
Shirtless Protest: शर्टलेस विरोध राष्ट्रीय शर्मिंदगी है या विरोध का संवैधानिक तरीका?
रंजन श्रीवास्तव
यूथ कांग्रेस द्वारा दिल्ली में इंटरनेशनल एआई समिट के दौरान शर्टलेस विरोध एआई समिट की ही तरह राष्ट्रीय स्तर पर या कहें तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय है. गलगोटिया यूनिवर्सिटी के चाइनीज रोबोट से ज्यादा चर्चा अब यूथ कांग्रेस के शर्टलेस विरोध की है. यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष की गिरफ्तारी के बाद अब तक 8 लोग पुलिस द्वारा अरेस्ट किए गए हैं.
सभी के ऊपर भारतीय नागरिक संहिता के अंतर्गत गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है जैसे 61(2)- क्रिमिनल कॉन्स्पिरेसी, 121(1)- पब्लिक सर्वेंट को ड्यूटी से रोकने के लिए उनको स्वेच्छा से चोट पहुंचाना, 132- पब्लिक सर्वेंट को ड्यूटी से रोकने के लिए उनपर हमला करना, 190- अनलॉफुल असेंबली, 195(1)- रायट रोकते समय पब्लिक सर्वेंट पर हमला, 221- पब्लिक सर्वेंट को ड्यूटी में बाधा, 223(A)- पब्लिक सर्वेंट के वैध ऑर्डर की अवज्ञा, 3(5)- कॉमन इंटेंशन, 191(1)— रायटिंग, 192 — रायट भड़काने के लिए उकसाना, 196 — समूहों के बीच दुश्मनी/असहमति फैलाना, 197 — नेशनल इंटीग्रेशन के खिलाफ कृत्य.
कुछ धाराएं नॉन-बेलेबल हैं जैसे 196 और 191 जिनके अंतर्गत दोष सिद्ध होने पर अधिकतम 3 साल तक सजा का प्रावधान है. पुलिस कह रही है कि आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं
जाहिर है इस मुद्दे पर पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस विरोध प्रदर्शन पर बयान के बाद पूरे देश में राजनीतिक गर्मी बढ़ गई है. मेरठ (उत्तर प्रदेश) में एक सार्वजनिक सभा में प्रधानमंत्री ने कहा कि, “कांग्रेस ने भारत के एक वैश्विक आयोजन को अपनी गंदी और नंगी राजनीति का मंच बना दिया. कांग्रेस के नेता विदेशी मेहमानों के सामने नंगे होकर वहाँ पहुंचे. मैं कांग्रेस से पूछता हूं — देश जानता है कि आप पहले से ही नंगे हैं, फिर कपड़े उतारने की क्या जरूरत पड़ी?”
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि, “कांग्रेस विचारधारात्मक रूप से दिवालिया और गरीब हो चुकी है…एआई समिट कोई बीजेपी का कार्यक्रम नहीं था — यह देश का कार्यक्रम था, लेकिन कांग्रेस ने सभी सीमाएं लांघ दीं…दुनिया भारत को देख रही थी, लेकिन कांग्रेस ने शर्मिंदगी पैदा की.”
भोपाल सहित कई जगह भाजयुमो कार्यकर्ताओं द्वारा कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के विरोध में प्रदर्शन के दौरान दोनों तरफ झड़पें भी हुईं जिनमें कुल मिलाकर 15 लोगों से ज्यादा घायल हुए. कांग्रेस और भाजपा दोनों इस मुद्दे पर आर-पार के मूड में हैं.
कल भोपाल में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने भाषण के दौरान यूथ कांग्रेस के विरोध को जायज ठहराते हुए विरोध प्रदर्शन को उचित ठहराया.
उन्होंने कहा कि “शांतिपूर्ण विरोध हमारी ऐतिहासिक विरासत है। यह हमारे खून में है और हर भारतीय का लोकतांत्रिक अधिकार है। मैं अपने युवा कांग्रेस के बब्बर शेर साथियों पर गर्व करता हूं, जिन्होंने राष्ट्र के हित में ‘कम्प्रोमाइज्ड पीएम’ के खिलाफ निर्भीक होकर अपनी आवाज उठाई. कांग्रेस पार्टी और मैं अपने बब्बर शेर साथियों के साथ पूरी तरह खड़े हैं.”
कांग्रेस के नेताओं का यह भी पूछना है कि राष्ट्रीय शर्मिंदगी शर्टलेस विरोध है या एपस्टीन फाइल में देश के एक मंत्री का नाम आना, पीएम के नाम का उल्लेख एपस्टीन फाइल में होना, अमेरिका के सामने झुकना या चाइनीज रोबोट को इंटरनेशनल समिट में भारत में बना हुआ दिखाया जाना है.
कई नेताओं के बयान भी पक्ष और विपक्ष में आए हैं. पुलिस द्वारा एक्शन लेने के बाद एक लंबी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई आगे आती दिख रही है.
वेस्ट बंगाल, तमिलनाडु सहित कई राज्यों में आगामी समय में चुनाव होने वाले हैं. इसलिए ना तो भाजपा और ना ही कांग्रेस इस मुद्दे को हाथ से जाने देगी.
वैसे यह देश में पहली बार नहीं है जब किसी ग्रुप द्वारा शर्टलेस विरोध किया गया हो. यूथ कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा एक फोटो ट्विटर पर शेयर किया गया जिसमें हरियाणा के मंत्री अनिल विज एक ग्रुप का नेतृत्व करते हुए दिख रहे हैं और अनिल विज सहित सभी प्रदर्शनकारी शर्टलेस दिखाई पड़ रहे हैं. 2004 में मणिपुर में महिलाओं के एक समूह द्वारा अपने समुदाय के ऊपर उत्पीड़न के विरोध में असम राइफल्स मुख्यालय के सामने पूरी तरह नग्न होकर प्रदर्शन किया। 2008 में मणिपुर में फिर बच्चों ने 2004 की याद में नग्न प्रदर्शन किया. विश्व में कई जगह महिलाओं ने पर्यावरण के मुद्दे पर या तानाशाही के विरोध में कई बार नग्न प्रदर्शन किया है.
कई विपक्ष के नेताओं जैसे अखिलेश यादव तथा देश के कई वरिष्ठ पत्रकारों ने विरोध प्रदर्शन को उचित ठहराया है पर जिस तरीके से विरोध प्रदर्शन किया गया यानी शर्टलेस विरोध को उसे अनुचित बताया है.
शर्टलेस विरोध के पक्ष में खड़े होने वाले कुछ कानूनी जानकारों का यह मत सामने आया कि संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) सभी नागरिकों को स्पीच और एक्सप्रेशन की स्वतंत्रता देता है जिसमें प्रोटेस्ट और नारे लगाना शामिल है. अतः शर्टलेस विरोध गैरकानूनी नहीं है. अनुच्छेद 19(1)(b) शांतिपूर्ण और बिना हथियार के इकट्ठा होने का अधिकार देता है हालांकि अनुच्छेद 19(2) के अंतर्गत इन अधिकारों पर रीजनेबल रेस्ट्रिक्शन लग सकती हैं.





