब उससे बात करने की कोशिश की तो वह केवल रो रहा था.

'द हिंदू' में प्रकाशित खबर के मुताबिक, हिंसा के दौरान जिस तरह से हिंदू-मुस्लिम एकता की मिशाल पेश की गई, वह काबिल-ए-तारीफ थी. कहीं पर राम ने रहीम को बचाया, तो कहीं पर रहमान ने राम को अकेला छोड़कर घर लौटने से ही मना कर दिया. दरअसल, पूर्वोत्तर दिल्ली की श्रीराम कॉलोनी जहां पर मुस्लिम आबादी ज्यादा है. हिंदुओं की संख्या कम है. उसी इलाके में रामबाबू का परिवार वर्षों से रह रहा है. रामबाबू एक फैक्ट्री के मालिक हैं. उनकी फैक्ट्री में रहमान नाम का एक शख्स काम करता है. वह 15 साल से राम बाबू के साथ रहता भी है. वह उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले का रहने वाला है. जब दिल्ली में हिंसा होने लगी तो उसके घर से फोन आया कि वह तुरंत उन्नाव वापस आ जाए, लेकिन उसने साफ तौर पर अपने परिवार वालों को मना कर दिया कि वह राम बाबू को यहां पर अकेला छोड़कर कैसे आ सकता है? वह यह सुनिश्चित करना चाहता है कि जब वह उन्नाव से दूसरी बार वापस आए तो उसे रामबाबू बिल्कुल सही हालत में मिलें.

उसने अपने पिता जी से फोन पर बताया कि यह हम लोग जहां पर रहते हैं, यहां पर मु्स्लिम आबादी ज्यादा है और यहां से कुछ दूरी पर हमला हुआ है. ऐसे में हम इनको यहां पर अकेले नहीं छोड़ सकते हैं. इनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी अब हमारी है. रामबाबू ने बातचीत करते हुए कहा कि हम बहुत दिनों से यहां पर रहते हैं, लेकिन हमको कभी यह महसूस नहीं हुआ कि यहां पर मुस्लिम आबादी ज्यादा होने से हमें किसी तरह की दिक्कत का सामना करना पड़ा हो. यहां के लोग कहते हैं कि रामबाबू आप यहां से जाना मत आपके लिए हम आपनी जान दे देंगे लेकिन आफको कुछ नहीं होने देंगे.

उसके बाद रहमान बोला कि हम इन्हें किसी को छूने तक नहीं देंगे. हम इनके साथ परिवार के एक सदस्य की तरह रहते हैं. रामबाबू की बैग बनाने की एक फैक्ट्री है. उनकी फैक्ट्री में ज्यादातर कामगार मुस्लिम हैं. रहमान कहते हैं कि इस एरिया में कोई इनकी तरफ उंगली तक नहीं उठा सकता है. अगर किसी ने इनको छूने की कोशिश की तो हम अपना जान दे देंगे. रहमान ने कहा कि यहां पर कोई हिंदू-मुसलमान नहीं है. हम सब पहले इंसान हैं और मानवता हमारा धर्म है. बाहर के लोग यहां पर भड़का रहे हैं, लेकिन कोई उनके बहकावे में नीहं आ रहा है. यहां पर सब कुछ ठीकठाक है. अपने मालिक की तरफ देखते हुए रहमान बताते हैं कि मुझे पता है कि अगर मुझे कुछ होता है तो यही हमको अस्पताल पहुंचाकर हमारा इलाज कराएंगे. दूसरा कोई नहीं आने वाला है.

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