हाथरस केस की सीबीआई जांच 10 दिसम्बर तक पूरी होने की सम्भावना, हाईकोर्ट में पेश की स्टेटस रिपोर्ट

हाथरस केस की सीबीआई जांच 10 दिसम्बर तक पूरी होने की सम्भावना, हाईकोर्ट में पेश की स्टेटस रिपोर्ट

मीडियावाला.इन।

हाथरस मामले में बुधवार को हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में सीबीआई ने अब तक की जांच की स्टेटस रिपोर्ट पेश की। सीबीआई ने 10 दिसम्बर तक जांच पूरी होने की उम्मीद जताई है। वहीं राज्य सरकार ने डीएम हाथरस का मजबूती के साथ बचाव करते हुए उन्हें न हटाए जाने पर सफाई पेश की। हालांकि कोर्ट ने इससे असंतुष्टि भी जताई है। कोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित कर लिया है। अगली सुनवाई के लिए 16 दिसम्बर की तिथि तय की है। अगली सुनवाई पर पीड़िता के अंतिम संस्कार के मुद्दे पर प्रस्तावित गाइडलाइन पर और विचार-विमर्श करने का आदेश भी दिया है। 

यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति राजन रॉय की खंडपीठ ने मामले में स्वतः संज्ञान द्वारा ‘गरिमापूर्ण ढंग से अंतिम संस्कार के अधिकार’ टाइटिल से दर्ज जनहित याचिका पर पारित किया। न्यायालय के पूर्व के आदेश के अनुपालन में सीबीआई के अधिवक्ता अनुराग सिंह ने अब तक की जांच की स्टेटस रिपोर्ट पेश की। न्यायालय ने उनसे पूछा कि जांच कब तक पूरी होने की उम्मीद की जा सकती है। इस पर अधिवक्ता का कहना था कि 10 दिसम्बर तक जांच पूरी होने की सम्भावना है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि मामले में कई फॉरेंसिक रिपोर्ट आनी हैं, जिनके इंतजार की वजह से समय लग रहा है।

डीएम का सरकार ने किया बचाव
राज्य सरकार की ओर से एक हलफनामा दाखिल किया गया। जिलाधिकारी हाथरस प्रवीण कुमार के बावत राज्य सरकार का कहना है कि पूरे मामले में जिलाधिकारी का कार्य व निर्णय सद्भावनापूर्ण रहा है। कुछ राजनीति दल उन्हें वहां से हटाना चाहते हैं लेकिन सरकार यदि उन्हें हटाती है तो सद्भावनापूर्ण तरीके से काम करने वाले सरकारी अधिकारी इससे हतोत्साहित होंगे। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि मृतका के परिवार ने भी जिलाधिकारी के खिलाफ कोई शिकायत नहीं की है और न ही मामले की जांच में जिलाधिकारी द्वारा किसी प्रकार के हस्तक्षेप की कोई बात सामने आई है। हालांकि कोर्ट ने सरकार के जवाब से असंतुष्टि जाहिर की है।

आरोप-प्रत्यारोप का मुकदमा नहीं
मृतका के परिवार की अधिवक्ता सीमा कुशवाहा ने सुनवाई के दौरान परिवार के लिए दिल्ली में घर दिये जाने का निर्देश सरकार को देने की मांग की। इस पर न्यायालय ने कहा कि वर्तमान मामले पर संज्ञान सीमित उद्देश्य के लिए लिया गया है। न्यायालय ने कहा कि यह आरोप-प्रत्यारोप का मुकदमा नहीं है। हाथरस जैसे मामले की पुनरावृत्ति होने की दशा में अंतिम संस्कार के लिए प्रस्तावित गाइडलाइन पर और विचार-विमर्श करने का निर्देश भी न्यायालय ने राज्य सरकार को दिया है।

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