भ्रष्टाचार के एक करोड़ जमा

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मप्र के इतिहास में शायद यह पहली बार हुआ है कि भ्रष्टाचार के आरोप में फंसे संचालक स्तर के अधिकार को वित्तीय अनियमितताओं की एक करोड़ से अधिक की राशि अपने खाते से सरकार के खाते में जमा करना पड़ी हो। मप्र के स्वास्थ्य संचालक रहे डॉ. योगीराज शर्मा पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे। लोकायुक्त में दर्ज प्रकरण क्रमांक 48/9 के मामले में राज्य सरकार ने उन पर एक करोड़ 10 लाख 62 हजार की वसूली का आदेश जारी किया था। डॉ. शर्मा ने इसके विरुद्ध राज्यपाल के यहां अपील की थी। राज्यपाल ने अपील खारिज कर दी तो सरकार के आदेश पर जिला प्रशासन ने डॉ. योगीराज शर्मा और उनके परिवार के नाम चल-अचल संपत्ति की नीलामी की तैयारी की। अब खबर आ रही है कि योगीराज शर्मा ने 1.10 करोड़ रुपये सरकारी खाते में जमा कराकर नीलामी से बचने की कोशिश की है।

*रिटायर डीजी की दादागिरी*
राजधानी भोपाल में आजकल पुलिस के एक रिटायर डीजीपी स्तर के अधिकारी की कथित दादागिरी के किस्से चटकारे लेकर सुने और सुनाए जा रहे हैं। नौकरी में रहते हुए भी इन अधिकारी पर तमाम आरोप लगे थे, यही कारण है कि रिटायरमेंट के कई महीने बाद भी उनकी पूरी पेंशन आज तक शुरू नहीं हो पाई है। रिटायरमेंट के बाद इस अधिकारी ने हाउसिंग बोर्ड से एक फ्लैट खरीदा है। आरोप है कि अधिकारी ने फ्लैट के अलावा लगभग 1500 वर्गफीट छत पर अवैध कब्जा कर लिया है। इसकी शिकायत रहवासियों ने हाउसिंग बोर्ड से लेकर कलेक्टर तक कर रखी है। लेकिन कोई भी व्यक्ति इस रिटायर अफसर से पंगा मोल लेना नहीं चाहता। बताया जाता है कि अब इसी परिसर में रहने वाले कुछ रहवासी अफसर का अतिक्रमण हटाने न्यायालय की शरण में जाने की तैयारी कर रहे हैं।

*भारतीय डॉक्टरों पर भरोसा नहीं !*
आपको याद होगा कि कमलनाथ ने मप्र के मुख्यमंत्री रहते अपने हाथ की उंगली के ऑपरेशन के लिये भोपाल के सरकारी हमीदिया अस्पताल पर भरोसा किया था। कमलनाथ दो दिन अस्पताल में भर्ती रहे तो सरकारी अस्पताल और सरकारी डॉक्टरों के पक्ष में खूब प्रचार किया गया था, लेकिन अब भोपाल तो छोड़िये कमलनाथ को देश के डॉक्टरों पर भी भरोसा नहीं रहा। वे आजकल अपना फुल बाॅडी चेकअप कराने अमेरिका गये हुए हैं। दरअसल पिछले दिनों कमलनाथ को बुखार आया तो वे गुडगांव के एक अस्पताल में भर्ती हुए थे, वहां बिना कोरोना संक्रमित हुए, उनका कोरोना प्रोटोकॉल के तहत ईलाज कर दिया गया। बताते हैं कि दवाओं का विपरीत असर हुआ तो कमलनाथ ने अमेरिकन की फ्लाइट पकड़ी और अब वे वहां से पूरा चेकअप कराकर ही लौटेंगें।

*भाजपा-कांग्रेस का संयुक्त मिशन सफल !*
यह हेडिंग थोड़ी चौंकाने वाली है। लेकिन यह सही है कि मप्र के मालवा निमाड क्षेत्र में पिछले चार साल से जयस(जय आदिवासी युवा शक्ति) संगठन की सक्रियता ने कांग्रेस और भाजपा दोनों की चूलें हिला दी थीं। भाजपा और कांग्रेस दोनों जयस की बढ़ती ताकत से परेशान थे और दोनों का ही मिशन था कि कैसे भी इस संगठन को रोका जाए। कांग्रेस ने पिछले विधानसभा चुनाव में इस संगठन के सबसे चर्चित चेहरे डॉ. हीरा अलावा को टिकट देकर विधायक बना दिया। भाजपा भी इस संगठन को कमजोर करने कई जतन करती रही है। अब कांग्रेस और भाजपा के लिये खुश खबरी है कि जयस नेताओं में ऐसी फूट पड़ गई है कि जयस दो फाड़ हो गया है। डॉ. हीरा अलावा से विवादों के बाद पहले डॉ. आनंद राय अलग हुए अब मामूली बात पर जयस के प्रदेश संरक्षक डॉ. अभय ओहरी को निष्कासन का नोटिस थमा दिया गया है। खास बात यह है कि जयस के दोनों खेमे असली जयस होने का दावा भी कर रहे हैं। डॉ. ओहरी ने सोशल मीडिया पर डॉ. हीरा अलावा को चेतावनी दे दी है कि वे जयस को कांग्रेस के पैरों की जूती नहीं बनने देंगे।

*इतिहासकारों को दिखाया आईना*
मप्र के सूचना आयुक्त विजय मनोहर तिवारी आजकल अपने एक खुले पत्र के कारण पूरे देश में चर्चा का विषय बने हुए हैं। उनके इस पत्र को हिन्दी और अंग्रेजी मीडिया में काफी स्थान मिल रहा है। ढाई दशक तक पत्रकार रहे विजय मनोहर तिवारी ने देश के जानेमाने इतिहासकार इरफान हबीब और रोमिला थापर के नाम खुला पत्र लिखा है। उन्होंने तथ्यों के आधार पर आरोप लगाया है कि इन दोनों इतिहासकारों ने मध्यकाल का इतिहास लिखते समय लुटेरों को महिमा मंडित करने इतिहास में मनमाने ढंग से मिलावट की है। तिवारी ने इन दोनों बड़े इतिहासकारों को आईना दिखाते हुए अपने लंबे चोड़े पत्र में मध्यकालीन घटनाओं के वास्तविक स्वरूप और उसमें हुई मिलावट को सलीके रेखांकित किया है। तिवारी ने सीधा आरोप लगाया है कि आजादी के बाद की तीन पीढिय़ां झूठा और मिलावटी इतिहास पढ़ते हुए निकली हैं। उन्होंने इरफान और थापर के सामने अनेक तर्क रखते हुए जवाब मांगा है। लेकिन उन्हें अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। विजय मनोहर तिवारी का आरोप है कि पिछले 70 साल में इतिहास के कोर्स को बिगाड़ा गया है। अब इसे सुधारने का वक्त आ गया है।

*सीएम के कार्यक्रम और कपड़ों का कलर*
यदि आप मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के जनदर्शन कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे हैं तो अपने पहने हुए कपड़ों को एक बार गौर से देख लीजिए। आपके कमर के ऊपर के कपड़े यदि काले हैं तो या तो कपड़े बदल लीजिए या कार्यक्रम में जाने का विचार छोड़ दीजिए क्योंकि भोपाल से पूरे प्रदेश में फरमान जारी हो चुका है कि कमर के ऊपर काले कपड़े पहनकर सीएम के कार्यक्रम में आने वालों के कपड़े उतार दिए जाएं या उन्हें कार्यक्रम से बाहर कर दिए जाए। दरअसल मप्र के बिगड़ते राजनीतिक भंवर में कई लोग अचानक मुख्यमंत्री को काले झंडे दिखाने की नीयत से काले कपड़े पहनकर कार्यक्रम में पहुंच जाते हैं। पिछले दिनों मुख्यमंत्री के जनदर्शन कार्यक्रम में पुलिस ने सतना और टीकमगढ़ में ऐसे युवाओं को कार्यक्रम स्थल तक नहीं पहुंचने दिया जो काली शर्ट या कुर्ता पहने थे, काला मफलर डाले थे या काला मास्क लगाए थे। इन लोगों के कपड़े उतरवाने से सीएम के कार्यक्रम में कई ऐसे युवा दिखाई दिए जिन्होंने कमर के ऊपर कपड़े ही नहीं पहने थे।

*और अंत में…*
क्या वाकई मप्र में अब सरकारी काम कराने रिश्वत की राशि निश्चित करने का समय आ गया है? राज्य सरकार को समर्थन दे रहीं बसपा विधायक रामबाई सिंह के बयान से तो यही लगता है। रामबाई ने अपने क्षेत्र के पंचायत सचिवों को सख्त हिदायत दी है कि प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि हितग्राही के खाते में डालने के एवज में रिश्वत हजार पांच सौ से ज्यादा नहीं रहना चाहिए। रामबाई ने कुछ गलत नहीं बोला, दरअसल पूरे प्रदेश में सरकारी काम की रिश्वत लगभग तय हो चुकी है। लगभग सभी सांसद विधायकों ने इसे मौन स्वीकृति भी दे रखी है। रिश्वत को लेकर अधिकारी कर्मचारी जब अति करने लगते हैं, तब रामबाई की तरह सांसद विधायकों को मजबूरी में मुंह खोलना पड़ता है।