
न कोई मेडे कॉल, न रनवे की साफ तस्वीर: अजित पवार विमान हादसे पर DGCA की शुरुआती जांच में बड़े खुलासे
Mumbai: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार को ले जा रहा निजी विमान आखिर क्यों और कैसे दुर्घटनाग्रस्त हुआ, इस पर अब तस्वीर धीरे-धीरे साफ होने लगी है। बारामती विमान हादसे की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने कई चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं। रिपोर्ट के अनुसार हादसे से पहले न तो किसी तरह की इमरजेंसी कॉल दी गई और न ही पायलटों को रनवे स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था।
▪️उड़ान से हादसे तक का पूरा क्रम
DGCA की रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली स्थित वीएसआर वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित लियरजेट 45 विमान ने सुबह 8.10 बजे मुंबई से उड़ान भरी थी। विमान में एनसीपी प्रमुख अजित पवार, दो क्रू मेंबर और उनके निजी स्टाफ के दो सदस्य सवार थे। सभी की इस दुर्घटना में मौके पर ही मौत हो गई।
मेसर्स वीएसआर वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड का लीयरजेट 45 विमान (VT-SSK) बारामती हवाई अड्डे पर दुर्घटनाग्रस्त pic.twitter.com/TklYlD3Jx8
— DGCA (@DGCAIndia) January 28, 2026
सुबह 8.18 बजे विमान ने बारामती एयरफील्ड से पहला रेडियो संपर्क किया। उस समय पायलटों ने बताया कि रनवे दिखाई नहीं दे रहा है। इसके बाद विमान को गो-अराउंड किया गया यानी लैंडिंग रोककर दोबारा ऊपर ले जाया गया।
▪️दूसरी कोशिश भी नहीं रही सफल
दूसरी बार लैंडिंग के प्रयास में भी शुरुआत में पायलटों ने रनवे न दिखने की सूचना दी। कुछ ही सेकंड बाद उन्होंने कहा कि अब रनवे दिखाई दे रहा है। इसके बाद सुबह 8.43 बजे विमान को रनवे 11 पर उतरने की अनुमति दी गई, लेकिन इस लैंडिंग क्लीयरेंस की पायलटों की ओर से कोई पुष्टि नहीं आई।
कुछ ही पलों बाद रनवे के पास आग की लपटें उठती देखी गईं। विमान का मलबा रनवे 11 के बाईं ओर खेतों के पास मिला।
▪️क्यों नहीं दी गई मेडे कॉल
जांच रिपोर्ट का सबसे अहम और गंभीर पहलू यह है कि हादसे से पहले विमान के क्रू ने कोई मेडे कॉल या इमरजेंसी सिग्नल नहीं भेजा। DGCA का मानना है कि दुर्घटना इतनी अचानक हुई कि पायलटों को चेतावनी देने का समय ही नहीं मिला।
▪️एयरफील्ड की सीमाएं भी आईं सामने
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हादसे के समय दृश्यता लगभग 3000 मीटर थी, लेकिन बारामती एक अनियंत्रित हवाई क्षेत्र है। यहां एयर ट्रैफिक सेवाएं भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण नहीं बल्कि फ्लाइंग ट्रेनिंग संगठनों के माध्यम से संचालित होती हैं। आधुनिक नेविगेशन और लैंडिंग सहायता उपकरणों की कमी भी जांच के दायरे में है।
▪️अब AAIB के हाथ में जांच
इस गंभीर हादसे की विस्तृत जांच अब एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) को सौंप दी गई है। ब्यूरो के महानिदेशक खुद दुर्घटनास्थल के लिए रवाना हो चुके हैं। जांच में फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर, मौसम की स्थिति और तकनीकी पहलुओं की गहन पड़ताल की जाएगी, ताकि हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।





