वक्फ पर बवाल या बवाल पर सवाल…

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वक्फ पर बवाल या बवाल पर सवाल…

कौशल किशोर चतुर्वेदी

वक्फ कानून की विसंगतियां दूर करने और वक्फ संपत्तियों के असली हकदार को हक दिलाने संशोधन हो रहा है या हक छीनने के लिए। कांग्रेस, सपा जैसे दल और भू-माफिया वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ लोगों को भड़काने का षडयंत्र रच रहे हैं या एनडीए अल्पसंख्यकों के खिलाफ साजिश रच रही है। गरीब मुस्लिमों के अंत्योदय के लिए दो करोड़ लोगों के सुझाव लेकर संशोधन किया जा रहा है या फिर करोड़ों मुस्लिमों की भावनाओं को आहत करने संशोधन पास हो रहा है। मुस्लिमों के हर तबके, महिलाओं और गरीबों को वक्फ संशोधन बिल प्रतिनिधित्व देगा या फिर संशोधन के जरिए मुस्लिमों का हक छीनने का काम केंद्र सरकार कर रही है। तुष्टिकरण करने वाली कांग्रेस मुस्लिमों का भला नहीं चाहती और वोट बैंक के लिए मुस्लिमों को गुमराह कर रही है या फिर मुस्लिमों के वोटों पर स्थायी डाका डालने के लिए भाजपा ने सुनियोजित संशोधन की राह पकड़ी है। वक्फ संशोधन बिल वक्फ बोर्ड के कामकाज में पारदर्शिता लाएगा और वक्फ बोर्ड की आय बढ़ेगी या फिर वक्फ बोर्ड की आय पर किसी और की निगाह है। ऐसी तमाम बातें वक्फ बोर्ड को लेकर की जा सकती हैं। पर सबसे मजेदार बात तो यह है कि वक्फ बोर्ड पर रणभूमि में जो नेता आमने-सामने खड़े नजर आ रहे हैं, उनकी प्रतिबद्धता वक्फ बोर्ड संशोधन बिल के साथ या विरोध में नहीं है। बल्कि यह नेता तो एनडीए-इंडिया गठबंधन के मुताबिक अपना राजधर्म निभा रहे हैं। नेता चाहे मुस्लिम हों या हिंदू, इससे कतई कोई फर्क नहीं पड़ता। फर्क यहां बस पार्टी के स्टैंड से है।

बात मध्यप्रदेश की करें तो भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता व मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत वक्फ संशोधन बिल का सभी को स्वागत करना चाहिए। इस बिल का विरोध न भारत के मुसलमान कर रहे हैं ना बाकी लोग कर रहे हैं। हर कोई इसका स्वागत कर रहा है। इसका विरोध सिर्फ कांग्रेस और सपा जैसे राजनीतिक दल कर रहे हैं, जो मुस्लिमों के हितैषी नहीं हैं, बल्कि उनका इस्तेमाल वोट बैंक की तरह करना चाहते हैं। इस बिल का विरोध ऐसे लोग भी कर रहे हैं जो वक्फ बोर्ड की आड़ में भू-माफिया बनकर मोटी कमाई कर रहे हैं। यही लोग देश की जनता को भड़काने का षडयंत्र रच रहे हैं। यह बिल वक्फ कानून की विसंगतियां दूर करने के साथ मुस्लिम समाज के गरीबों-महिलाओं और जरूरतमंदों के लिए अंत्योदय का कार्य करेगा। यह बिल वक्फ बोर्ड की संपत्तियों के असली हकदारों को उनका हक दिलाने के लिए लाया गया है। वक्फ बोर्ड के कामकाज में वक्फ संशोधन बिल पारदर्शिता लाएगा और वक्फ बोर्ड की आय भी बढ़ेगी। यह संशोधन विधेयक देश के भाईचारे और मुस्लिम समाज के हित व मुस्लिम समाज के जरूरतमंद लोगों के हक में है।

यह एक भाजपा के मुस्लिम नेता का बयान है। जो निश्चित तौर पर पार्टी की नीति पर खुद को खरा साबित कर रहे हैं। पर महाराष्ट्र में शिवसेना यूबीटी के उद्धव ठाकरे और शिंदे शिवसेना के एकनाथ शिंदे वक्फ के विरोध और समर्थन में एक-दूसरे को चुनौती दे रहे हैं। तो अजीत पवार और शरद पवार संग सुप्रिया सुले वक्फ के बवाल में एक-दूसरे के खिलाफ ताल ठोक रहे हैं। तो स्वास्थ्य लाभ ले रहे लालू यादव का कहना है कि संघी-भाजपाई नादानो! तुम मुसलमानों की भूमि हड़पना चाहते हो, लेकिन हमने सदा वक्फ की भूमि बचाने के लिए कड़ा कानून बनाया है और बनवाने में सहायता की है। मुझे अफसोस है कि अल्पसंख्यकों, गरीबों, मुसलमानों और संविधान पर चोट करने वाले इस कठिन दौर में संसद में नहीं हूं, अन्यथा अकेला ही काफी था। तो जदयू प्रदेश प्रवक्ता अरविंद निषाद ने पलटवार किया कि राजद ने अल्पसंख्यक समुदाय को हमेशा वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया और कभी भी उनके हित की बात नहीं सोची। दोनों अल्पसंख्यक वोटों के सौदागर रहे हैं। तो यह झलक वक्फ संशोधन के समर्थकों और विरोधियों के बीच हर जगह देखी जा सकती है। दलीय प्रतिबद्धता बदलने के साथ नेताओं के विचार यू-टर्न लेकर नई विचारधारा में रम जाते हैं।

तो महत्वपूर्ण बात यही है कि संशोधन तो शोधन के लिए है। वक्फ पर भाजपा से जुड़े मुस्लिम खुशी मना रहे है। वक्फ से मुस्लिम अंत्योदय की बात कर रहे हैं तो एनडीए के घटक दल भी कमोबेश संशोधन पर सहमति जता रहे हैं। वहीं कांग्रेस दल और इंडिया गठबंधन के समर्थक संशोधन को द्वेष से भरा और मुस्लिमों के लिए निरर्थक बता रहे हैं। वास्तव में देखा जाए तो वक्फ संशोधन पर बवाल की जगह वक्फ पर बवाल करने वालों पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर दलों की खाई में यह देश के हितों के साथ फुटबाल खेलने का काम तो नहीं कर रहे हैं…।