शिवराज-मोहन का दिल्ली-मिलन, कितने गाढ़े रंग!        

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शिवराज-मोहन का दिल्ली-मिलन, कितने गाढ़े रंग!                    

आशीष दुबे की विशेष राजनीतिक रिपोर्ट 

फैज ने लिखा था-हम तो ठहरे अजबनी कितनी मदारातों के बाद,फिर बनेंगे आशना कितनी मुलाकातों के बाद..। बताते चलें कि मदारातों यानी आवभगत और आशना यानी गहरे परिचित। इसीलिए कल भोपाल से आठ सौ किमी दूर दिल्ली में जब ‘मुद्दत बाद’ केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री मोहन यादव मिले तो यह महज एक मुलाकात नहीं बल्कि नई घटना बन गई है। यह घटना भाजपा के सियासी गलियारों में टहलने वाले किस्सों,कथानकों और मंत्रालय के बंद कमरों में आला अफसरों के बीच होने वाली सरगोशियों के लिए भी अहम है। हालांकि इस मुलाकात के जाहिर अर्थ व ऑफिशियल एजेंडे हैं। लेकिन जो अन-ऑफिशियल है, वह है-मप्र की मौजूदा भाजपा राजनीति के दो अहम किरदारों के बीच की बर्फ का पिघलना !

अंदरखानों में सभी महसूस कर रहे थे कि मप्र में पिछले काफी दिनों से शिवराज ने खुद को समेट रखा था, उनका वास्ता भोपाल-विदिशा-बुधनी से ज्यादा नजर आता था तथा मप्र के बाकी मसलों पर काफी कम। इसके पीछे कई सियासी और प्रशासनिक वजहें ही थीं। शिवराज ने मप्र के मामलों में बोलना भी लगभग बंद कर रखा था। माना जाता था कि वे अपने ‘उत्तराधिकारी’ को स्पेस देने को मजबूर थे, क्योंकि दूसरी तरफ से भी ऐसी अपेक्षा रखी जाती रही। वैसे यह स्वाभाविक भी है और हर दल के भीतर की अलिखित अपेक्षा भी। बहरहाल इस बीच भोपाल के बड़े तालाब में काफी पानी बह गया। सियासी व प्रशासनिक घटनाक्रम कुछ ऐसे घूमने लगा कि चौहान व यादव की जुगलबंदी की जरूरत सत्ता व संगठन से जुड़े शीर्ष लोगों को भी होने लगी। ‘प्रशासनिक स्तर पर राजनीतिक संतुलन’ बनाने वाले अफसर भी इसे महसूस करने लगे।

मप्र के प्रशासनिक गलियारों में यह भी दबी जुबान कहा जाने लगा कि कृषि व ग्रामीण विकास जैसे भारी भरकम मंत्रालयों वाले शिवराज से मप्र को अपने कृषि वर्ष में ‘ज्यादा का वादा’ चाहिए । दूसरी तरफ कांग्रेस व राहुल गांधी द्वारा किसानों की लड़ाई के लिए मप्र से अखाड़ा खोदने की शुरूआत के मद्देनजर भी इन मामलों में भोपाल के मंत्रालय से दिल्ली के शास्त्री भवन के कृषि मंत्रालय तक अब ‘हॉटलाइन’ जरूरी होगी।

एक खास घटनाक्रम यह भी रहा कि कल दिल्ली की कृषि-ग्रामीण विकास बैठक में प्रहलाद पटेल भी उनके साथ रहे। सूत्रों की मानें तो बैठक में शिवराज ने कामकाज,फंड उपयोग संबंधी कुछ हिदायतों के साथ मप्र की भावांतर समेत अन्य मांगे मंजूर कर लीं।

उल्लेखनीय है कि कल ऑफिशियल बैठक से पहले मोहन यादव ने शिवराज से एकांत में चर्चा की। गौरतलब है कि मप्र में विधानसभा चुनाव का काउंटडाउन इस वर्ष के बीतने के बाद शुरू हो जाएगा। सीएम मोहन यादव की यह पहली चुनावी परीक्षा भी होगी। शिवराज इसे तीन बार पास कर चुके हैं। बहरहाल, आठ दिन पहले दोनों भाजपा दिग्गज भोपाल में थे और दोनों के ‘होली-मिलन’ का इंतजार राजनीतिक व प्रशासनिक हल्कों को था, मगर यह मिलन रंगपंचमी के चार दिन बाद दिल्ली में हुआ, दोनों तरफ से पहलकदमी भी हुई। अब इसका असर व रंग कितने गाढ़े हैं, यह मप्र के कृषि कैनवास से लेकर खास चेहरों पर भी जल्द नजर आ जाएगा..l