चोरी के बच्चे को गोद लेने वाले आरोपी को कोर्ट ने किया बरी, कहा- वारिस की चाहत में हुआ अपराध

चोरी के बच्चे को गोद लेने वाले आरोपी को कोर्ट ने किया बरी, कहा- वारिस की चाहत में हुआ अपराध

मीडियावाला.इन।

एक बहुत ही संवेदनशील मामले में अदालत ने मानवीय रुख अख्तियार करते हुए आरोपी को राहत दी है। इस मामले में एक तरफ जहां आर्थिक रूप से कमजोर एक मां है जिसका चार साल का बच्चा चोरी हो गया था, वहीं दूसरी तरफ एक ऐसा पिता है जिसने अपना एक बेटा गंभीर बीमारी की वजह से खो दिया है। दूसरा बचा बेटा भी उसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है और एम्स के डॉक्टरों ने उसकी आयु दो से तीन साल सुनिश्चित की है।

ऐसे में इस पिता ने चोरी हुए एक बच्चे को अपनी पीढ़ी आगे बढ़ाने के मकसद से गोद ले लिया। लेकिन कुछ दिन बाद ही पुलिस ने दिल्ली में बच्चे चोरी करने वाले एक बड़े रैकेट का खुलासा किया और मुख्य आरोपी की निशानदेही पर इस बच्चे तक पहुंच गई। मामला अदालत में पहुंचा। जहां रोहिणी स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जितेन्द्र कुमार मिश्रा की अदालत ने पूरे मामले को सुना। अदालत ने पाया कि यह बेहद गंभीर होने के साथ ही संवेदनशील मसला है।

यहां अदालत को भी उन सभी की भावनाओं को समझना होगा जो पूरे प्रकरण में शामिल हैं। हालांकि, अदालत ने बच्चा चोरी करने वाले गिरोह के प्रति रोष व्यक्त किया। साथ ही इस गिरोह पर सख्त कार्रवाई के आदेश दिए। लेकिन उस पिता को राहत दी जो अनजाने में अपने घर का वारिस तलाशते हुए इस बच्चे तक पहुंच गया। अदालत ने कहा कि आरोपी का मकसद बच्चे की आड़ में धन का लाभ प्राप्त करना नहीं था, बल्कि उसे अपने घर का वारिस चाहिए था। उससे अनजाने में गलती हुई। ऐसे में इस व्यक्ति को सलाखों के पीछे रखना उचित नहीं है। अदालत ने उसे जेल से रिहा करने का आदेश दिया है।

गोदनामा तैयार कराया था
यह मामला भलस्वा डेयरी इलाके का है। आरोपी की तरफ से अधिवक्ता प्रदीप खत्री ने अदालत को बताया कि उन्होंने बाकायदा वकील के माध्यम से गोदनामा दस्तावेज तैयार करवाए थे। उन्हें गोद देने वाले व्यक्ति ने अपने आप को बच्चे का पिता बताया था। उसका कहना था कि वह बेहद गरीब है और बच्चे का पालन-पोषण नहीं कर सकता। इसलिए बच्चे को गोद दे रहा है। अधिवक्ता ने यह भी बताया कि आरोपी पहले ही अपने एक बेटे को खो चुका है।

दूसरा बेटा भी गंभीर बीमारी का शिकार है। ऐसे में इस व्यक्ति को बस परिवार का वारिस मिलने का लालच आ गया। इतना ही नहीं आरोपी की तरफ से उसके बड़े बेटे की मृत्यु संबंधी दस्तावेज अदालत में पेश किए गए। वहीं दूसरे और इकलौते बचे बेटे के एम्स में उपचार संबंधी दस्तावेज भी अदालत को दिखाए गए।

बच्चा चोरी के गिरोह में डॉक्टर भी था शामिल
इस मामले में चार साल के बच्चे की मां की तरफ से भलस्वा थाने में 31 जनवरी को प्राथमिकी दर्ज कराई गई। इस महिला ने बताया कि वह किराये के मकान में रहती है और दोने बनाने की फैक्ट्ररी में काम करती है। घटना वाले दिन वह 12 साल की बेटी के साथ अपने चार साल के बेटे को छोड़ कर काम पर गई थी। शाम को वापस लौटी तो पाया कि बेटा लापता है। बेटी ने बताया कि भाई गली में खेल रहा था। लेकिन अचानक गायब हो गया। पुलिस ने तफ्तीश के दौरान एक डॉक्टर को गिरफ्तार किया।

इस डॉक्टर के साथ ही कई और लोगों की गिरफ्तारी हुई। पुलिस के मुताबिक यह गिरोह बच्चे चोरी कर उन्हें बेचता था। डॉक्टर अपना क्लीनिक चलाता था। इसी क्लीनिक के माध्यम से वह बच्चों को खरीदने के लिए ग्राहक तैयार करता था। यहीं सौदा भी किया जाता था। डॉक्टर की निशानदेही पर फरवरी में यह बच्चा आरोपी दंपति के घर से बरामद हुआ था।

 Live हिन्दुस्तान

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