Friday, December 13, 2019
पदोन्‍नति में आरक्षण: सुप्रीम कोर्ट में आज संवैधानिक पीठ करेगी सुनवाई, सभी को है बेसब्री से फैसले का इन्तजार

पदोन्‍नति में आरक्षण: सुप्रीम कोर्ट में आज संवैधानिक पीठ करेगी सुनवाई, सभी को है बेसब्री से फैसले का इन्तजार

मीडियावाला.इन। भोपाल| पदोन्नति में आरक्षण मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट 3 अगस्त को करेगा। केंद्र सरकार सहित चार राज्यों के पदोन्नति में आरक्षण के करीब सौ मामले सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। संविधान पीठ के गठन और तीन अगस्त को सुनवाई करने का फैसला होने से इन सभी मामलों के निपटारे का रास्ता खुल गया है। 

उल्लेखनीय है कि म.प्र. सहित अनेक राज्यों और स्वयं केंद्र शासन के "पदोन्नति में आरक्षण" के विभिन्न प्रकरणों में अलग अलग उच्च न्यायालयों ने सुप्रीम कोर्ट के एम नागराज प्रकरण में जारी दिशा निर्देशों के प्रकाश में इन पदोन्नति नियमों के अन्तर्गत प्रावधानों को अनुसूचित जाति/ जनजाति को समानता का उल्लघंन करते हुए अतिरिक्त लाभ देने वाला पाया था और नियमों को खारिज कर दिया था।  म.प्र., त्रिपुरा, बिहार के प्रकरणों की संयुक्त सुनवाई में  एम नागराज प्रकरण में जारी दिशा निर्देशों की एक शर्त जो अनुसूचित जाति/ जनजाति के पिछड़ेपन से संबंधित है के लिए पुनर्विचार के लिए संविधान पीठ को भेजे जाने का निर्णय लिया था। इसी पर विचार के लिए 3 अगस्त को संविधान पीठ में सुनवाई होना है। 5 जजों की संविधान पीठ मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में सुनवाई करेगी। पीठ के अन्य सदस्यों में जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस रोहिंगटन नरीमन, जस्टिस कौल एवं जस्टिस इंदु मल्होत्रा होंगी। 

प्रमोशन के इन्तजार में हजारों हो गए रिटायर 

बता दें कि 30 अप्रैल 2016 के उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा पदोन्नति नियम 2002 असंवैधानिक ठहराए जाने के खिलाफ मप्र सरकार सुप्रीम कोर्ट गई और मामले में वर्तमान में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश है| इसके फलस्वरूप पिछले 2 वर्ष से अधिक समय से पदोन्नतियां रुकी हुई हैं, जबकि इस बीच लगभग 50000 सरकारी कर्मचारी अधिकारी बिना पदोन्नति का लाभ पाए सेवानिवृत्त हो चुके हैं और वरिष्ठ खाली पदों पर शासन प्रभारी से कार्य करा रहा है। 

जारी है लंबी लड़ाई

पदौन्नति में आरक्षण को लेकर प्रदेश में लम्बी लड़ाई चल रही है| अधिकारियो/ कर्मचारियों की संस्था सपाक्स जहां सामान्य, पिछड़ा व अल्पसंख्यक वर्ग के हितों के लिए इस मुद्दे पर संघर्ष कर रही है वहीं सरकार अजाक्स का पूरा साथ दे रही है।सरकार कोशिश कर रही है कि नागराज केस में हुवे आदेश को बदलने के लिए प्रकरण को 7 जजों वाली संविधान पीठ को भेजा जाए।

महाराष्ट्र की तरह छूट मांगेगी सरकार

इसी बीच पता चला है कि एमपी सरकार एक आवेदन लगाने जा रही है कि उसे भी महाराष्ट्र सरकार को मिली छूट की तरह प्रमोशन करने के आदेश दिए जाए। 

उम्मीद की जानी चाहिए कि इस मामले पर देश की शीर्ष अदालत में सुनवाई शुरू होने से इस स्थिति का कोई सार्थक और अंतिम समाधान जल्दी निकल सकेगा। फिलहाल प्रदेश के अधिकारी -  कर्मचारियों को बेसब्री से इस फैसले का इन्तजार है|

0 comments      

Add Comment