देश विदेश से 161 लघुकथाएं पढ़ी गईं, रचनाओं का अखंड पाठ बना कीर्तिमान, मध्यप्रदेश स्थापना दिवस पर  लघुकथा  सतत पाठ

देश विदेश से 161 लघुकथाएं पढ़ी गईं, रचनाओं का अखंड पाठ बना कीर्तिमान, मध्यप्रदेश स्थापना दिवस पर लघुकथा सतत पाठ

मीडियावाला.इन।

भोपाल| साहित्य  में  व्यस्त और भागती जिंदगी के कारण छोटी रचनाएं ज्यादा लोकप्रिय हो रही हैं. ऐसी ही  एक विधा है लघु कथा। लघुकथा कारों को मंच देने के लिए अनेक कार्यक्रम भी हो रहे  है। कोरोना काल में ऑनलाइन आयोजनों की संख्या  बढ़ गई है। मध्य प्रदेश के स्थापना दिवस पर आरिणि साहित्यिक समूह,भोपाल  ने देश विदेश के 161 रचनाकारों को मंच प्रदान किया. यह एक अनूठा आयोजन बन गया।

आरिणी साहित्य समूह  ने एक नवंबर  को 'आरिणी सतत लघुकथा पाठ'  के कार्यक्रम में सुबह साढ़े दस बजे से लेकर रात के ग्यारह बज़े तक  निरंतर एक सौ एकसठ लघुकथाकारों ने लघुकथा पाठ किया। यह फेसबुक एवं लघुकथा दोनों के ही इतिहास में अपने आप में एक अनूठा कार्यक्रम रहा जिसने एक इतिहास रचा दिया। इस फेसबुक लाइव पर हुए लघुकथा के यज्ञ के अतिथियों में लघुकथा की हस्ताक्षर कांता राॅय, भोपाल श्री सतीश राठी , इंदौर और श्री संतोष सुपेकर, उज्जैन थे। श्रीमती कांता रॉय ने कहा कि लघु कथा में व्यक्ति का अंतर्द्वंद उभरता है।  श्री सतीश राठी ने बताया कि लघुकथा कथा में डॉलर की तरह शब्द खर्च करना चाहिए। संतोष सुपेकर जी का कहना है कि साहित्य को समाज के साथ चलना चाहिए और लघुकथा में विषयों के विस्तार और नवीनीकरण पर ध्यान देना चाहिए। कार्यक्रम का आरंभ डाॅ मीनू पांडेय, अध्यक्ष आरिणी चैरिटेबल फाउंडेशन के स्वागत वक्तव्य से हुआ। इसके बाद दिन भर देश विदेश के प्रसिद्ध 161 लघुकथाकारों ने अपनी अपनी एक एक लघुकथा पटल पर रोचक ढंग से प्रस्तुत की। 

समूह संयोजक बनाए गए

इस कार्यक्रम की एक महीने तैयारी चली। ग्यारह समूह बने।
प्रत्येक समूह के संयोजक बने।इनमें अनिल कुलश्रेष्ठ, नोएडा, जया आर्य, भोपाल, डाॅ रंजना शर्मा, भोपाल, सुषमा व्यास राजनिधि, इंदौर, रचना श्रीवास्तव, सतना,  प्रेक्षा सक्सेना, भोपाल, राजेन्द्र यादव, बड़ा मलहरा, सानू सम्राट, गुरु ग्राम, अभिनव सिंह बघेल, रीवा, शामिल थे। मीनू पाण्डेय, भोपाल ने  पूरे दिन मंच संभाला  और  अद्भुत सामंजस्य का उदाहरण पेश किया। हर रचनाकार को रिस्पांस दिया।  बारह घंटों से भी ज्यादा चला यह कार्यक्रम  निर्बाध रूप से संपन्न हुआ।  समय  विभाजन के अनुसार हर लघुकथाकार ने चार मिनट के भीतर की सीमित समय अवधि में  लघुकथा  फेसबुक लाइव पर प्रस्तुत की।
कार्यक्रम के आखिरी में आभार सुषमा व्यास ने माना.

प्रतिभागी लघुकथाकार
डॉ सुषमा सिंह-कानपुर से  "बेरोज़गार", सँजय कुमार सिंह, महनार बिहार से- इंसान की कीमत, महेश सिकरवार राज, आगरा से -खुशियों का गणित, शोभा रानी तिवारी, इंदौर -रिश्तों की डोर, राजीव नामदेव राना लिधौरी, टीकमगढ़ - आभार, जया आर्य, भोपाल - विछोह या मिलन, अश्वनी उम्मीद, मुंबई - डिजिटल युग, हिमानी भट्ट, इंदौर - हिंदी हैं हम, प्रेक्षा सक्सेना, भोपाल - पूर्वाग्रह, डॉ रंजना शर्मा, भोपाल- यादें, रंजना शर्मा सुमन जी इंदौर- पश्चाताप, सुभाषिनी जोशी, इंदौर -सोनम की चुप्पी, प्रीति अग्रवाल, इंदौर - समय का पहिया, डाॅ अंजुलता सिंह, दिल्ली-लकडाउन की सीख, प्रियंका श्रीवास्तव, भोपाल - न्याय, सुधा सेन 'सरिता',रीवा-राखी, मित्रा शर्मा, इंदौर-रानू की समझ, अमरप्रीत कौर देहड़,रायकोट-सोच, डाॅ रेणु श्रीवास्तव,भोपाल-नकली चेहरा, कर्नल डा गिरिजेश सक्सेना,भोपाल-आधी रोटी, रवींद्र वर्मा,आगरा - करमजली, सुनील सिंधवाल 'रोशन', रुद्र प्रयाग, उत्तराखंड-दहेज की दहलीज़, राजकुमारी चौकसे,भोपाल-प्रीति की रीति, गोकुल सोनी,भोपाल-कडवा इलाज, कल्पना विजय,भोपाल-देर है अंधेर नहीं, अशोक कुमार धमेंनियाँ,भोपाल - पलायन, डाॅ कमल किशोर दुबे,भोपाल- श्रवण कुमार, डॉ चंद्रा सायता, इंदौर-अंकुरण, सुनीता यादव, भोपाल-परिवर्तन, हंसा श्रीवास्तव,भोपाल-ये बात थी, चरणजीत सिंह कुकरेजा, भोपाल -हर दिल अजीज,मंजुला भूतड़ा, इंदौर-जैसी प्रभु की इच्छा, विनोद मिश्र सुरमनि,दतिया- अछूत का जल, डाॅ औरीना अदा,भोपाल-मेरा कसूर क्या है, रचना श्रीवास्तव,सतना-फर्क़, डाॅ सलमा जमाल,जबलपुर-सैंवैया, मधुलिका श्रीवास्तव,भोपाल-मौका, डाॅ क्षमा पांडे, भोपाल, मधुलिका सक्सेना,भोपाल -कठिनराह, डॉ.भँवर छाया मालवीया,हैदराबाद-जज़्बा, जिज्ञासा शर्मा,अफ्रीका-अनाम, शेफालिका श्रीवास्तव,भोपाल-गर्विता, सुनीता प्रकाश,भोपाल- साँसों का अभाव, वृन्दावन राय 'सरल',सागर- ज़िम्मेदार,हेमा त्रिवेदी-वीरांगना,आशा जाकड़, इन्दौर-नई.रोशनी, कुमुद दुबे, इन्दौर- दिहाड़ी में कटता जीवन, डाॅ अलका पाण्डेय, मुम्बई-मेरी चिंता छोड़ो, चंदादेवी स्वर्णकार,जबलपुर -सार्थक जीवन,डाॅ राखी सावलानी, मुंबई-अवसाद में रोशनी की किरण, अनु गंगवाल, नई दिल्ली-माँएक कीमती उपहार है, अशोक पटसारिया जी नादान, टीकमगढ़-दीक्षा,रेणुका सिहं, गाजियाबाद-बस स्टॉप, रागिनी मित्तल,कटनी-भगवान, चंद्रा प्रहलादका,कोलकाता-लक्ष्य       , प्रेमशीला सिंह, भोपाल- सौतेली माँ, संत कुमार मालवीय संत, भोपाल - पराया धन, लक्ष्मी शर्मा, जबलपुर-गंगाजल, संध्या पांडे,हरदा-बेसन के लड्डू, श्री रघुराज सिंह कर्मयोगी-फुट प्लेटिंग,डा. अंजुल कंसल -अनोखा जन्मदिन, डा.सुधा चौहान, इंदौर -सब चलता है, यशोधरा भटनागर, देवास - काॅफी हाऊस, शोभना नाईक, इंदौर -देवदूत, चंद्रकला जैन, चंडीगढ -सहज स्वीकार,हंसा मेहता, इंदौर -भावहीनता, डॉ.अर्चना श्रीवास्तव, इंदौर -परम्परा, ममता तिवारी, इंदौर -बंटवारा, रानी नारंग, इंदौर -फर्क, डाॅ शशिकला अवस्थी, इंदौर -वृद्ध आश्रम,डाॅ प्रतिभा कुमारी पाराशर, बिहार, अंजू खरबंदा, नई दिल्ली - बुलावा,.रत्ना ओझा रत्न,-नौकर, नीति अग्निहोत्री-ये कौन सी दशा, हेमा जैन, इंदौर -दान, डाॅ अंबर आविद,भोपाल, सतीश चंद्र श्रीवास्तव, भोपाल - प्यार, शशि सतीश श्रीवास्तव,भोपाल- संतोष सुख, डॉ. चेतना उपाध्याय, अजमेर -भव्य समारोह, मनोज देशमुख, भोपाल - गुड़िया, सुवर्णा जाधव, मुम्बई - जीवन चक्र, सुभाष जैन "शलभ" जबलपुर- नेताजी, मनोरमा पंत, भोपाल -आत्महत्या, मनोरमा रतले, दमोह- सही क्या, देवदत्त द्विवेदी, बड़ा मलहरा, उमा दुबे, जबलपुर - सरप्राइज़, उमा मिश्रा प्रीति जबलपुर -संतुष्टि, डॉ. अनीता तिवारी ,भोपाल-  अपना घर, सरिता बघेला,भोपाल - ममता की बेबस छाया, प्रख्या श्रीवास्तव, नोएडा- कन्या पूजन, सुसंस्कृति सिंह, भोपाल- मम्मी जी, वंदना अर्गल,देवास - परवाह, डाॅ सुनीता श्रीवास्तव,इंदौर - प्यार, कुसुम सोगानी,इंदौर -मेरी या तेरी बेटी एक समान, डॉ अर्चना मुखर्जी,भोपाल - फैसले की घड़ी, डाॅ माया दुबे, भोपाल - दो आंँखें, माया बदेका, उज्जैन - दाव, महिमा श्रीवास्तव वर्मा, भोपाल - सुलगते आँसू, डाॅ वर्षा चौबे, भोपाल - पीड़ा,डाॅ मौसमी परिहार,भोपाल - इंसान, साधना श्रीवास्तव,भोपाल - सरप्राइज़, नविता जौहरी, भोपाल-पराली, चेतना भाटी, इंदौर - पानी रे पानी, डाॅ दविंदर कौर होरा,इंदौर - सिसकती सृष्टि, अर्चना लवानिया, इंदौर - मुस्कुराहट,प्रो गोपेश वाजपेयी,भोपाल -हरछठ, डॉ मंजु गुप्ता, मुंबई - सच्ची श्रद्धांजलि, स्वाति सिंह, इंदौर-वो, ज्योत्स्ना सिंह, लखनऊ-फाईन आर्ट, राजेंद्र यादव,बड़ा मलहरा-सबक, अभिनव सिंह बघेल,रीवा-हौंसलों की उड़ान,डाॅ सुषमा दुबे, इंदौर- तेरी माँ मेरी माँ, सानू सम्राट,गुरु ग्राम -एक बदला मां से, विनीता सिंह चौहान,इंदौर-परिंदों की व्यथा, सुरेखा अग्रवाल स्वरा,लखनऊ- बन पाव, दुर्गा रानी श्रीवास्तव, भोपाल-पाप, अनिल कुलश्रेष्ठ,नोएडा-अपनी अपनी विवशता, दिनेश शर्मा, -आधे दिन की छुट्टी, विनीता शर्मा-- प्रस्थान, अर्चना राय, जबलपुर-संस्कार, सुषमा व्यास, इंदौर-प्रपोज डे, सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा, निमंत्रण, विभा तिवारी, जौनपुर-काश, कुसुम शर्मा,नीमच -आँखे, नूतन गर्ग, दिल्ली -स्वर-व्यंजन, जनक कुमारी बाघेल, भोपाल-स्वर्गलोक मेंभ्रष्टाचार, रितु दादू, इंदौर-हूक, बबली सिंह राठौर, भोपाल-झूठे झगड़े, डॉ.शैलेन्द्र दुबे, महाराष्ट्र-बकरा खा, सदानंद कवीश्वर, दिल्ली-अंतरात्मा, सुमन त्रिपाठी, भोपाल-कथा, सुरेश तन्मय,जबलपुर—नचिकेता प्रश्न, अशोक मनवानी, भोपाल-मौलिक मंत्र, एम आई सिद्दीक़ी, भोपाल-अम्मा अभी ज़िन्दा है, अनीता श्रीवास्तव, टीकमगढ़-मुर्दे का लाइव, मृदुल त्यागी, भोपाल-जिज्ञासा, निशी श्रीवास्तव,लखनऊ - बुढापा, अलका अग्रवाल सिग्तिया, मुंबई-महकते हर सिंगार, मधु कौशिक, लखनऊ -कृतज्ञ, घनश्याम मैथिल अमृत, भोपाल-बेजुबान, आशा वडनेरे,इंदौर - हिम्मत, कीर्ति विद्या सिन्हा, भोपाल-इंसानी जिम्मेदारी,मधु सक्सेना, बैंगलोर - अपनी अपनी सोच, मनोज जैन 'मधुर', भोपाल, विजया कानूनगो, इंदौर, डॉ आशा श्रीवास्तव, जबलपुर-पुकार, चित्रा राणा राघव, एटलांटा-उधार चुकाना, आराधना विसावाडिया,इंदौर-मेरा कमरा,रेनू शब्द मुखर, जयपुर - वह अपाहिज लडका, नीलम पारीक, बीकानेर - अजब आनंद,डाॅ मीनू पाण्डेय नयन,भोपाल- नई नबेली बहू, शशि बंसल गोयल, भोपाल - विकल्प, सुषमा मोघे, इंदौर - पश्चाताप, विवेक अग्रवाल, मुंबई - चैन की साँस, अंजलि सिफर, हरियाणा - सामंजस्य, डॉ मधु त्रिवेदी-जनता की सेवा, संगीता राजपूत प्रभात, दमोह - वृक्ष बचाओ,डाॅ ज्योति उपाध्याय, ग्वालियर, मालती खलतकर, इंदौर-परीक्षा, आरती सिंह एकता-दया, मिन्नी मिश्रा- सौदागर।

लघु कथाओं में  कोरोना से लेकर रिश्तों के सच और गंभीर समस्याओं से जुड़े विषय

आरिणी साहित्यिक समूह का डेढ़ सौ कथाकारों की भागीदारी से लघुकथा पाठ में एक से बढ़कर एक लघुकथाएं प्रस्तुत हुईं। संयोजक डॉ मीनू पांडे ने भी नई नवेली बहू लघुकथा पढ़ी जो बहुत सराही गई।  यह कार्यक्रम अधिकतम लेखकों की  भागीदारी और लंबी अवधि की दृष्टि से खास रहा।
 "आधी रोटी" लघुकथा कोरोना काल की पीड़ा की अभिव्यक्ति है। इसके लेखक डॉ कर्नल गिरिजेश सक्सेना "गिरीश" हैं। अशोक धमनियां और सुमन त्रिपाठी की  लघुकथा भी बहुत पसंद की गई। प्रियंका श्रीवास्तव ने खाना पूर्ति और सरिता बघेला ने ममता की छांव लघुकथा पढ़ी, जिन्हें सराहा गया,एक मजदूर स्त्री की विवशता को मार्मिक ढंग से रखा गया। अशोक मनवानी ने मानवीयता का उदाहरण देती मौलिक मंत्र नामक लघुकथा पढ़ी।

RB

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