उज्जैन में शनिश्चरी अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने शिप्रा में लगाई आस्था की डुबकी, शनि मंदिर पर भी रही भारी भीड़

केडी पैलेस पर बने 52 कुंड में प्रेत बाधाओं से मुक्ति पाने के लिए लोगो ने डुबकी लगाई

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उज्जैन में शनिश्चरी अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने शिप्रा में लगाई आस्था की डुबकी, शनि मंदिर पर भी रही भारी भीड़

उज्जैन से मुकेश भीष्म की रिपोर्ट

उज्जैन: शनिश्चरी अमावस्या एवं सर्वपितृ अमावस्या का योग वर्षों बाद होने से शनिवार को इंदौर रोड त्रिवेणी स्थित शनि मंदिर पर सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने घाट पर लगाए गए फव्वारों पर स्नान किया और यहाँ पर अपने कपड़े, जूते चप्पल भी छोड़े। वही सर्वपितृ अमावस्या के पर्व पर लोगों ने अपने पूर्वजों का तर्पण कर शिप्रा नदी में डुबकी लगाकर पुण्य कमाया, भैरवगढ़ स्थित सिद्धवट एवं अंकपात खाकचौक स्थित गयाकोटा पर पितृजनों की आत्मशांति के लिए श्राद्ध, तर्पण किया।

शनिश्चरी अमावस्या पर उज्जैन में के केडी पैलेस पर शिप्रा नदी पर बने 52 कुंड में प्रेत बाधाओं से मुक्ति पाने के लिए लोग डुबकी लगाने पहुंचे। लोक मान्यता के चलते उज्जैन के केडी पैलेस 52 कुंड पर भुत प्रेत से मुक्ति पाने के लिए दूर दूर से लोग आये।

इंदौर रोड स्थित नवग्रह शनि मंदिर में आज शनिचरी अमावस्या पर बड़ी संख्या में देश भर के ग्रामीण व शहरी श्रद्धालु स्नान और दर्शन के लिए पहुंचें। प्रशासन ने सुविधा पूर्वक दर्शन कराने के लिए चाक-चौबंद व्यवस्था करी।

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उज्जैन एडीएम श्री अनुकूल जैन ने शनिवार को शनिचरी और सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या के पर्व पर शिप्रा नदी स्थित विभिन्न घाटों और मन्दिरों पर कार्यपालिक दण्डाधिकारियों और अधिकारियों की ड्यूटी लगाई।शुक्रवार को नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, विद्युत मंडल, पीएचई के कर्मचारी अलग-अलग व्यवस्था में जुटे रहे। त्रिवेणी घाट पर फव्वारे से स्नान की व्यवस्था के लिए महिला और पुरूषों के लिए अलग-अलग व्यवस्था की थी।साथ ही महिलाओं को वस्त्र बदलने, पनौती के रूप में पुराने वस्त्र और जूते छोड़ने के लिए अलग स्थान बनाए गये थे।

श्रद्धालुओं को नदी में जाने से रोकने के लिए बेरिकेट्स लगाए गये वहीं मुख्य सड़क से मंदिर परिसर में 2 स्तर पर बैरिकेटिंग की गई थीजिसमें एक और से श्रद्धालु घाट पर स्नान के लिए जाएंगे और दर्शन के बाद बाहर निकले। शुक्रवार रात 12 बजे शनिदेव व नवगृह देव का शासकीय पूजन की गई।इसके बाद आधी रात से ही बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के स्नान और दर्शन का क्रम शुरू हो गया। नवग्रह शनि मंदिर 24 घंटे खुला रहा।

वही श्राद्ध पक्ष की चतुर्दशी स्थित सिद्धवट व भगवान सिद्धनाथ पर दूध अर्पित करने के लिए लंबी कतार लगी रही। साथ ही खाक चौक स्थित गया कोठा में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दूध अर्पित करने पहुंचे। चतुर्दशी पर पूर्वजों की आत्म शांति के लिए लोगों ने शिप्रा तट रामघाट और सिद्धवट पर तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म किया। मान्यता है कि सिद्धवट पर अर्पित करने से पूर्वज तृप्त होते है।