

ऑर्गन ट्रांसप्लांट की कड़ी में ‘सिकंदर’ एक बेहतर प्रयास…
कौशल किशोर चतुर्वेदी
ऑर्गन ट्रांसप्लांट पर आधारित फिल्मों की एक श्रंखला है, इसमें नया नाम ‘सिकंदर’ मूवी का जुड़ गया है। सलमान खान की नेचुरल एक्टिंग इसमें कहीं-कहीं दाएं-बाएं होती भले नजर आती है, पर फिल्म का कंसेप्ट मन में संतुष्टि का भाव भरता है। भरपूर पारिवारिक फिल्म फिल्म का एक सुखद पहलू माना जा सकता है। फिल्म यह अहसास कराती है कि ऑर्गन ट्रांसप्लांट के जरिए किस तरह कई जिंदगी संवारी जा सकती हैं और उन जिंदगियों में अपने प्रिय के जिंदा होने की अनुभूति की जा सकती है। सलमान फिल्म की स्क्रिप्ट और फिल्म की स्क्रिप्ट सलमान खान की प्रकृति पर पूरी तरह से खरी नहीं उतरती नजर आती, पर सलमान की यह फिल्म उनके कैरियर की यूनिक फिल्म के रूप में हमेशा याद की जाएगी।
ऑर्गन ट्रांसप्लांट पर कई फिल्में बनी हैं, जिनमें से कुछ प्रसिद्ध फिल्में हैं: “ए ज़िंदगी”, “डर्टी प्रीटी थिंग्स” और “ऑर्गन”। ‘ए ज़िंदगी’ फिल्म भारत में लिवर ट्रांसप्लांट की ज़रूरत वाले एक युवक की सच्ची कहानी पर आधारित है। ‘डर्टी प्रीटी थिंग्स’ फिल्म अंग प्रत्यारोपण के नैतिक और सामाजिक पहलुओं को दर्शाती है। ‘ऑर्गन’ फिल्म अंग प्रत्यारोपण के जटिल और संवेदनशील विषयों को उजागर करती है। तो ऑर्गन ट्रांसप्लांट को भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक पहलू से जोड़ती है फिल्म ‘सिकंदर’। फिल्म दर्शकों के मन में ऑर्गन डोनर बनने का भाव जगाने में सफल होती है। 30 मार्च 2025 को ईद के खास मौके पर भाईजान की ये मास मसाला मूवी सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। पर भोपाल में 31 मार्च को ही सिनेमाघर का सूनापन सलमान के अरमानों पर पानी फेरने वाला लगा।हालांकि फिल्म भीड़ जुटाने में सफल हो पाएगी या नहीं, यह आगामी दो सप्ताह में साफ हो जाएगा।
अभिनेता सलमान खान, रश्मिका मंदाना, सत्यराज फिल्म के मुख्य पात्र हैं।निर्देशक एआर मुरूगादास और निर्माता साजिद नाडियावाला हैं। रंजिश में सिकंदर की पत्नी साईंश्री राजकोट (रश्मिका मंदाना) को मौत के घाट उतारा जाता है। इसके बाद सिकंदर कैसे अपनी पत्नी के ऑर्गन से जीवन पाने वालों से जुड़ता है,यह खास है। और कैसे पत्नी की हत्या के दोषियों को सबक सिखाता है यानि बदला लेता है, फिल्म इसके इर्द-गिर्द आगे बढ़ती है। इसमें 3 लोगों की एंट्री कैसे होती है, जिस पर पूरी फिल्म का क्लाईमैक्स टिका हुआ है। इसका पता लगाने के लिए आपको सिकंदर को देखना पड़ेगा। 2 घंटे 24 मिनट की इस मूवी में कुछ भी नयापन नहीं है, पर सामाजिक नजरिए से बहुत कुछ है। रुपहले पर्दे पर सलमान खान ने खुद को एक बार फिर सुपर हीरो साबित करने की पूरी दम भरी है। पर फिल्म बेहतर थीम होने के बाद कलेक्शन बॉक्स पर कितनी खरी उतरती है, इसके बारे में दावा फिलहाल नहीं किया जा सकता। पर ऑर्गन ट्रांसप्लांट की कड़ी में ‘सिकंदर’ एक बेहतर प्रयास है, इससे इंकार नहीं किया जा सकता है…।