Thursday, December 12, 2019
महाराष्ट्र: शरद पवार का खुलासा- PM मोदी ने सुप्रिया सुले को मंत्री बनाने का ऑफर दिया था

महाराष्ट्र: शरद पवार का खुलासा- PM मोदी ने सुप्रिया सुले को मंत्री बनाने का ऑफर दिया था

मीडियावाला.इन।

मुंबई. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुख शरद पवार (Sharad Pawar) ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने उन्हें साथ मिलकर काम करने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने उनके प्रस्ताव को ठुकरा दिया. एक मराठी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में एनसीपी चीफ ने कई खुलासे किए और राष्ट्रपति बनने के प्रस्ताव से अजित पवार (Ajit Pawar) की बगावत पर खुलकर बात की. मोदी ने देश का राष्ट्रपति बनाने का नहीं दिया था प्रस्ताव
शरद पवार ने ऐसी खबरों को खारिज कर दिया कि नरेंद्र मोदी सरकार ने उन्हें देश का राष्ट्रपति बनाने का प्रस्ताव दिया था. उन्होंने कहा, 'लेकिन, नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली कैबिनेट में सुप्रिया सुले को मंत्री बनाने का एक प्रस्ताव जरूर मिला था.'

मेरे लिए साथ मिलकर काम करना संभव नहीं है: शरद पवार शरद पवार ने कहा, 'नरेंद्र मोदी ने मुझे साथ मिलकर काम करने का प्रस्ताव दिया था. मैंने उनसे कहा कि हमारे निजी संबंध बहुत अच्छे हैं और वे हमेशा रहेंगे, लेकिन मेरे लिए साथ मिलकर काम करना संभव नहीं है.' सुप्रिया सुले, शरद पवार की बेटी हैं और पुणे जिला में बारामती से लोकसभा सदस्य हैं. महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर चल रहे घटनाक्रम के बीच शरद पवार ने पिछले महीने नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी.

'अजित के कदम से परिवार खुश नहीं था'
एनसीपी चीफ ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि (पवार) परिवार में क्या किसी ने (अजित पवार से फडणवीस को समर्थन देने के उनके फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए) बात की थी, लेकिन परिवार के सभी का मानना था कि अजित ने गलत किया. उन्होंने कहा, 'बाद में मैंने उनसे कहा कि जो कुछ भी उन्होंने किया वह क्षम्य नहीं है. जो कोई भी ऐसा करेगा उसे परिणाम भुगतान होगा और आप अपवाद नहीं हैं.' उन्होंने कहा, 'साथ राकांपा में एक बड़ा हिस्सा है, जिसकी उनमें आस्था है--वह काम करा देते हैं.' कई मौकों पर राकांपा प्रमुख शरद पवार की तारीफ कर चुके हैं पीएम मोदी
पिछले दिनों मोदी ने कहा था कि संसदीय नियमों का पालन कैसे किया जाता है इस बारे में सभी दलों को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) से सीखना चाहिए . पवार ने कहा कि 28 नवंबर को जब उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो उस समय अजित पवार को शपथ नहीं दिलाने का फैसला 'सोच समझकर' लिया गया.

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