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ये नजारा था धार के एक छोटे से गांव पडियाल का। एमपास तक पढ़े-लिखे युवक गजेन्द्रसिंह बड़वानी में कोचिंग चलाते हैं। सात साल पहले इनके गाँव की ही अलका से पढाई के दौरान दोस्ती हुई और फिर दोस्ती प्यार में बदल गई। दोनों ने अपने-अपने घर वालों को इस बारे में बताया और घर वाले भी विवाह के लिए राजी हो गए। फिर दोनों ने सात फेरों के बंधन में हमेशा के लिए बंधने का फैसला किया।
गजेन्द्र सिंह ने आधुनिकता छोड़कर पारंपरिक तरीके से विवाह करने का सुझाव दिया, जिसे होने वाली पत्नी ने भी स्वीकार किया। इसके बाद जो बारात निकली, वो यादगार बन गई। इस बारे में गजेन्द्र सिंह का कहना है कि उन्होंने सिर्फ अपनी प्राचीन आदिवासी परंपरा को निभाया है। .