कविता संवेदना से जन्म लेती है :- पद्मश्री ज्ञान चतुर्वेदी

इतिहास स्वयं को दोहराता है : - पर्यावरणविद श्री रज़ा काज़मी तीन दिवसीय द्वितीय सीतामऊ साहित्य महोत्सव का हुआ भव्य समापन

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कविता संवेदना से जन्म लेती है :- पद्मश्री ज्ञान चतुर्वेदी

मंदसौर से डॉ घनश्याम बटवाल की रिपोर्ट 

मंदसौर । जिले के सीतामऊ स्थित प्रख्यात नटनागर शोध संस्थान में आयोजित द्वितीय त्रिदिवसीय सीतामऊ साहित्य महोत्सव का शनिवार शाम सफल एवं गरिमामय समापन हुआ। तीन दिवसीय इस साहित्यिक आयोजन में देशभर से पधारे साहित्यकारों, विचारकों, इतिहासकारों, कलाकारों एवं पर्यावरणविदों ने अपने विचारों से श्रोताओं को समृद्ध किया। साहित्य महोत्सव 26 एक “नॉलेज कुंभ” के रूप में विकसित हुआ, जिसका सभी उपस्थितजनों ने लाभ उठाया।

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*कविता संवेदना से जन्म लेती है : पद्मश्री ज्ञान चतुर्वेदी*

पद्मश्री ज्ञान चतुर्वेदी ने “किस्से कहानियां” विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि कविता वही बनती है, जिसे लेखक ने स्वयं महसूस किया हो। लेखन में संवेदना का होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने पुल और नदी के माध्यम से उदाहरण देते हुए कहा कि जीवन को भीतर उतरकर समझना ही सच्ची रचना का आधार है। उन्होंने सरल, सहज और बोलचाल की भाषा को लेखन की आत्मा बताया तथा व्यंग्य रचना भी प्रस्तुत की।

*इतिहास स्वयं को दोहराता है : श्री रज़ा काज़मी*

पर्यावरणविद् श्री रज़ा काज़मी ने “पर्यावरण संरक्षण” विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि इतिहास अपने आप को दोहराता है। उन्होंने आइने-ए-अकबरी का उल्लेख करते हुए बताया कि 1564 में इस क्षेत्र से अकबर 75 हाथी पकड़कर ले गया था। उन्होंने बच्चों से प्रकृति से जुड़ने, पक्षियों व जीव-जंतुओं को देखने और प्रकृति के निःशुल्क आनंद को अपनाने का आह्वान किया।

*अंग्रेज़ी के साथ हिंदी को भी समान महत्व दें : श्री जेरी पिंटो*

साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता श्री जेरी पिंटो ने “किताबों की दुनिया” विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि अंग्रेज़ी के साथ-साथ हिंदी पढ़ना भी उतना ही आवश्यक है, जिससे हमारी जड़ें मजबूत होती हैं। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, मानसिक व शारीरिक संतुलन पर विचार साझा किए तथा सकारात्मक कहानियों के माध्यम से बच्चों को प्रेरित किया।

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*सीतामऊ बना ‘जश्न-ए-सीतामऊ’*

श्री मुजतबा खान ने “दादी-नानी के किस्से” सुनाते हुए कहा कि यह आयोजन सीतामऊ को जश्न-ए-सीतामऊ में बदल देता है। उन्होंने समाज को सुंदर बनाने में भाषा के साथ-साथ तहज़ीब के महत्व पर प्रकाश डाला।

*सुवासरा से फिल्मफेयर तक : श्री प्रशांत पांडे*

फिल्मफेयर पुरस्कार विजेता श्री प्रशांत पांडे ने अपने जीवन सफर पर आधारित “सुवासरा से फिल्मफेयर तक” विषय पर प्रेरक अनुभव साझा किए। कार्यक्रम के अंत में विभिन्न गतिविधियों में भाग लेने वाले स्कूली बच्चों को सम्मानित किया गया।

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साहित्य वही है जिसमें सबका हित समाहित हो : श्री हरदीप सिंह डंग

समापन अवसर पर सुवासरा विधायक श्री हरदीप सिंह डंग ने कहा कि प्रशासन के प्रयासों से यह दूसरा साहित्य महोत्सव सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। उन्होंने नटनागर शोध संस्थान को एशिया की दूसरी सबसे बड़ी लाइब्रेरी बताते हुए इसे ज्ञान का अनुपम केंद्र कहा। पूर्व मंत्री श्री नरेंद्र नाहटा ने कहा कि इस साहित्य महोत्सव ने सीतामऊ को एक नई पहचान दी है और यह आयोजन स्व. महाराज कुमार डॉ रघुवीर सिंह जी को सच्ची श्रद्धांजलि है।

*महोत्सव की जड़ें मजबूत, अब बनेगा वृहद वृक्ष : कलेक्टर श्रीमती गर्ग*

कलेक्टर श्रीमती अदिती गर्ग ने कहा कि यह एक छोटी-सी पहल थी, जिसका दूसरा चरण भी सफलतापूर्वक पूर्ण हुआ। उन्होंने कहा— “शीशे तराशने का हुनर देखते हैं लोग, हाथों में कितना खून है कोई देखता नहीं।”

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उन्होंने कहा कि इस महोत्सव से सभी ने बहुत कुछ सीखा है। बाहर से आए विद्वानों ने स्थानीय संस्कृति को जाना और स्थानीय लोगों को राष्ट्रीय स्तर के विचारों से जुड़ने का अवसर मिला। अब इस महोत्सव की जड़ें मजबूत हो चुकी हैं, जो आगे चलकर एक वृहद वृक्ष का रूप लेंगी। उन्होंने स्कूली बच्चों की सक्रिय सहभागिता के लिए आभार व्यक्त किया।

समापन अवसर पर कलेक्टर श्रीमती अदिती गर्ग, सुवासरा विधायक श्री हरदीप सिंह डंग, पूर्व मंत्री श्री नरेंद्र नाहटा, नगर परिषद अध्यक्ष श्री मनोज शुक्ला, जिला योजना समिति सदस्य श्री अनिल पांडे सहित जनप्रतिनिधि, साहित्यप्रेमी, दर्शकगण एवं पत्रकार बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।