रंगपंचमी : विश्व धरोहर बनते-बनते रह गई हमारी गेर….!

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रंगपंचमी पर निकलने वाली गेर को विश्व धरोहर स्थल (यूनेस्को) की सूची में शामिल कराने की पहल जोर-शोर से तत्कालीन कलेक्टर लोकेश जाटव (अभी वाणिज्यिक कर आयुक्त, इंदौर) के वक्त हुई थी, हालात कुछ ऐसे बने कि जाटव का यकायक तबादला हो गया और गेर भी विश्व धरोहर सूची में शामिल नहीं हो पाई।

तीन साल पहले जो प्रयास हुए वह फाइल संगीत नाट्य अकादमी और कलेक्टोरेट में कहां धूल खा रही है, कोई पता भी नहीं लगाना चाहता।

इस साल तो रंग पंचमी को एक पखवाड़ा शेष है, कुछ हो नहीं सकता। यदि अभी से जनप्रतिनिधि-सरकार पहल करे तो अगले साल तक हमारी गेर विश्व धरोहर सूची में स्थान हासिल कर सकती है।

तीन साल पहले तत्कालीन कलेक्टर जाटव ने विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए प्रयास किए थे।

एडीएम अजय देव शर्मा की अध्यक्षता में गठित समिति में शा. जीजाबाई कन्या महाविद्यालय के डा. मनोहर दास सोमानी को समन्वयक और शा. कला-वाणिज्य महा. की अग्रेजी की प्रोफेसर डॉ उषा जैन को ड्राफ्टिंग एवं डॉ नमिता काटजू (इतिहास) को ऐतिहासिक तथ्य जुटाने का दायित्व दिया गया था।

शहर हित के इस काम में विज्ञापन एजेंसी आर्चर के संचालक शिशिर सोमानी ने बिना कोई शुल्क लिए सेवा दी। उन्होंने शहर के जानकार पत्रकार श्रवण गर्ग, मराठी समाज के सुनील मतकर, गेर आयोजक शेखर गिरी, कमलेश खंडेलवाल, राजपाल जोशी, यश मिश्रा, अभिमन्यु मिश्रा, ओमप्रकाश शास्त्री आदि से चर्चा कर वीडियो क्लिपिंग भी तैयार कराई।

डॉ सोमानी ने रंगपंचमी गेर की प्रामाणिक जानकारी वाली रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी।

कलेक्टर ने अपने ई मेल से संगीत नाट्य अकादमी दिल्ली को प्रस्ताव-रिपोर्ट भी भेज दी। इसी बीच जाटव का रातोंरात तबादला हो गया भारत सहित पूरी दुनिया में कोरोना महामारी फैलने लग गई।नतीजा यह हुआ कोरोना की रोकथाम के चलते जिला प्रशासन के लिए भी गेर गौण हो गई। तब से यह फाईल दबते ही जा रही है।
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हमारी गेर का सूची में 41वां स्थान होगा

यूनेस्को द्वारा भारत के 40 स्थलों को विश्व विरासत स्थलों की सूची में शामिल किया गया है। हमारी गेर सूची में शामिल होने पर उसका 41वां स्थान होगा। अभी भारत के इन विश्व विरासत स्थलों में से 32 सांस्कृतिक स्थल, 7 प्राकृतिक स्थल और 1 मिश्रित स्थल है।

पहले निकली गेर के रोचक किस्से

हाथी को शामिल करना प्रतिबंधित कर दिया, सात फुट लंबा आदमी अजूबा हो गया!

कोरोनाकाल के बाद पहली बार गेर को लेकर आयोजक और आमजन उत्साह में है। उत्सवप्रिय शहर में होली का एक अलग क्रेज है। पुराने इंदौर की गेर के कई किस्से हैं जो बड़े रोचक हैं।

पहले गेर में हाथी-घोड़े पर बैठ कर भी रंगीले युवक गेर में निकलते थे। शायद रसिया क्लब की गेर में शामिल हाथी पर बैठे दाढ़ी वाले बाबा गोराकुंड चौराहे के समीप फिसल कर नीचे गिर पड़े थे।

उनकी कमर में चोंट आई थी। इस घटना के बाद से हाथी व अन्य चौपाए प्रतिबंधित कर दिए गए। टोरी कार्नर की गेर में एक साल सर्कस के जोकर तो एक बार भोपाल से खास तौर पर आमंत्रित सात फुट लंबा आदमी गेर में अजूबा हो गया था। अपनी ऊंचाई के कारण वह दूर से ही नजर आ रहा था। 🔺

लक्ष्मण सिंह द्वारा शुरु की गई परंपरा को कायम रखे हुए हैं पुत्र एकलव्य गौड़

विधायक गौड़ का दुर्घटना में निधन होने के बाद से महापौर मालिनी गौड़ और उनके पुत्र एकलव्य गौड़ के नेतृत्व में फाग यात्रा निकलती रही है। इसमें शिवराज सिंह चौहान, नरेंद्र सिंह तोमर सहित अन्य भाजपा नेता भी शामिल होते रहे हैं।

रथ पर विराजित राधा-कृष्ण, शामिल होने वाली महिलाओं के चारों तरफ सुरक्षा घेरा, अरारोट वाले सूखे रंगों का उपयोग, राधा-कृष्ण और फाग गाती भजन मंडलियां इस फाग यात्रा का आकर्षण रहे हैं।

इसके साथ शहर के अन्य हिस्सों से करीब चार फाग यात्रा और निकलती हैं। विधायक मालिनी गौड़ ने बताया दूसरे साल से फाग यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल होने लगीं।

प्राकृतिक रंग के लिए जंगलों से टेसू के फूल ट्रकों से लेकर आते हैं।इसके साथ ही अरारोट वाले सूखे रंग तैयार कराते हैं।भजन मंडलियों के गीतों पर महिलाएं खुद ही थिरकने लगती हैं।
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बजरबट्टू के बाने में विजयवर्गीय रहते हैं यात्रा मार्ग पर आकर्षण का केंद्र

पश्चिम क्षेत्र में ही बजरबट्टू सम्मेलन की भी धूम रहती है। रंगपंचमी की पूर्व संध्या पर निकलने वाली बजरबट्टू यात्रा में भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय हर साल विशेष रूप में शामिल होते रहे हैं।

भाजपा नेता अशोक चौहान चांदू बताते हैं पहले मालवा क्लब की गेर निकालते थे। उसके बाद से इसकी शुरुआत की।

इस बार बजरबट्टू का 23वां साल होगा।यात्रा में रथ, बग्गी और खुली कारों में मीडिया से जुड़े सदस्य भी आकर्षक वेशभूषा में शामिल रहते हैं।

इन सभी को अपना बचपन इसलिए याद आता रहता है कि कहीं चाकलेट, राजगिरे के लड्डू, पेप्सी से तो फिंगर, पापड़, चिप्स आदि से स्वागत होता है।
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गेर में सपरिवार शामिल होने के निमंत्रण भेज रहे हैं सोशल मीडिया से

छोटा राजमोहल्ला से निकलने वाली रसिया कार्नर गेर के संयोजक-भाजपा नेता राजपाल जोशी ने सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को गेर में शामिल होने के निमंत्रण भेजना भी शुरु कर दिए हैं।

जोशी कहते हैं गेर का यह 49 वां वर्ष है।तीन साल बाद गेर निकलेगी, रंग खेलने वालों में उत्साह है।अब वो मार्ग ठीक नहीं हुआ है तो गेर निरस्त नहीं कर सकते। जिला प्रशासन जो मार्ग तय करेगा उस रूट से गेर निकालेंगे।

बस पुलिस प्रशासन की व्यवस्था माकूल रहना चाहिए।

तीन साल पहले जब प्रशासन ने एक दिन पहले रात में गेर पर प्रतिबंध लगा दिया था तब हमारी तत्कालीन एएसपी मनीष खत्री से बहस भी हुई थी, अंतत: शहर हित और कोरोना जैसे कारण पर हमने समझौता कर लिया था।
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सब ठीक रहा तो कालीचरण महाराज की मौजूदगी विशेष आकर्षण रहेगी

छीपा बाखल से मारल क्लब की गेर अभिमन्यु मिश्रा के नेतृत्व में निकलती रही है।यह 48वां वर्ष है।हमेशा की तरह इस बार भी मुंबई की राम राज्य ताशा पार्टी को बुक कर लिया है।

तीन साल पहले तो कोरोना की बंदिशों के चलते ताशा पार्टी को मना करना पड़ा था।इमारल क्लब की गेर में कालीचरण महाराज तो पहले भी शामिल होते रहे हैं।

यदि वे इस बार शामिल होते हैं तो निकलने वाली तमाम गेर में सर्वाधिक आकर्षण इस गेर का रहेगा।

इसकी वजह कुछ महीनों पहले धर्मसंसद में दिया गया उनका विवादास्पद भाषण है। इस भाषण के बाद रायपुर (छत्तीसगढ़) पुलिस ने उन्हें मप्र से गिरफ्तार किया था, अभी वे रायपुर में ही हैं।