एमपी में कांग्रेस की सत्ता जाने और भाजपा की सत्ता आने के खेल को उजागर करती बृजेश राजपूत की पुस्तक  ' वो 17 दिन ' का पोस्टर रिलीज

एमपी में कांग्रेस की सत्ता जाने और भाजपा की सत्ता आने के खेल को उजागर करती बृजेश राजपूत की पुस्तक ' वो 17 दिन ' का पोस्टर रिलीज

मीडियावाला.इन।

सीहोर। हमारा इतिहास सबसे प्राचीन है, इसको कोई मिटा नहीं सका है, यूरोप, चीन और अमेरिका आदि का इतिहास मात्र दो से तीन हजार वर्ष पूर्व का है। पुस्तक एक सोच व सच्चा हमसफर है। यह इंसान की सभ्यता को परिभाषित करती है। लोगों की विचारधारा लेखक की लेखनी से प्रभावित होती है। एक दौर था जब आजादी के बाद कंटेंट विदेशों से आता था, लेकिन अब सर्वाधिक कंटेंट भारत से आ रहे हैं, जो हिंदुस्तानी सभ्यता व संस्कृति को मुकाम तक पहुंचा रहे हैं। उक्त विचार शहर के बस स्टैंड सम्राट कॉप्लैक्स स्थित पीसी लेब में आयोजित शिवना प्रकाशन मंच पर आयोजित पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान यहां पर मौजूद माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति दीपक तिवारी ने कहे।
श्री तिवारी ने कहा कि लेखक और साहित्यकार के लिए भाषा न केवल एक औजार है बल्कि एक ऐसा सेतु भी जिसके जरिए वह दूसरों तक पहुंच कर अपनी कल्पना और संवेदना से उसे ज्यादा मानवीय ज्यादा संवेदनशील बनाने की अघोषित और संवेदनशील कोशिश करता है। उन्होंने इस मौके पर लेखक ब्रजेश राजपूत की वो 17 दिन, लेखक मोतीलाल आलमचंद्र की सांची दानं और लेखक ज्योति ठाकुर की पुस्तक सफर में धूप बहुत थी   की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि उक्त तीनों लेखकों की पुस्तकें उनके संघर्ष की अपनी कहानी है। उन्होंने भी अपनी दो पुस्तकों के बारे में विचार प्रकट किए।
शनिवार को आयोजित शिवना प्रकाशन पुस्तक विमोचन में अपने-अपने क्षेत्रों में तीन लेखकों की पुस्तकों का विमोचन किया गया। जिसमें विशेष लेखक ब्रजेश राजपूत की वो 17 दिन की आगामी पुस्तक का पोस्टर रिलीज किया गया, इस पुस्तक में कांग्रेस की सत्ता के जाने और प्रदेश में भाजपा की सत्ता के आने का खेल उजागर किया गया है, वहीं लेखक श्यामपुर के तहसीलदार मोतीलाल आलमचंद्र की सांची दानं और लेखक राजधानी भोपाल की अजाक पुलिस अधीक्षक ज्योति ठाकुर की पुस्तक सफर में धूप बहुत थी की पुस्तक शामिल है। कार्यक्रम का संचालन करते हुए नगर के प्रसिद्ध लेखक पंकज पुरोहित सुबीर ने कहा कि आज के दौर में साहित्य को बढऩे वाले बहुत है, आज समाज में कई लेखक हैं, हर लेखक को सामने आना चाहिए, आज लेखक बनना आसान है, आज मोबाइल इंटरनेट के चलते लिखा पूरी दुनिया तक पहुंच रहा है। इसलिए साहित्य की ओर लोगों का रुझान बढऩे लगा है। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में अपर कलेक्टर विनोद चतुर्वेदी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक समीर यादव आदि ने भी मंच से यहां पर मौजूद मीडिया और साहित्कारों को संबोधित किया और कहा कि कोरोना संक्रमण काल के बाद पहली बार सोशल डिस्टेंसिंग के साथ सादगी के साथ कार्यक्रम समापन कराया गया। अतिथियों को प्रतीक चिंह का वितरण वरिष्ठ समाजसेवी अनिल पालीवाल, उमेश शर्मा, कैलाश अग्रवाल, सुनील भालेराव आदि ने किया।

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