तीर्थ यात्रा से लौटे श्रद्धालुओं ने जताया प्रशासन का आभार: साफा और फूलमालाओं से कलेक्टर का सम्मान

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तीर्थ यात्रा से लौटे श्रद्धालुओं ने जताया प्रशासन का आभार: साफा और फूलमालाओं से कलेक्टर का सम्मान

Datia: शासन की ओर से कराई गई तीर्थ यात्रा से सकुशल लौटे श्रद्धालुओं की ओर से एक बुजुर्ग प्रतिनिधि के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल कलेक्टर कार्यालय पहुंचा। कलेक्टर चेंबर में श्रद्धालुओं ने यात्रा के दौरान की गई व्यवस्थाओं को लेकर जिला प्रशासन और शासन के प्रति सामूहिक आभार व्यक्त किया।

● यात्रा को बताया सुखद और सुव्यवस्थित

बुजुर्ग प्रतिनिधि ने बताया कि यात्रा के दौरान समय पर भोजन की व्यवस्था, ट्रेन में समुचित सुविधाएं, तीर्थ स्थलों पर स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित निगरानी तथा प्रशासनिक समन्वय के कारण सभी श्रद्धालुओं की यात्रा अत्यंत सुखद, सुरक्षित और स्मरणीय रही। बुजुर्ग यात्रियों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।

● साफा और फूलमाला पहनाकर किया सम्मान

श्रद्धालुओं की भावनाओं का प्रतिनिधित्व करते हुए बुजुर्ग प्रतिनिधि ने कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े को साफा पहनाया और फूलमाला अर्पित की। साथ ही शासन एवं जिला प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं के लिए सामूहिक रूप से धन्यवाद ज्ञापित किया गया। यह सम्मान प्रशासन के प्रति जनता के विश्वास और संतोष का प्रतीक माना जा रहा है।

● संवेदनशील प्रशासन का उदाहरण बने कलेक्टर

दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े को जिले में एक संवेदनशील, सक्रिय और जन-सरोकारों से जुड़े अधिकारी के रूप में जाना जाता है। तीर्थ यात्राओं जैसी योजनाओं में वे केवल औपचारिक निगरानी तक सीमित नहीं रहते, बल्कि जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं की समीक्षा और निरंतर फीडबैक पर विशेष ध्यान देते हैं।

● बुजुर्गों और कमजोर वर्गों पर विशेष फोकस

यात्रा के दौरान बुजुर्गों, महिलाओं और कमजोर वर्ग के श्रद्धालुओं की सुविधा, स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्राथमिकता देना कलेक्टर वानखेड़े की प्रशासनिक कार्यशैली को दर्शाता है। इसी कारण ऐसी योजनाओं को लेकर आमजन में भरोसा लगातार मजबूत हुआ है।

● आम आदमी का कलेक्टर

श्रद्धालुओं द्वारा किया गया यह सम्मान केवल एक औपचारिक भेंट नहीं, बल्कि उस विश्वास का प्रतीक है जो आम नागरिक प्रशासन में महसूस करता है। सरल व्यवहार, समस्याओं को सुनने की तत्परता और मानवीय दृष्टिकोण के कारण कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े को दतिया में आम आदमी का कलेक्टर कहा जाने लगा है। यह घटना बताती है कि जब प्रशासन संवेदनशील और जिम्मेदार होता है, तो जनता का भरोसा स्वतः ही सम्मान में बदल जाता है।