Sambhal violence case : पुलिस पर FIR का आदेश देने वाले CJM का तबादला, उठे बड़े सवाल

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Sambhal violence case : पुलिस पर FIR का आदेश देने वाले CJM का तबादला, उठे बड़े सवाल

SAMBHAL: उत्तर प्रदेश के संभल में हुई हिंसा से जुड़ा मामला अब सिर्फ कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह न्यायिक प्रक्रिया, पुलिस जवाबदेही और प्रशासनिक फैसलों को लेकर एक बड़े विवाद का रूप ले चुका है। हिंसा मामले में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश देने वाले मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर का तबादला कर दिया गया है। उन्हें संभल से सुल्तानपुर स्थानांतरित किया गया है। इस फैसले के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

▪️ क्या था पूरा मामला

संभल में हुई हिंसा के दौरान एक युवक आलम घायल हुआ था। आरोप है कि उसे पुलिस फायरिंग में गोली लगी। इसके बाद आलम के पिता यमन ने अदालत में याचिका दाखिल की। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए CJM विभांशु सुधीर ने पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए और पाया कि मामले में प्रथम दृष्टया जांच दर्ज होना आवश्यक है। इसी आधार पर उन्होंने एएसपी अनुज चौधरी, इंस्पेक्टर अनुज तोमर सहित 15 से 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था।

▪️ कोर्ट का आदेश और पुलिस का विरोध

अदालत के इस आदेश को संभल हिंसा प्रकरण में एक अहम मोड़ माना गया। लेकिन आदेश के तुरंत बाद पुलिस प्रशासन ने खुलकर असहमति जताई। जिले के पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि इस आदेश के तहत एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी और इसे उच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी। पुलिस का तर्क था कि हिंसा से जुड़े मामलों में पहले से कार्रवाई चल रही है और कोर्ट के आदेश की वैधानिकता पर पुनर्विचार जरूरी है।

▪️ तबादला और उठते सवाल

अब इसी आदेश के कुछ समय बाद CJM विभांशु सुधीर का तबादला हो जाना कई सवाल खड़े कर रहा है। प्रशासनिक स्तर पर इसे नियमित प्रक्रिया बताया जा रहा है, लेकिन समय और परिस्थितियों को देखते हुए इसे लेकर संदेह और चर्चाएं तेज हैं। कई लोग इसे न्यायिक स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ इसे महज संयोग और प्रशासनिक आवश्यकता बता रहे हैं।

▪️ न्यायपालिका और पुलिस के बीच खिंचाव

यह पूरा घटनाक्रम न्यायपालिका और पुलिस प्रशासन के बीच बढ़ते खिंचाव को उजागर करता है। एक ओर अदालत पुलिस की जवाबदेही तय करने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर पुलिस अपने अधिकारों और प्रक्रिया का हवाला देकर आदेश को चुनौती दे रही है। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि जब आरोप खुद पुलिस पर हों, तब निष्पक्ष जांच कैसे सुनिश्चित की जाए।

▪️ हिंसा की पृष्ठभूमि

संभल में हुई हिंसा के दौरान कई लोग घायल हुए थे और हालात काफी तनावपूर्ण हो गए थे। पुलिस कार्रवाई, फायरिंग और लाठीचार्ज को लेकर तब से ही सवाल उठते रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में घायल युवक के परिवार द्वारा अदालत का दरवाजा खटखटाना और फिर पुलिस अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश आना, मामले को और गंभीर बना गया।

▪️ आगे क्या

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि उच्च न्यायालय में पुलिस की अपील पर क्या रुख अपनाया जाता है और क्या निचली अदालत के आदेश पर आगे कोई कार्रवाई होती है। साथ ही CJM के तबादले के बाद यह सवाल भी चर्चा में है कि क्या इससे मामले की दिशा प्रभावित होगी या न्यायिक प्रक्रिया अपने तय रास्ते पर आगे बढ़ेगी।

संभल हिंसा प्रकरण में यह घटनाक्रम साफ तौर पर बताता है कि मामला केवल एक हिंसक घटना का नहीं, बल्कि कानून, जवाबदेही और संस्थागत संतुलन का बन चुका है। आने वाले दिनों में इस प्रकरण पर न्यायिक और प्रशासनिक स्तर पर होने वाले फैसले दूरगामी असर डाल सकते हैं।